ईरान ने संवर्धित यूरेनियम निर्यात से इनकार किया, तस्नीम ने सऊदी मीडिया रिपोर्ट को बताया गलत
सारांश
मुख्य बातें
तेहरान ने 26 मई 2026 को स्पष्ट कर दिया कि उसने अपने संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने पर कोई सहमति नहीं दी है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने उन दावों को सिरे से खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि ईरान अपने उच्च स्तर के संवर्धित परमाणु पदार्थ को किसी अन्य देश में स्थानांतरित करने के लिए तैयार है। यह खंडन ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है।
विवाद की जड़: सऊदी मीडिया की रिपोर्ट
सऊदी अरब के चैनल अल हदाथ ने दावा किया था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संभावित परमाणु समझौते के तहत ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम बाहर भेजने पर राज़ी हो सकता है। तस्नीम एजेंसी ने अपनी जाँच के बाद इस दावे को गलत ठहराया और कहा कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) में कहीं भी परमाणु पदार्थों के हस्तांतरण का उल्लेख नहीं है।
तस्नीम के अनुसार, सऊदी मीडिया की ऐसी खबरें अमेरिका की 'मनोवैज्ञानिक रणनीति' का हिस्सा हो सकती हैं, जिनका मकसद चल रही वार्ता के माहौल को प्रभावित करना है।
ईरान की आधिकारिक स्थिति
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघाद्र ने सोमवार को देश के नाम संदेश में दो टूक कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के दबाव का सामना करने के लिए राष्ट्रीय एकता और मजबूत सहयोग की अपील की।
इससे पहले शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी चैनल आईआरआईबी से बातचीत में कहा था कि दोनों देश संघर्ष समाप्त करने के लिए एक एमओयू को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रस्तावित एमओयू में क्या है
बघाई के अनुसार, दोनों पक्ष पहले 14 बिंदुओं वाले एमओयू पर सहमति बनाना चाहते हैं। इसके बाद 30 से 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने का लक्ष्य है। इस प्रस्तावित ढाँचे में अमेरिका द्वारा समुद्री हमले रोकना, नौसैनिक घेराबंदी समाप्त करना और विदेशों में फँसी ईरानी संपत्तियाँ जारी करना जैसे अहम मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि ईरान ने परमाणु गतिविधियों को लेकर कोई नया वादा नहीं किया है।
संघर्ष विराम की पृष्ठभूमि
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। हाल के हफ्तों में कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है, जिनमें अलग-अलग शर्तों पर चर्चा की गई है।
आगे क्या होगा
परमाणु वार्ता की अगली दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष 14-बिंदु एमओयू पर कितनी जल्दी सहमति बना पाते हैं। ईरान का स्पष्ट रुख और अमेरिकी मीडिया रणनीति के आरोप बातचीत को और पेचीदा बना सकते हैं।