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पद्मासन: तन और मन दोनों के लिए योग का सबसे शक्तिशाली आसन, आयुष मंत्रालय ने माना प्रभावी

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पद्मासन: तन और मन दोनों के लिए योग का सबसे शक्तिशाली आसन, आयुष मंत्रालय ने माना प्रभावी

सारांश

भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति की तलाश करने वालों के लिए पद्मासन एक सुलभ और प्राकृतिक उत्तर है। आयुष मंत्रालय ने इसे एकाग्रता और आंतरिक ऊर्जा जागृति के लिए प्रभावी माना है। कमल की इस मुद्रा में नियमित अभ्यास से रक्त संचार, मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्थिरता — तीनों में सुधार होता है।

मुख्य बातें

पद्मासन का अर्थ है कमल की मुद्रा ; यह योग अनुशासन का मूल आधार माना जाता है।
आयुष मंत्रालय ने इसे मन शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक ऊर्जा जागृत करने में अत्यंत प्रभावी बताया है।
नियमित अभ्यास से छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार बेहतर होता है और मेटाबॉलिज्म में सुधार आता है।
आसन के दौरान रीढ़ और गर्दन सीधी रखें; हाथ ज्ञान मुद्रा में घुटनों पर रखें।
घुटनों, टखनों या कूल्हों में दर्द या चोट होने पर यह आसन न करें।

पद्मासन — जिसका अर्थ संस्कृत में कमल की मुद्रा है — भारतीय योग परंपरा का वह मूल आसन है जो शरीर और मस्तिष्क दोनों को एक साथ साधने की क्षमता रखता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह ध्यानात्मक मुद्रा मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने में अत्यंत प्रभावी है। आज की तेज़ रफ़्तार जीवनशैली में, जहाँ मानसिक तनाव और एकाग्रता की कमी आम समस्या बन चुकी है, पद्मासन एक सुलभ और प्राकृतिक समाधान के रूप में उभरता है।

पद्मासन क्या है और इसका महत्व

पद्मासन का नाम 'पद्म' अर्थात कमल के फूल से लिया गया है। यह केवल एक शारीरिक स्थिति नहीं, बल्कि योग अनुशासन का मूल आधार माना जाता है। आयुष मंत्रालय ने इसे एक स्थिर और सुखदायक ध्यानात्मक मुद्रा के रूप में वर्गीकृत किया है जो आंतरिक ऊर्जा के सुचारू संचार में सहायक है।

गौरतलब है कि 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले पद्मासन जैसे मूलभूत आसनों की जागरूकता और भी प्रासंगिक हो जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आसन उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो ध्यान या प्राणायाम का अभ्यास शुरू करना चाहते हैं।

शरीर पर प्रभाव और स्वास्थ्य लाभ

नियमित अभ्यास से छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार बेहतर होता है। इसके साथ ही मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है और शरीर में प्राण ऊर्जा का प्रवाह सुचारू रहता है। यह आसन योग साधकों के लिए आंतरिक शक्ति जागृत करने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है।

मानसिक स्तर पर, पद्मासन एकाग्रता को तीव्र करता है और मस्तिष्क को गहरा विश्राम प्रदान करता है — जो लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने वाले या उच्च तनाव वाले पेशों में लगे लोगों के लिए विशेष रूप से लाभदायक बताया जाता है।

पद्मासन करने की सही विधि

इस आसन का अभ्यास निम्न चरणों में किया जा सकता है:

सबसे पहले योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठें — अर्थात दोनों पैर सामने की ओर सीधे फैलाकर। इसके बाद दाहिने घुटने को मोड़ें और दाहिने पैर को बायीं जाँघ पर इस प्रकार रखें कि पैर का तलवा ऊपर की ओर हो और एड़ी नाभि के निकट हो। फिर इसी प्रकार बाएँ पैर को दाईं जाँघ पर रखें।

रीढ़ की हड्डी और गर्दन को पूरी तरह सीधा रखें। दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें — तर्जनी और अंगूठे के पोरों को मिलाकर। अभ्यास के दौरान शरीर पर जबरदस्ती दबाव न डालें; हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करें।

सावधानियाँ और किसे बचना चाहिए

जिन लोगों को घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट या गंभीर दर्द हो, उन्हें यह आसन करने से बचना चाहिए। पैरों को जबरदस्ती मोड़ने या घुटनों को ज़मीन पर दबाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। नए अभ्यासकर्ताओं को किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में शुरुआत करने की सलाह दी जाती है।

आगे की राह

पद्मासन उन लोगों के लिए एक आदर्श प्रारंभिक बिंदु है जो योग और ध्यान की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं। आयुष मंत्रालय की मान्यता और योग विशेषज्ञों की सिफारिशों के साथ, यह आसन आने वाले समय में और अधिक लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देना ज़रूरी है कि सरकारी अनुशंसाएँ अक्सर नैदानिक साक्ष्य की जगह परंपरागत ज्ञान पर आधारित होती हैं। जहाँ योग के मानसिक स्वास्थ्य लाभों पर अंतर्राष्ट्रीय शोध बढ़ रहा है, वहीं भारत में योग को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में शामिल करने की रफ़्तार अभी भी धीमी है। पद्मासन जैसे आसनों को स्कूली पाठ्यक्रम और कार्यस्थल कल्याण कार्यक्रमों में व्यवस्थित रूप से जोड़ा जाए, तभी इसका व्यापक सामाजिक लाभ संभव है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मासन क्या है और इसका नाम कहाँ से आया?
पद्मासन एक ध्यानात्मक योग मुद्रा है जिसका नाम संस्कृत शब्द 'पद्म' अर्थात कमल के फूल से लिया गया है। इसे योग अनुशासन का मूल आधार माना जाता है और आयुष मंत्रालय ने इसे मन को शांत करने तथा एकाग्रता बढ़ाने में प्रभावी बताया है।
पद्मासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
नियमित अभ्यास से छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार बेहतर होता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और शरीर में प्राण ऊर्जा का प्रवाह सुचारू रहता है। मानसिक स्तर पर यह एकाग्रता तीव्र करता है और मस्तिष्क को गहरा विश्राम देता है।
पद्मासन कैसे करें — सही विधि क्या है?
योगा मैट पर दंडासन में बैठें, दाहिने पैर को बायीं जाँघ पर और फिर बाएँ पैर को दाईं जाँघ पर रखें। रीढ़ और गर्दन सीधी रखें और हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें। शरीर पर जबरदस्ती दबाव न डालें।
पद्मासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट या गंभीर दर्द होने पर पद्मासन से बचना चाहिए। पैरों को जबरदस्ती मोड़ने या घुटनों को ज़मीन पर दबाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। नए अभ्यासकर्ताओं को प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में शुरुआत करनी चाहिए।
क्या पद्मासन ध्यान और प्राणायाम के लिए उपयुक्त है?
हाँ, पद्मासन को ध्यान और प्राणायाम के लिए सबसे उपयुक्त आसनों में से एक माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह मुद्रा स्थिर और सुखदायक है, जो दीर्घकालिक ध्यान अभ्यास के लिए आदर्श आधार प्रदान करती है।
राष्ट्र प्रेस
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