3 अगस्त 2026
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इस्लामाबाद एमओयू पर शहबाज शरीफ ने मध्यस्थ के रूप में हस्ताक्षर किए, ट्रंप-पेजेश्कियान की डील को बताया ऐतिहासिक

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इस्लामाबाद एमओयू पर शहबाज शरीफ ने मध्यस्थ के रूप में हस्ताक्षर किए, ट्रंप-पेजेश्कियान की डील को बताया ऐतिहासिक

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच 'इस्लामाबाद एमओयू' पर ट्रंप और पेजेश्कियान के डिजिटल हस्ताक्षर के बाद शहबाज शरीफ ने मध्यस्थ के रूप में दस्तखत किए। होर्मुज स्ट्रेट खुलने और नौसेना नाकाबंदी हटने की बात है, लेकिन विशेषज्ञ डील की स्थायित्व और पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।

मुख्य बातें

शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद एमओयू पर मध्यस्थ के रूप में हस्ताक्षर किए; अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल हस्ताक्षर किए।
समझौते के तहत ईरान तुरंत होर्मुज स्ट्रेट खोलेगा और अमेरिका नौसेना की नाकाबंदी हटाएगा।
शरीफ ने ईरानी वार्ता दल — मोहम्मद बाघेर गालिबाफ , अब्बास अराघची और एस्कंदर मोमेनी — की सराहना की।
विशेषज्ञ डील की दीर्घकालिक व्यवहार्यता और पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।
पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी नीतियों के कारण इस शांति समझौते में उसकी भूमिका आलोचनाओं के घेरे में है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 19 जून 2025 को अमेरिका-ईरान के बीच हुए इस्लामाबाद ज्ञापन समझौते (एमओयू) पर मध्यस्थ के रूप में हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल हस्ताक्षर किए। हालाँकि, विशेषज्ञ इस डील की स्थायित्व पर सवाल उठा रहे हैं और पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी नीतियों के मद्देनज़र इस मध्यस्थ भूमिका को लेकर भी आलोचनाएँ सामने आ रही हैं।

समझौते की मुख्य शर्तें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि शहबाज शरीफ ने मध्यस्थ के तौर पर इस्लामाबाद एमओयू पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत ईरान तुरंत प्रभाव से होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलेगा, जबकि अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी हटाएगा। शरीफ ने इसे 'तुरंत लागू होने वाला समझौता' बताया।

शहबाज शरीफ की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक इस्लामाबाद समझौते पर गुरुवार को हस्ताक्षर हो गए हैं। इस एमओयू पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने हस्ताक्षर किया और मध्यस्थ के तौर पर मैंने भी इसे मंजूरी दी है। इस समझौते पर हस्ताक्षर होना संघर्ष के कूटनीतिक समाधान के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को दिखाता है।'

शरीफ ने राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कूटनीतिक प्रतिबद्धता और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देने ने एक ऐसे संघर्ष को टालने में मदद की, जिसके नतीजे क्षेत्र और उससे आगे भी खतरनाक हो सकते थे।

ईरानी वार्ताकारों को श्रेय

प्रधानमंत्री शरीफ ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा होसैनी खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की भी प्रशंसा की। उन्होंने ईरानी वार्ता दल — मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, अब्बास अराघची और एस्कंदर मोमेनी — के धैर्य, लगन और प्रतिबद्धता को समझौते की सफलता का श्रेय दिया।

विशेषज्ञों की आशंकाएँ

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हाल के महीनों में तनाव की पृष्ठभूमि को देखते हुए इस डील की दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर सवाल बने हुए हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी नीतियों को लेकर उसकी अंतरराष्ट्रीय साख पहले से विवादित रही है, जिससे उसकी मध्यस्थ भूमिका की विश्वसनीयता पर भी आलोचक सवाल उठा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और होर्मुज स्ट्रेट की बंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही थी।

आगे की राह

समझौते को तुरंत प्रभाव से लागू किए जाने की बात कही गई है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की निगरानी के लिए किसी स्वतंत्र तंत्र का उल्लेख अभी तक सामने नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब होर्मुज स्ट्रेट के पुनः खुलने और अमेरिकी नौसेना की वापसी की प्रक्रिया पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस देश की ओर से आया है जिसे FATF की निगरानी और आतंकवाद के वित्तपोषण के आरोपों का सामना करना पड़ा है। जो देश खुद अपनी सीमाओं के भीतर शांति सुनिश्चित नहीं कर पाया, वह दो परमाणु-संपन्न शक्तियों के बीच स्थायी मध्यस्थ की भूमिका कितनी विश्वसनीयता से निभा सकता है — यह एक गंभीर प्रश्न है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक जलमार्ग से जुड़े इस समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी का ढाँचा अभी तक अस्पष्ट है, जो इसकी असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस्लामाबाद एमओयू क्या है और इस पर किसने हस्ताक्षर किए?
इस्लामाबाद एमओयू अमेरिका और ईरान के बीच हुआ एक ज्ञापन समझौता है, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मध्यस्थ के रूप में इस पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्या तय हुआ है?
समझौते के अनुसार ईरान तुरंत प्रभाव से होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलेगा और अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी हटाएगा। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम माना जा रहा है।
पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी विवादित साख के कारण उसकी मध्यस्थ भूमिका की विश्वसनीयता संदिग्ध है। विशेषज्ञ यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या पाकिस्तान इतने संवेदनशील भू-राजनीतिक मामले में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
शहबाज शरीफ ने ईरानी वार्ता दल में किन लोगों की सराहना की?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी वार्ता दल के सदस्यों — मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, अब्बास अराघची और एस्कंदर मोमेनी — के धैर्य और प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई और राष्ट्रपति पेजेश्कियान की भी सराहना की।
इस डील के भविष्य को लेकर विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हाल के महीनों में गहरे तनाव की पृष्ठभूमि को देखते हुए इस समझौते की दीर्घकालिक स्थिरता अनिश्चित है। समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए किसी स्वतंत्र तंत्र का उल्लेख न होना भी चिंता का विषय बताया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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