24 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बद्ध पद्मासन: पद्मासन का उन्नत रूप, रीढ़ की मजबूती से पाचन सुधार तक के फायदे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बद्ध पद्मासन: पद्मासन का उन्नत रूप, रीढ़ की मजबूती से पाचन सुधार तक के फायदे

सारांश

बद्ध पद्मासन सिर्फ एक योगमुद्रा नहीं — यह शरीर में एक 'ऊर्जा सर्किट' है। रीढ़ की मजबूती, पाचन सुधार और मूलाधार से सहस्रार तक चक्र-जागृति — आयुष मंत्रालय के अनुसार पद्मासन का यह उन्नत रूप उन लोगों के लिए रामबाण है जो योग को गहराई से अपनाना चाहते हैं।

मुख्य बातें

बद्ध पद्मासन पद्मासन का उन्नत स्वरूप है, जिसमें पैर मोड़कर हाथ पीठ के पीछे बाँधे जाते हैं।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन शारीरिक दृढ़ता, मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागृति तीनों के लिए उपयोगी है।
रीढ़ की हड्डी में रक्त-प्रवाह बेहतर होता है और कंधे, पीठ व जोड़ मजबूत होते हैं।
लेटकर अभ्यास करने पर पेट पर हल्का दबाव पड़ता है, जो कब्ज, अपच व गैस में राहत देता है।
योग शास्त्र के अनुसार इस आसन में मूलाधार से सहस्रार तक ऊर्जा-प्रवाह सुगम होता है।
इसे करने से पहले पद्मासन में पूर्ण दक्षता आवश्यक है; चोटग्रस्त व्यक्ति विशेषज्ञ की देखरेख में ही अभ्यास करें।

बद्ध पद्मासन योग की उन दुर्लभ मुद्राओं में से एक है जो शरीर, मन और आत्मा — तीनों स्तरों पर गहरा प्रभाव डालती है। पद्मासन का यह उन्नत स्वरूप कंधों, पीठ और जोड़ों को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी में रक्त-संचार को बेहतर करता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से शारीरिक दृढ़ता, मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागृति तीनों को पोषण मिलता है।

बद्ध पद्मासन क्या है और इसका अर्थ

संस्कृत में 'बद्ध' का अर्थ 'बंधा हुआ' और 'पद्म' का अर्थ 'कमल का फूल' है। इस आसन में पैरों को कमल की भाँति मोड़कर दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर बाँधा जाता है। यह मुद्रा शरीर में स्थिरता, संतुलन और लचीलेपन को एक साथ विकसित करती है।

गौरतलब है कि यह आसन साधारण पद्मासन की तुलना में कहीं अधिक शारीरिक लचीलेपन की माँग करता है, इसलिए इसे पद्मासन में पर्याप्त अभ्यास के बाद ही करने की सलाह दी जाती है।

रीढ़ और जोड़ों पर प्रभाव

आयुष विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन के दौरान पीठ की मांसपेशियों में गहरा खिंचाव उत्पन्न होता है, जिससे रीढ़ की हड्डी में रक्त-प्रवाह सुचारु होता है। नियमित अभ्यास से कंधे, पीठ और घुटने के जोड़ मजबूत होते हैं और शरीर की समग्र भंगिमा (posture) में सुधार आता है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब गतिहीन जीवनशैली के कारण कमर दर्द और रीढ़ संबंधी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। बद्ध पद्मासन इन समस्याओं की रोकथाम में एक सहायक अभ्यास के रूप में देखा जाता है।

पाचन तंत्र पर लाभ

आयुष विशेषज्ञों के अनुसार, जब यह आसन लेटकर किया जाता है तो पेट पर हल्का दबाव पड़ता है, जो पाचन क्रिया को सक्रिय करता है। इससे कब्ज, अपच और गैस जैसी सामान्य लेकिन कष्टकारी समस्याओं से राहत मिलती है।

नियमित अभ्यासकर्ताओं के अनुभव बताते हैं कि पाचन अंगों की मालिश जैसा प्रभाव उत्पन्न करने वाले इस आसन से भूख भी बेहतर होती है।

प्राण ऊर्जा और चक्र-जागृति

योग शास्त्र के अनुसार, मानव शरीर में नाड़ियों के माध्यम से प्राण ऊर्जा प्रवाहित होती है। बद्ध पद्मासन में जब पैर आपस में लॉक होते हैं और हाथ पीठ के पीछे बंधते हैं, तो शरीर में एक ऊर्जा सर्किट निर्मित होता है। इस सर्किट में ऊर्जा बाहर नहीं जाती, बल्कि शरीर के भीतर ही घूमकर समस्त चक्रों को सक्रिय करती है।

यह प्रक्रिया मूलाधार चक्र से लेकर सहस्रार चक्र तक ऊर्जा-प्रवाह को सुगम बनाती है, जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस होता है। यही कारण है कि यह आसन ध्यान (meditation) के लिए आदर्श स्थिति मानी जाती है।

किसे सावधानी बरतनी चाहिए

चूँकि बद्ध पद्मासन के लिए अत्यधिक शारीरिक लचीलेपन की आवश्यकता होती है, इसलिए इसे पद्मासन में पूर्ण दक्षता प्राप्त करने के बाद ही आज़माना चाहिए। घुटने, टखने या कंधे की किसी भी चोट से पीड़ित व्यक्तियों को किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करना उचित रहेगा।

आयुष मंत्रालय भी सुझाव देता है कि किसी भी उन्नत योगासन को बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के न करें। सही तकनीक और क्रमिक अभ्यास से ही इस आसन के पूर्ण लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जन-स्वास्थ्य के नज़रिए से एक सवाल ज़रूरी है: क्या ये दिशानिर्देश पर्याप्त चेतावनियों के साथ आम जनता तक पहुँच रहे हैं? उन्नत आसनों की लोकप्रियता जितनी तेज़ी से बढ़ रही है, चोट के मामले भी उसी अनुपात में बढ़ रहे हैं। बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के सोशल मीडिया पर वायरल होते योग-वीडियो इस जोखिम को और बढ़ाते हैं। आयुष मंत्रालय को लाभों के प्रचार के साथ-साथ सुरक्षित अभ्यास के लिए योग्य प्रशिक्षकों की पहुँच सुनिश्चित करने पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बद्ध पद्मासन क्या है और यह सामान्य पद्मासन से कैसे अलग है?
बद्ध पद्मासन, पद्मासन का उन्नत रूप है जिसमें पैरों को कमल की तरह मोड़ने के बाद दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर बाँधा जाता है। सामान्य पद्मासन में हाथ घुटनों पर रखे जाते हैं, जबकि बद्ध पद्मासन में हाथों की यह बँधी हुई स्थिति शरीर में एक ऊर्जा सर्किट बनाती है और अधिक लचीलेपन की माँग करती है।
बद्ध पद्मासन से पाचन कैसे सुधरता है?
आयुष विशेषज्ञों के अनुसार, जब यह आसन लेटकर किया जाता है तो पेट पर हल्का दबाव पड़ता है, जो पाचन अंगों को उत्तेजित करता है। इससे कब्ज, अपच और गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है और भूख भी बेहतर होती है।
बद्ध पद्मासन रीढ़ के लिए किस प्रकार लाभदायक है?
इस आसन के दौरान पीठ की मांसपेशियों में गहरा खिंचाव आता है और रीढ़ की हड्डी में रक्त-प्रवाह बेहतर होता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित अभ्यास से रीढ़ स्वस्थ रहती है और शरीर की भंगिमा (posture) में भी सुधार होता है।
बद्ध पद्मासन करने से पहले क्या जानना ज़रूरी है?
इस आसन के लिए अत्यधिक शारीरिक लचीलेपन की आवश्यकता होती है, इसलिए पहले पद्मासन में पूर्ण दक्षता हासिल करना ज़रूरी है। घुटने, टखने या कंधे की चोट से पीड़ित व्यक्तियों को किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका अभ्यास करना चाहिए।
बद्ध पद्मासन में ऊर्जा और चक्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
योग शास्त्र के अनुसार, इस आसन में पैरों और हाथों की लॉक स्थिति से शरीर में एक ऊर्जा सर्किट बनता है जो मूलाधार से सहस्रार तक सभी चक्रों को सक्रिय करता है। इससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस होता है, और यह ध्यान के लिए आदर्श स्थिति बन जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले