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पद्मासन: तन-मन की शांति का योगिक मूल मंत्र, आयुष मंत्रालय ने बताए लाभ

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पद्मासन: तन-मन की शांति का योगिक मूल मंत्र, आयुष मंत्रालय ने बताए लाभ

सारांश

भागदौड़ भरे जीवन में मानसिक शांति की तलाश कर रहे लोगों के लिए पद्मासन एक प्राचीन और सिद्ध उत्तर है। आयुष मंत्रालय ने इसे एकाग्रता और प्राण ऊर्जा के लिए योग का मूल आधार बताया है — कोई उपकरण नहीं, कोई खर्च नहीं, बस सही मुद्रा और नियमित अभ्यास।

मुख्य बातें

पद्मासन संस्कृत के शब्द 'पद्म' (कमल) से बना है और योग की सबसे प्रमुख ध्यानात्मक मुद्राओं में गिना जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन मन शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक ऊर्जा जागृत करने में अत्यंत प्रभावी है।
नियमित अभ्यास से रक्त संचार, मेटाबॉलिज्म और प्राण ऊर्जा के प्रवाह में सुधार होता है।
अभ्यास के दौरान रीढ़ सीधी रखें और हाथों को ज्ञान मुद्रा में घुटनों पर रखें।
घुटनों, टखनों या कूल्हों में दर्द या चोट होने पर इस आसन से बचें।

पद्मासन — योग विज्ञान की सबसे प्राचीन और प्रभावशाली ध्यानात्मक मुद्राओं में से एक — आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मानसिक शांति और एकाग्रता पाने का एक सिद्ध प्राकृतिक उपाय माना जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने में अत्यंत प्रभावी है।

पद्मासन का अर्थ और महत्व

संस्कृत के शब्द 'पद्म' — अर्थात् कमल का फूल — से व्युत्पन्न इस आसन का नाम उसकी मुद्रा की सुंदरता और स्थिरता को दर्शाता है। यह केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन की मानसिक थकान को दूर कर नई ऊर्जा भरने का एक समग्र माध्यम है। आयुष मंत्रालय इसे योग अनुशासन का मूल आधार मानता है।

शारीरिक और मानसिक लाभ

नियमित अभ्यास से छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार बेहतर होता है। इसके साथ ही मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है और शरीर में प्राण ऊर्जा का प्रवाह सुचारू रूप से होता है। योग साधकों के लिए यह आंतरिक शक्ति जागृत करने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है।

यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब शहरी जीवनशैली से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और लोग सरल, दवा-मुक्त समाधान की तलाश में हैं।

पद्मासन करने की सही विधि

इस आसन का अभ्यास निम्नलिखित चरणों में करें:

सबसे पहले योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठें। दाहिने घुटने को मोड़ें और दाहिने पैर को बायीं जाँघ पर इस प्रकार रखें कि पैर का तलवा ऊपर की ओर रहे और एड़ी नाभि के पास हो। इसी प्रकार बाएं घुटने को मोड़ें और बाएं पैर को दाईं जाँघ पर रखें।

रीढ़ की हड्डी और गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें। हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा — तर्जनी और अंगूठे के पोरों को मिलाकर — में रखें। अभ्यास के दौरान शरीर पर जबरदस्ती दबाव न डालें; सदैव अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करें।

सावधानियाँ और किसे बचना चाहिए

घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट या गंभीर दर्द होने पर इस आसन से परहेज करें। पैरों को जबरदस्ती मोड़ने या घुटनों को जमीन पर दबाने का प्रयास कभी न करें। किसी भी नई योग दिनचर्या शुरू करने से पहले प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित रहता है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और पद्मासन की प्रासंगिकता

प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के निकट आते ही पद्मासन जैसे मूलभूत आसनों की चर्चा और अधिक बढ़ जाती है। आयुष मंत्रालय की पहलों ने इस प्राचीन अभ्यास को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पद्मासन जैसे सरल आसनों को दैनिक दिनचर्या में शामिल करना दीर्घकालिक मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक स्थायी कदम हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में प्रशिक्षित योग शिक्षकों की पहुँच अभी भी सीमित है। पद्मासन जैसे आसनों को बिना उचित मार्गदर्शन के अपनाने से घुटनों की चोट का जोखिम वास्तविक है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। मानसिक स्वास्थ्य संकट के इस दौर में योग एक पूरक उपाय है, न कि पेशेवर चिकित्सा का विकल्प — यह अंतर स्पष्ट रखना ज़रूरी है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा?
पद्मासन एक प्राचीन योगिक ध्यान मुद्रा है जिसमें दोनों पैरों को एक-दूसरे की जाँघों पर रखकर बैठा जाता है। इसका नाम संस्कृत के शब्द 'पद्म' अर्थात् कमल के फूल से लिया गया है, जो इस मुद्रा की स्थिरता और सौंदर्य को दर्शाता है।
पद्मासन के मुख्य फायदे क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार पद्मासन मन को शांत करता है, एकाग्रता बढ़ाता है और आंतरिक ऊर्जा जागृत करता है। नियमित अभ्यास से छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार बेहतर होता है, मेटाबॉलिज्म सुधरता है और प्राण ऊर्जा का प्रवाह सुचारू होता है।
पद्मासन कैसे करें — सही विधि क्या है?
योगा मैट पर दंडासन में बैठकर पहले दाहिने पैर को बायीं जाँघ पर रखें, फिर बाएं पैर को दाईं जाँघ पर रखें। रीढ़ और गर्दन सीधी रखें और हाथों को ज्ञान मुद्रा में घुटनों पर रखें। शरीर पर जबरदस्ती दबाव न डालें।
पद्मासन किसे नहीं करना चाहिए?
घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट या गंभीर दर्द होने पर पद्मासन से परहेज करना चाहिए। पैरों को जबरदस्ती मोड़ने या घुटनों को जमीन पर दबाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। नई योग दिनचर्या शुरू करने से पहले प्रशिक्षित विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।
पद्मासन को योग का मूल आधार क्यों माना जाता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार पद्मासन एक स्थिर और सुखदायक ध्यानात्मक मुद्रा है जो योग अनुशासन की नींव मानी जाती है। यह शरीर और मन दोनों को एक साथ साधती है, जिससे यह ध्यान और प्राणायाम के अभ्यास के लिए आदर्श आधार बनती है।
राष्ट्र प्रेस
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