शहबाज शरीफ का दावा: अमेरिका-ईरान शांति समझौता 24 घंटे में हो सकता है अंतिम, ई-साइनिंग तैयार
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 13 जून 2026 को दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौता अगले 24 घंटों में अंतिम रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान इस समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर (ई-साइनिंग) की तैयारी कर चुका है, जिसके बाद तकनीकी स्तर की वार्ताएँ आगे बढ़ेंगी।
शरीफ का संदेश: 'शांति के पहले से अधिक करीब'
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में शहबाज शरीफ ने लिखा, 'हम पहले से कहीं अधिक शांति समझौते के करीब हैं।' उन्होंने वार्ता प्रक्रिया में सहयोग के लिए अमेरिका और ईरान दोनों का आभार जताते हुए कहा, 'हम अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की वार्ता के दौरान जारी प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं। साथ ही क्षेत्र के अपने भाई देशों के समर्थन के लिए भी उनका धन्यवाद करते हैं।' शरीफ ने विश्वास जताया कि यह 'ऐतिहासिक शांति समझौता' क्षेत्र में स्थायी शांति की मज़बूत नींव साबित होगा।
हालाँकि, समझौते के अंतिम मसौदे, उसकी शर्तों और औपचारिक घोषणा को लेकर अभी तक संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में समझौते के आधिकारिक रूप से लागू होने तक स्थिति पर नज़र बनी हुई है।
ईरान के विदेश मंत्री ने बताए समझौते के 14 बिंदु
इसी दिन ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के विचार तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने प्रकाशित किए, जिनमें उन्होंने दो चरणों में समझौते की ओर इशारा किया। अराघची के अनुसार प्रस्तावित समझौते के मसौदे में 14 बिंदु हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं — होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना, जारी संघर्ष को समाप्त करना और अमेरिका व ईरान द्वारा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने का वादा।
अराघची ने स्पष्ट किया कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत दूसरे चरण में होगी, जो 60 दिनों तक चलेगी। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि समझौते में ईरान की जब्त और फ्रीज़ की गई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से मुक्त करने का प्रावधान शामिल है, हालाँकि इसकी अंतिम शर्तों पर अभी बातचीत जारी है।
होर्मुज स्ट्रेट पर नई व्यवस्था का संकेत
विदेश मंत्री अराघची ने कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट का संचालन अब युद्ध से पहले जैसा नहीं रहेगा। इस अहम जलमार्ग पर ईरान और ओमान का अधिकार है और ईरान यहाँ से गुज़रने वाले जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा।' उन्होंने संकेत दिया कि इस महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुज़रने वाले जहाज़ों के लिए नई प्रशासनिक और सेवा-संबंधी व्यवस्थाएँ लागू की जाएंगी तथा सेवाओं के लिए शुल्क भी वसूला जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट से विश्व के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है और इस जलमार्ग की स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है।
समझौते की स्थिति और आगे की राह
गौरतलब है कि अभी तक न अमेरिका और न ही ईरान ने इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि की है। शहबाज शरीफ का यह दावा पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को रेखांकित करता है, लेकिन अंतिम स्वरूप और क्रियान्वयन की समयसीमा अभी अनिश्चित बनी हुई है। दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी कूटनीतिक शत्रुता को देखते हुए, विशेषज्ञ किसी भी समझौते के दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन सावधानी से करने की सलाह दे रहे हैं।