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ईरान ने संवर्धित यूरेनियम निर्यात से इनकार किया, तस्नीम ने सऊदी मीडिया रिपोर्ट को बताया गलत

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ईरान ने संवर्धित यूरेनियम निर्यात से इनकार किया, तस्नीम ने सऊदी मीडिया रिपोर्ट को बताया गलत

सारांश

ईरान ने संवर्धित यूरेनियम बाहर भेजने की खबरों को 'मनोवैज्ञानिक रणनीति' करार देते हुए खारिज किया। अमेरिका-ईरान के बीच 14-बिंदु एमओयू पर बातचीत जारी है, लेकिन परमाणु पदार्थ हस्तांतरण का कोई वादा नहीं — यह वार्ता की सबसे बड़ी अनसुलझी गाँठ बनी हुई है।

मुख्य बातें

ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी तस्नीम ने 26 मई 2026 को संवर्धित यूरेनियम निर्यात की खबरों को गलत बताया।
सऊदी चैनल अल हदाथ की रिपोर्ट में दावा था कि ईरान यूरेनियम बाहर भेजने को तैयार है — तस्नीम ने इसे अमेरिका की 'मनोवैज्ञानिक रणनीति' का हिस्सा बताया।
ईरान के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता इस्माइल बघाई के अनुसार, दोनों देश 14-बिंदु एमओयू पर सहमति के बाद 30-60 दिनों में अंतिम समझौते का लक्ष्य रख रहे हैं।
प्रस्तावित एमओयू में समुद्री हमले रोकना, नौसैनिक घेराबंदी हटाना और ईरानी संपत्तियाँ जारी करना शामिल।
8 अप्रैल के युद्धविराम के बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही थी।

तेहरान ने 26 मई 2026 को स्पष्ट कर दिया कि उसने अपने संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने पर कोई सहमति नहीं दी है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने उन दावों को सिरे से खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि ईरान अपने उच्च स्तर के संवर्धित परमाणु पदार्थ को किसी अन्य देश में स्थानांतरित करने के लिए तैयार है। यह खंडन ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है।

विवाद की जड़: सऊदी मीडिया की रिपोर्ट

सऊदी अरब के चैनल अल हदाथ ने दावा किया था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संभावित परमाणु समझौते के तहत ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम बाहर भेजने पर राज़ी हो सकता है। तस्नीम एजेंसी ने अपनी जाँच के बाद इस दावे को गलत ठहराया और कहा कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) में कहीं भी परमाणु पदार्थों के हस्तांतरण का उल्लेख नहीं है।

तस्नीम के अनुसार, सऊदी मीडिया की ऐसी खबरें अमेरिका की 'मनोवैज्ञानिक रणनीति' का हिस्सा हो सकती हैं, जिनका मकसद चल रही वार्ता के माहौल को प्रभावित करना है।

ईरान की आधिकारिक स्थिति

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघाद्र ने सोमवार को देश के नाम संदेश में दो टूक कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल के दबाव का सामना करने के लिए राष्ट्रीय एकता और मजबूत सहयोग की अपील की।

इससे पहले शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी चैनल आईआरआईबी से बातचीत में कहा था कि दोनों देश संघर्ष समाप्त करने के लिए एक एमओयू को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रस्तावित एमओयू में क्या है

बघाई के अनुसार, दोनों पक्ष पहले 14 बिंदुओं वाले एमओयू पर सहमति बनाना चाहते हैं। इसके बाद 30 से 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने का लक्ष्य है। इस प्रस्तावित ढाँचे में अमेरिका द्वारा समुद्री हमले रोकना, नौसैनिक घेराबंदी समाप्त करना और विदेशों में फँसी ईरानी संपत्तियाँ जारी करना जैसे अहम मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि ईरान ने परमाणु गतिविधियों को लेकर कोई नया वादा नहीं किया है।

संघर्ष विराम की पृष्ठभूमि

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। हाल के हफ्तों में कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है, जिनमें अलग-अलग शर्तों पर चर्चा की गई है।

आगे क्या होगा

परमाणु वार्ता की अगली दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष 14-बिंदु एमओयू पर कितनी जल्दी सहमति बना पाते हैं। ईरान का स्पष्ट रुख और अमेरिकी मीडिया रणनीति के आरोप बातचीत को और पेचीदा बना सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वार्ता की असली जटिलता को उजागर करता है — परमाणु पदार्थ हस्तांतरण वह रेखा है जिसे तेहरान अभी पार करने को तैयार नहीं। तस्नीम का 'मनोवैज्ञानिक रणनीति' वाला आरोप बताता है कि दोनों पक्ष बातचीत की मेज़ के साथ-साथ सूचना-युद्ध भी लड़ रहे हैं। इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के बाद 14-बिंदु एमओयू एक संभावित रास्ता ज़रूर है, लेकिन परमाणु गतिविधियों पर कोई ठोस वादा न होना यह दर्शाता है कि असली मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने संवर्धित यूरेनियम निर्यात से इनकार क्यों किया?
ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी तस्नीम ने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच चर्चा में शामिल प्रस्तावित एमओयू में परमाणु पदार्थ हस्तांतरण का कोई उल्लेख नहीं है। एजेंसी ने सऊदी मीडिया की रिपोर्ट को अमेरिका की 'मनोवैज्ञानिक रणनीति' का हिस्सा बताया।
ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित एमओयू में क्या है?
विदेश मंत्रालय प्रवक्ता इस्माइल बघाई के अनुसार, 14-बिंदु एमओयू में अमेरिका द्वारा समुद्री हमले रोकना, नौसैनिक घेराबंदी समाप्त करना और विदेशों में फँसी ईरानी संपत्तियाँ जारी करना शामिल है। एमओयू पर सहमति के बाद 30 से 60 दिनों में अंतिम समझौते का लक्ष्य है।
ईरान-अमेरिका युद्धविराम कब और कैसे हुआ?
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 40 दिनों के संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।
सऊदी चैनल अल हदाथ ने क्या दावा किया था?
अल हदाथ ने रिपोर्ट किया था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संभावित परमाणु समझौते के तहत ईरान अपना उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम किसी अन्य देश में भेजने को तैयार हो सकता है। तस्नीम ने इस दावे को गलत बताते हुए खारिज कर दिया।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने क्या कहा?
काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघाद्र ने सोमवार को कहा कि ईरान अमेरिका और इजरायल के दबाव के आगे पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने देश में एकता और मजबूत सहयोग की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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