पेइचिंग में 12वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: भारतीय दूतावास में 1,000 से अधिक प्रतिभागियों ने किया योगाभ्यास
सारांश
मुख्य बातें
पेइचिंग स्थित भारतीय दूतावास के प्रांगण में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक भव्य योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें 1,000 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह कार्यक्रम 21 जून 2026 से दो दिन पूर्व, शुक्रवार को आयोजित किया गया था। इस आयोजन में भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय चीनी नागरिक और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम का स्वरूप और थीम
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'योग फॉर हेल्दी एजिंग' रखी गई है, जिसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि बढ़ती उम्र में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने में योग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। करीब दो घंटे तक चले इस योग सत्र में चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी और भारतीय दूतावास के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी आम प्रतिभागियों के साथ योगाभ्यास किया।
अनुभवी योग गुरुओं का मार्गदर्शन
इस विशेष सत्र में योगी मोहन, हेमंत कुमार, आशीष बहुगुणा और ध्यान विशेषज्ञ डॉ. आर.एस. भोगल जैसे अनुभवी योग गुरुओं ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। योग गुरु योगी मोहन ने बताया कि इस बार प्रतिभागियों को 'पूर्ण योग' का अनुभव कराया गया — जिसका अर्थ केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि शरीर, मन और प्राण के बीच संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में तनाव से पूरी तरह बचना संभव नहीं, किंतु योग हमें यह सिखाता है कि तनाव के साथ सकारात्मक तरीके से कैसे जिया जाए।
विशेषज्ञों की राय: योग एक वैश्विक संपत्ति
कैवल्यधाम के रिसर्च डायरेक्टर और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. रंजीत सिंह भोगल ने कहा कि पेइचिंग में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि योग अब केवल भारत की विरासत नहीं रहा, बल्कि यह पूरी दुनिया की साझा धरोहर बन चुका है। उनके अनुसार, योग आज एक 'वैश्विक संपत्ति' है और इसका लाभ समस्त मानवता को मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह आयोजन एक वैश्विक सांस्कृतिक सेतु की भाँति कार्य कर रहा है, जो भिन्न-भिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों को एकसूत्र में पिरोता है।
चीन में बढ़ती योग की लोकप्रियता
पिछले कुछ वर्षों में चीन में योग के प्रति रुचि उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। स्थानीय चीनी नागरिक ग्रेस ने कहा, 'वर्षों से योग करने की वजह से मेरे शरीर और मन दोनों में सकारात्मक बदलाव आया है। अगर कोई व्यक्ति अपने स्वास्थ्य में सुधार चाहता है, तो उसे नियमित रूप से योग जरूर करना चाहिए।' विशेषज्ञों के अनुसार, इस बढ़ती भागीदारी से भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक संबंध भी प्रगाढ़ हो रहे हैं।
योग दिवस की वैश्विक यात्रा
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में आधिकारिक मान्यता प्रदान की थी। तब से अब तक योग का वैश्विक दायरा निरंतर विस्तृत होता जा रहा है। पेइचिंग में इस वर्ष उमड़ी भीड़ इस बात का जीवंत प्रमाण है। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि जब 1,000 लोग एक साथ एक ही स्थान पर योग करते हैं, तो वे भाषा, देश और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक साझा मानवीय भावना का हिस्सा बन जाते हैं — और यही योग की सबसे बड़ी शक्ति है।