उत्थित पद्मासन: बेहतर मेटाबॉलिज्म और रक्त संचार के लिए एक अनूठा योगासन
सारांश
Key Takeaways
- उत्थित पद्मासन मेटाबॉलिज्म और रक्त संचार को बढ़ाता है।
- यह एकाग्रता में सुधार करता है।
- नियमित अभ्यास से आंतरिक शक्ति जागृत होती है।
- यह आसन विशेष रूप से छात्रों के लिए लाभकारी है।
- घुटने या टखनों की चोट होने पर इसे न करें।
नई दिल्ली, २ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में हर व्यक्ति स्वस्थ रहने की चाह रखता है, लेकिन समय की कमी के कारण यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में योग एक सरल और प्रभावी विकल्प है, जिसे कम समय में अपनाया जा सकता है और इसके अनेक लाभ हैं।
इनमें से एक है उत्थित पद्मासन, जिसका नियमित अभ्यास करने से शरीर और मन दोनों को कई फायदे होते हैं।
उत्थित एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है, फैला हुआ या खींचा। इस शब्द का उपयोग उन योगासनों के नाम में किया जाता है, जिनमें शरीर को फैलाया या खींचा जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, उत्थित पद्मासन एक शक्तिशाली योगासन है जो संतुलन, एकाग्रता और शारीरिक-मानसिक क्षमता को बढ़ाता है। यह आसन विशेष रूप से हाथों, कंधों, कलाइयों और कोर मसल्स को मज़बूत करता है। यह पद्मासन की स्थिति में बैठकर हाथों के बल पूरे शरीर को ऊपर उठाने की क्रिया है।
यदि कोई इस आसन का नियमित अभ्यास करता है, तो उसके छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार बेहतर होता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और शरीर में प्राण ऊर्जा का संचार सुचारू रूप से होता है। यह योग साधकों के लिए आंतरिक शक्ति जागृत करने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। उत्थित पद्मासन छात्रों के लिए भी बेहद कारगर है। इसके अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है, जो किसी भी कार्य के लिए बहुत आवश्यक है।
उत्थित पद्मासन से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। इसे करने के लिए सबसे पहले पद्मासन (कमल आसन) की मुद्रा में आराम से बैठ जाएं। अब दोनों हथेलियों को शरीर के बगल में जमीन पर मजबूती से रखें। सांस लेते हुए हाथों पर पूरा भार डालें और कूल्हों सहित पूरे शरीर को धीरे-धीरे जमीन से ऊपर उठाएं। इस दौरान अपनी क्षमता अनुसार गर्दन और सिर को बिल्कुल सीधा और नजर सामने रखें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे शरीर को वापस जमीन पर लेकर आएं।
यदि आपके घुटनों या टखनों में गंभीर चोट या गठिया की समस्या है, तो यह आसन न करें। शुरुआत में जबरदस्ती न करें, पहले अर्ध-पद्मासन या तितली आसन का अभ्यास करें।