7 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पद्मासन: तन और मन की शांति का योग-विज्ञान, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पद्मासन: तन और मन की शांति का योग-विज्ञान, आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे

सारांश

भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक शांति की तलाश का जवाब सदियों पुराने पद्मासन में है। आयुष मंत्रालय ने इसे रक्त संचार सुधारने, मेटाबॉलिज्म बढ़ाने और प्राण ऊर्जा जागृत करने में प्रभावी बताया है — बिना किसी उपकरण या खर्च के।

मुख्य बातें

पद्मासन संस्कृत के 'पद्म' (कमल) से बना है और इसे योग अनुशासन का मूल आधार माना जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक ऊर्जा जागृत करने में अत्यंत प्रभावी है।
नियमित अभ्यास से रक्त संचार , मेटाबॉलिज्म और प्राण ऊर्जा प्रवाह में सुधार होता है।
घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट या गंभीर दर्द होने पर इस आसन से बचना चाहिए।
शुरुआती अभ्यासियों को प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में अभ्यास करने की सलाह दी जाती है।

पद्मासन — जिसका शाब्दिक अर्थ है 'कमल की मुद्रा' — आधुनिक जीवन की मानसिक थकान और एकाग्रता की कमी से निपटने का एक प्रमाणित योगिक उपाय है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह ध्यानात्मक मुद्रा मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने में अत्यंत प्रभावी है। विशेषज्ञ इसे योग अनुशासन का मूल आधार मानते हैं।

पद्मासन क्या है और इसकी उत्पत्ति

संस्कृत के शब्द 'पद्म' यानी कमल के फूल से प्रेरित यह आसन केवल एक शारीरिक मुद्रा नहीं है। यह शरीर, मन और प्राण ऊर्जा के संतुलन का माध्यम है। सदियों से योग साधक ध्यान और प्राणायाम के अभ्यास के लिए इसी मुद्रा का उपयोग करते आए हैं। यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब भागदौड़ भरी दिनचर्या में मानसिक तनाव एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है।

आयुष मंत्रालय की राय और वैज्ञानिक आधार

आयुष मंत्रालय ने पद्मासन को एक स्थिर एवं सुखदायक ध्यानात्मक मुद्रा के रूप में मान्यता दी है। मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार बेहतर होता है, मेटाबॉलिज्म में सुधार आता है और शरीर में प्राण ऊर्जा का प्रवाह सुचारू होता है। गौरतलब है कि यह उन गिने-चुने आसनों में से एक है जिसे सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य परामर्श में शामिल किया है।

पद्मासन करने की सही विधि

इस आसन का अभ्यास इस प्रकार करें:

सबसे पहले योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठें — यानी दोनों पैर सामने फैलाकर। दाहिने घुटने को मोड़ें और दाहिने पैर को बायीं जांघ पर इस प्रकार रखें कि तलवा ऊपर की ओर रहे और एड़ी नाभि के निकट हो। इसी प्रकार बाएं पैर को दाईं जांघ पर रखें। रीढ़ की हड्डी और गर्दन को सीधा रखें तथा हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें — तर्जनी और अंगूठे के पोरों को मिलाकर। शरीर पर किसी भी प्रकार का जबरदस्ती दबाव न डालें; अभ्यास हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार करें।

सावधानियाँ और किन्हें बचना चाहिए

घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट अथवा गंभीर दर्द होने पर इस आसन का अभ्यास न करें। पैरों को जबरदस्ती मोड़ने या घुटनों को जमीन पर दबाने का प्रयास करना जोड़ों को नुकसान पहुँचा सकता है। शुरुआती अभ्यासियों को किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में ही इसे सीखना चाहिए।

आम जनता पर असर और आगे की राह

कार्यालयीन जीवन में घंटों स्क्रीन के सामने बैठे रहने से उत्पन्न तनाव और पीठ दर्द की समस्याओं में पद्मासन एक सुलभ और निःशुल्क विकल्प प्रस्तुत करता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) से पहले इस तरह की जागरूकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रतिदिन मात्र 10 से 15 मिनट के नियमित अभ्यास से दीर्घकालिक मानसिक और शारीरिक लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि सरकारी स्तर पर योग को बढ़ावा देने और ज़मीनी स्तर पर प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की उपलब्धता के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहाँ मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ सीमित हैं, वहाँ पद्मासन जैसे सुलभ अभ्यास वास्तव में परिवर्तनकारी हो सकते हैं — बशर्ते सही मार्गदर्शन मिले। बिना निगरानी के गलत तरीके से किया गया अभ्यास जोड़ों को नुकसान पहुँचा सकता है, जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा?
पद्मासन एक ध्यानात्मक योग मुद्रा है जिसमें दोनों पैरों को विपरीत जांघों पर रखकर बैठा जाता है। इसका नाम संस्कृत शब्द 'पद्म' यानी कमल के फूल से लिया गया है, क्योंकि इस मुद्रा में बैठे व्यक्ति की आकृति खिले हुए कमल जैसी दिखती है।
पद्मासन के मुख्य फायदे क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, पद्मासन के नियमित अभ्यास से मानसिक शांति, बेहतर एकाग्रता, रक्त संचार में सुधार और मेटाबॉलिज्म में वृद्धि होती है। यह प्राण ऊर्जा के सुचारू प्रवाह में भी सहायक है।
पद्मासन कैसे करें — सही विधि क्या है?
योगा मैट पर दंडासन में बैठकर पहले दाहिने पैर को बायीं जांघ पर और फिर बाएं पैर को दाईं जांघ पर रखें। रीढ़ और गर्दन सीधी रखें, हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें। शरीर पर कोई जबरदस्ती न करें और अपनी क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें।
पद्मासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट या गंभीर दर्द होने पर पद्मासन से बचना चाहिए। पैरों को जबरदस्ती मोड़ने या घुटनों को जमीन पर दबाने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे जोड़ों को नुकसान हो सकता है।
पद्मासन और मानसिक स्वास्थ्य का क्या संबंध है?
पद्मासन एक ध्यानात्मक मुद्रा है जो तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सहायक मानी जाती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह मन को शांत कर एकाग्रता बढ़ाता है, जो आधुनिक जीवन के मानसिक तनाव से निपटने में उपयोगी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले