27 जुलाई 2026
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ईरान के रहते मध्य पूर्व में स्थायी शांति असंभव, भारत-इजरायल FTA जल्द होगा अंतिम: फ्लेउर हसन-नहूम

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ईरान के रहते मध्य पूर्व में स्थायी शांति असंभव, भारत-इजरायल FTA जल्द होगा अंतिम: फ्लेउर हसन-नहूम

सारांश

इजरायली विशेष दूत फ्लेउर हसन-नहूम का साफ संदेश — ईरान का शासन जब तक है, मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद बेमानी है। साथ ही, भारत-इजरायल FTA को लेकर उन्होंने उत्साह जताया और IMEC व I2U2 को भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया।

मुख्य बातें

इजरायली विशेष दूत फ्लेउर हसन-नहूम ने 27 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि ईरान मध्य पूर्व की स्थायी शांति के लिए सबसे बड़ी रुकावट है।
उनके अनुसार, ईरान ने पिछले 47 वर्षों से अपने नागरिकों का दमन किया और क्षेत्र में आतंकी नेटवर्क को वित्तपोषित किया।
भारत-इजरायल FTA पर दो दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है; हसन-नहूम ने शीघ्र हस्ताक्षर का भरोसा जताया।
PM मोदी की मार्च 2026 की इजरायल यात्रा के दौरान कई MOU पर हस्ताक्षर हुए; भारत को कूटनीतिक और व्यापारिक दोनों क्षेत्रों में अहम साझेदार बताया।
IMEC और I2U2 को भारत के लिए यूरोप तक सीधी व्यापारिक पहुँच का माध्यम बताया गया।
हसन-नहूम ने सऊदी अरब और ओमान के अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की उम्मीद जताई।

इजरायली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत और यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लेउर हसन-नहूम ने 27 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में दिए एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि जब तक ईरान में मौजूदा शासन कायम है, तब तक मध्य पूर्व में किसी भी दीर्घकालिक शांति की उम्मीद करना व्यर्थ है। उन्होंने अब्राहम अकॉर्ड्स के विस्तार का समर्थन करते हुए भारत-इजरायल मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र संपन्न होने का भरोसा जताया।

ईरान पर कड़ा रुख

हसन-नहूम ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की मंशा कभी भी शांति स्थापित करना नहीं रही। उनके अनुसार, ईरान ने पिछले 47 वर्षों से अपने ही नागरिकों का दमन किया है और पूरे क्षेत्र में अपने सहयोगी समूहों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और समर्थन देकर अस्थिरता फैलाई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान एक वैश्विक आतंकी नेटवर्क को वित्तपोषित करता है।

उन्होंने एक ठोस उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर के कुछ ही दिनों बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले शुरू कर दिए, जिसके जवाब में अमेरिका को भी कार्रवाई करनी पड़ी। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि ईरान के साथ कोई भी शांति समझौता टिकाऊ नहीं हो सकता।

क्षेत्रीय विभाजन और इजरायल की भूमिका

हसन-नहूम ने मध्य पूर्व को दो स्पष्ट खेमों में विभाजित बताया — एक तरफ इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और मोरक्को जैसे देश हैं जो शांति और समृद्धि की राह पर हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान और कतर जैसे देश हैं जो उनके अनुसार जिहादी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इस विनाशकारी शासन का अंत नहीं होता, इजरायल को इस संघर्ष में सक्रिय रहना पड़ेगा।

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की संभावना पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और विशेष रूप से भारत पर गंभीर असर पड़ेगा। हालांकि, उनका मानना है कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अल्पकालिक कठिनाइयाँ स्वीकार्य हो सकती हैं।

अब्राहम अकॉर्ड्स और कूटनीतिक रास्ता

हसन-नहूम ने अब्राहम अकॉर्ड्स को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सऊदी अरब और ओमान जैसे देश भी इस समझौते में शामिल होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ता में उनका कोई विश्वास नहीं है, क्योंकि ऐसे किसी समझौते का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं जिसे ईरान निभाने का इरादा ही न रखता हो।

भारत-इजरायल FTA और रणनीतिक साझेदारी

भारत-इजरायल संबंधों पर हसन-नहूम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मार्च 2026 में इजरायल यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। उन्होंने बताया कि भारत-इजरायल FTA पर दो दौर की बातचीत पहले ही पूरी हो चुकी है और उन्हें पूरा विश्वास है कि यह समझौता शीघ्र ही अंतिम रूप लेगा।

उन्होंने IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) और I2U2 — जिसमें भारत, इजरायल, अमेरिका और UAE शामिल हैं — को भारत के लिए बेहद लाभकारी बताया। उनके अनुसार, इन पहलों के ज़रिए भारत को अपने सामान और सेवाएँ सीधे यूरोप तक पहुँचाने का मार्ग मिलेगा, जो इस FTA को और भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

आगे की राह

हसन-नहूम का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बेहतर तालमेल और आपसी समझ ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई दी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के उद्यमी और व्यापारिक समुदाय इस साझेदारी को आगे ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं — सरकारों की भूमिका केवल अनुकूल माहौल बनाने की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दो दौर की बातचीत के बाद भी 'जल्द' की कोई ठोस समयसीमा नहीं दी गई — यह उन व्यापार वार्ताओं की याद दिलाता है जो वर्षों तक 'अंतिम चरण' में रहती हैं। IMEC का भविष्य सीधे तौर पर मध्य पूर्व की स्थिरता से जुड़ा है, और जब तक ईरान-इजरायल तनाव बना रहेगा, यह गलियारा कागज़ पर ही रहने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्लेउर हसन-नहूम कौन हैं और उनका बयान क्यों अहम है?
फ्लेउर हसन-नहूम इजरायली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत और यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर हैं। वे I2U2 जैसी प्रमुख कूटनीतिक पहलों से सीधे जुड़ी रही हैं, इसलिए भारत-इजरायल संबंधों पर उनका दृष्टिकोण नीतिगत स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत-इजरायल FTA की मौजूदा स्थिति क्या है?
दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर दो दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है। हसन-नहूम ने भरोसा जताया कि यह समझौता जल्द ही अंतिम रूप लेगा, हालांकि कोई निश्चित तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है।
ईरान को मध्य पूर्व शांति में बाधा क्यों बताया जा रहा है?
हसन-नहूम के अनुसार, ईरान पिछले 47 वर्षों से अपने नागरिकों का दमन करता आया है और क्षेत्र में सहयोगी समूहों को वित्तीय सहायता व प्रशिक्षण देकर अस्थिरता फैलाता रहा है। उन्होंने MOU पर हस्ताक्षर के बाद होर्मुज स्ट्रेट में हमलों का उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान के साथ कोई भी समझौता टिकाऊ नहीं होगा।
IMEC और I2U2 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) भारत को मध्य पूर्व और इजरायल के रास्ते यूरोप से सीधे जोड़ने का मार्ग देता है। I2U2 — जिसमें भारत, इजरायल, अमेरिका और UAE शामिल हैं — एक बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग ढाँचा है। दोनों मिलकर भारत की वैश्विक व्यापारिक पहुँच को विस्तार दे सकते हैं।
अब्राहम अकॉर्ड्स में आगे कौन से देश शामिल हो सकते हैं?
हसन-नहूम ने उम्मीद जताई कि सऊदी अरब और ओमान जैसे देश भविष्य में अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल हो सकते हैं। इस समझौते के तहत पहले से ही UAE, बहरीन और मोरक्को ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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