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पश्चिम एशिया में संकट: ईरान पर हमले से शीर्ष नेताओं का सफाया

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पश्चिम एशिया में संकट: ईरान पर हमले से शीर्ष नेताओं का सफाया

सारांश

पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष ने कई प्रमुख ईरानी नेताओं की जान ले ली है। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों में ईरान के शक्तिशाली अधिकारी मारे गए हैं, जिससे देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है।

मुख्य बातें

ईरान के कई शीर्ष नेता मारे गए हैं।
संयुक्त हमले में अमेरिका और इजरायल शामिल थे।
यह संकट राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव की भी हत्या हुई।
संघर्ष का क्षेत्रीय प्रभाव गंभीर हो सकता है।

नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष की चिंगारी भड़क उठी है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया। इस संयुक्त कार्रवाई में ईरान के कई प्रमुख नेता और शीर्ष अधिकारी लगभग खत्म हो गए। यह सिलसिला अभी भी जारी है। ये ऐसे नेता थे जो प्रशासन का संचालन करते थे और देश ने हमेशा इनकी ओर आशा

पहले दिन की आश्चर्यजनक एयर स्ट्राइक में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई। उनके साथ कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और परिवार के लोग भी मारे गए। इस घटना का खुलासा हर दिन नई जानकारी के साथ हो रहा है।

1 मार्च को, देश के आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ और रक्षा मंत्री सैयद अब्दुलरहीम मौसवी की मौत की जानकारी स्टेट टेलीविजन ने दी, जिसमें बताया गया कि वे एक हवाई हमले में मारे गए। यह हमला डिफेंस काउंसिल की एक बैठक को निशाना बनाकर किया गया था।

इसके अगले दिन 2 मार्च को, ईरान की न्यायपालिका ने पुष्टि की कि शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख जनरल मोहम्मद पाकपुर भी उन लोगों में शामिल थे जो इस हमले के शिकार बने।

मोहम्मद शिराजी की मौत ने ईरान को बड़ा झटका दिया, जिन्होंने 1989 से लेकर अपनी मृत्यु तक सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के मिलिट्री ब्यूरो के प्रमुख के रूप में कार्य किया। वे ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों और सुप्रीम लीडर के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थे।

सालेह असादी, जो ईरान के एक सैन्य खुफिया अधिकारी थे, ने खातम-अल-अंबिया सेंट्रल मुख्यालय में खुफिया विभाग के प्रमुख के रूप में कार्य किया। इस मुख्यालय का काम ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के भीतर आपातकालीन कमांड संरचना बनाना था।

28 मार्च के बाद, एक और शीर्ष नेता का जाना ईरान को हमेशा याद रहेगा, वह हैं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव और युद्ध के समय के महत्वपूर्ण रणनीतिकार अली लारीजानी। इनके साथ बसीज कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी की भी मौत हुई, ये दोनों 17 मार्च को तेहरान पर किए गए सटीक हमलों का शिकार बने थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान पर अमेरिका और इजरायल का हमला कब हुआ?
यह हमला 28 फरवरी को हुआ था।
कौन-कौन से प्रमुख नेता इस हमले में मारे गए?
इस हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई, सैयद अब्दुलरहीम मौसवी, और जनरल मोहम्मद पाकपुर सहित कई नेता मारे गए।
क्या ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव की भी मौत हुई?
हाँ, अली लारीजानी की भी मौत इस हमले में हुई।
इस हमले के बाद ईरान की प्रतिक्रिया क्या थी?
ईरान ने इस हमले को गंभीरता से लिया है और इसके खिलाफ ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया है।
क्या यह संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करेगा?
हाँ, यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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