अमेरिका-ईरान 'इस्लामाबाद एमओयू' पर हस्ताक्षर, पाक PM शहबाज बोले — होर्मुज स्ट्रेट तुरंत खुलेगा
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 18 जून 2025 को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच महीनों के तनाव के बाद ऐतिहासिक 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू)' पर गुरुवार को हस्ताक्षर हो गए हैं। इस समझौते के तहत ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल प्रभाव से खोलने और अमेरिका द्वारा नौसेना की नाकाबंदी हटाने की बात कही गई है। पाकिस्तान ने इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
समझौते का विवरण
प्रधानमंत्री शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक 'इस्लामाबाद समझौता' पर आज (गुरुवार को) हस्ताक्षर हो गए हैं। इस एमओयू पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने साइन किए और मध्यस्थ के तौर पर मैंने भी इसे मंजूरी दी है। इस समझौते पर हस्ताक्षर होना संघर्ष के कूटनीतिक समाधान के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को दिखाता है।' शरीफ के अनुसार, समझौते को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा — ईरान होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलेगा और अमेरिका नौसेना की नाकाबंदी हटाएगा।
अमेरिकी और ईरानी नेतृत्व को बधाई
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी कूटनीति के प्रति प्रतिबद्धता और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देने ने एक बार फिर उस संघर्ष को समाप्त करने में मदद की, जिसके परिणाम इस क्षेत्र और उससे आगे भी गंभीर हो सकते थे। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैय्यद मोजतबा होसैनी खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की भी सराहना की।
ईरानी वार्ताकार टीम को श्रेय
शरीफ ने ईरान की वार्ता टीम का विशेष उल्लेख किया, जिसमें मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, अब्बास अराघची और एस्कंदर मोमेनी शामिल थे। उन्होंने कहा कि इन नेताओं के धैर्य, लगन और प्रतिबद्धता ने इस समझौते को संभव बनाया।
क्षेत्रीय देशों और फील्ड मार्शल मुनीर की भूमिका
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने समझौते को सफल बनाने में कतर, सऊदी अरब, तुर्किए और मिस्र की सरकारों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर का विशेष उल्लेख करते हुए लिखा कि उनकी अनथक कोशिश, निस्वार्थ समर्पण और अहम भूमिका इस कामयाबी को आसान बनाने और क्षेत्र में शांति व स्थिरता को आगे बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण रही। शरीफ ने उम्मीद जताई कि यह एमओयू पूरे क्षेत्र के लिए बेहतर समझ, आपसी सम्मान और साझा खुशहाली की नींव बनेगा।