ईरान के रहते मध्य पूर्व में स्थायी शांति असंभव, भारत-इजरायल FTA जल्द होगा अंतिम: फ्लेउर हसन-नहूम
सारांश
मुख्य बातें
इजरायली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत और यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लेउर हसन-नहूम ने 27 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में दिए एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि जब तक ईरान में मौजूदा शासन कायम है, तब तक मध्य पूर्व में किसी भी दीर्घकालिक शांति की उम्मीद करना व्यर्थ है। उन्होंने अब्राहम अकॉर्ड्स के विस्तार का समर्थन करते हुए भारत-इजरायल मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र संपन्न होने का भरोसा जताया।
ईरान पर कड़ा रुख
हसन-नहूम ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की मंशा कभी भी शांति स्थापित करना नहीं रही। उनके अनुसार, ईरान ने पिछले 47 वर्षों से अपने ही नागरिकों का दमन किया है और पूरे क्षेत्र में अपने सहयोगी समूहों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और समर्थन देकर अस्थिरता फैलाई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान एक वैश्विक आतंकी नेटवर्क को वित्तपोषित करता है।
उन्होंने एक ठोस उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर के कुछ ही दिनों बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले शुरू कर दिए, जिसके जवाब में अमेरिका को भी कार्रवाई करनी पड़ी। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि ईरान के साथ कोई भी शांति समझौता टिकाऊ नहीं हो सकता।
क्षेत्रीय विभाजन और इजरायल की भूमिका
हसन-नहूम ने मध्य पूर्व को दो स्पष्ट खेमों में विभाजित बताया — एक तरफ इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और मोरक्को जैसे देश हैं जो शांति और समृद्धि की राह पर हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान और कतर जैसे देश हैं जो उनके अनुसार जिहादी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इस विनाशकारी शासन का अंत नहीं होता, इजरायल को इस संघर्ष में सक्रिय रहना पड़ेगा।
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की संभावना पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और विशेष रूप से भारत पर गंभीर असर पड़ेगा। हालांकि, उनका मानना है कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अल्पकालिक कठिनाइयाँ स्वीकार्य हो सकती हैं।
अब्राहम अकॉर्ड्स और कूटनीतिक रास्ता
हसन-नहूम ने अब्राहम अकॉर्ड्स को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सऊदी अरब और ओमान जैसे देश भी इस समझौते में शामिल होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ता में उनका कोई विश्वास नहीं है, क्योंकि ऐसे किसी समझौते का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं जिसे ईरान निभाने का इरादा ही न रखता हो।
भारत-इजरायल FTA और रणनीतिक साझेदारी
भारत-इजरायल संबंधों पर हसन-नहूम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मार्च 2026 में इजरायल यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। उन्होंने बताया कि भारत-इजरायल FTA पर दो दौर की बातचीत पहले ही पूरी हो चुकी है और उन्हें पूरा विश्वास है कि यह समझौता शीघ्र ही अंतिम रूप लेगा।
उन्होंने IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) और I2U2 — जिसमें भारत, इजरायल, अमेरिका और UAE शामिल हैं — को भारत के लिए बेहद लाभकारी बताया। उनके अनुसार, इन पहलों के ज़रिए भारत को अपने सामान और सेवाएँ सीधे यूरोप तक पहुँचाने का मार्ग मिलेगा, जो इस FTA को और भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
आगे की राह
हसन-नहूम का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बेहतर तालमेल और आपसी समझ ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई दी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के उद्यमी और व्यापारिक समुदाय इस साझेदारी को आगे ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं — सरकारों की भूमिका केवल अनुकूल माहौल बनाने की है।