शहबाज शरीफ ने US-ईरान डील पर जिनेवा समारोह वाली पोस्ट लिखी, फिर चुपचाप हटाई
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 18 जून 2025 को अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते पर एक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि 19 जून को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह होगा — लेकिन कुछ ही घंटों बाद वह पोस्ट संपादित कर दी गई और उसमें से जिनेवा समारोह का उल्लेख हटा दिया गया। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब फ्रांस के वर्साय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने — ट्रंप ने भौतिक रूप से और पेजेश्कियन ने डिजिटल हस्ताक्षर के ज़रिए — एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तखत किए।
क्या लिखा था शरीफ ने और क्या हटाया
समझौते की खबर मिलते ही शरीफ ने एक विस्तृत पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा कि अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों ने एक 'ऐतिहासिक एमओयू' पर हस्ताक्षर किए हैं और शुक्रवार, 19 जून को जिनेवा में एक हस्ताक्षर समारोह आयोजित होने वाला है। यहाँ तक कि पाकिस्तान की संसद में भी उन्होंने इस समारोह की घोषणा की थी। कुछ समय बाद उसी पोस्ट को अपडेट किया गया और 19 जून की तारीख तथा भौतिक हस्ताक्षर समारोह का पूरा उल्लेख हटा दिया गया।
ईरान ने क्या स्पष्ट किया
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज़ पर पहले ही डिजिटल रूप से हस्ताक्षर हो चुके हैं, इसलिए जिनेवा में कोई औपचारिक भौतिक समारोह नहीं होगा। हालाँकि, उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों की वार्ता टीमें आगे की बातचीत के लिए शुक्रवार को जिनेवा में ज़रूर मिलेंगी।
पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका और उसकी सीमाएँ
इस शांति वार्ता में पाकिस्तान ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस्लामाबाद वार्ता के ज़रिए दोनों पक्षों को करीब लाने की कोशिश की गई, हालाँकि इसमें कतर, मिस्र और तुर्की भी शामिल थे। इस्लामाबाद वार्ता में बात नहीं बन पाई, लेकिन 14 जून से पहले ही संकेत मिलने लगे थे कि दोनों देश समझौते के करीब हैं। 14 जून को शरीफ ने पहले डील की जानकारी साझा की, जिसके बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इसकी घोषणा की।
आगे क्या
पोस्ट में हुई इस 'भूल सुधार' ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पाकिस्तान को इस डील की आंतरिक जानकारी किस हद तक थी। विश्लेषकों के अनुसार, मध्यस्थता का श्रेय लेने की जल्दबाज़ी में इस्लामाबाद ने ऐसे तथ्य साझा किए जो बाद में ईरान की आधिकारिक स्थिति से मेल नहीं खाए। दोनों देशों की वार्ता टीमों की जिनेवा बैठक के बाद आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।