ईरान पर आर्थिक युद्ध नाकाम: राष्ट्रपति पेजेश्कियन का दावा, ट्रंप बोले — संघर्ष 'बहुत जल्द' होगा खत्म
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 4 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि देश पर थोपे गए 'आर्थिक युद्ध' में दुश्मन अपने मकसद में नाकाम रहा है, और सरकार ने मौजूदा 'खास हालात' से निपटने के लिए एक नई व्यवस्था अपनाई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान पर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और क्षेत्रीय तनाव भी जारी है।
पेजेश्कियन का बयान: 'दुश्मन को मकसद पूरा नहीं करने दिया'
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट में लिखा, 'सरकार ने इन खास हालात से निपटने के लिए एक नई व्यवस्था अपनाई है।' उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में दुश्मन की रणनीति ईरान की ज़रूरी व्यवस्थाओं को बाधित कर आम जनता पर दबाव बनाने की रही है।
उन्होंने लिखा, 'आर्थिक दबाव बढ़ा है, लेकिन ईश्वर की कृपा, लोगों के सहयोग और सरकार में हमारे साथियों की ओर से उठाए गए कदमों के चलते हमने आर्थिक युद्ध में दुश्मन के मकसद को पूरा नहीं होने दिया।' गौरतलब है कि पेजेश्कियन ने किसी एक देश या संगठन का नाम 'दुश्मन' के रूप में नहीं लिया, लेकिन यह बयान पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिकी नीति के संदर्भ में आया है।
ट्रंप का दावा: ईरान 'टूट चुका', युद्ध जल्द खत्म होगा
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास के डेंटन में पीटरबिल्ट मोटर्स की एक फैक्ट्री के दौरे के दौरान पत्रकारों से कहा कि ईरान के साथ मामला 'बहुत जल्द किसी न किसी तरह खत्म होने वाला है।' ट्रंप ने दावा किया, 'वहां महंगाई 301 प्रतिशत है। उनके पास पैसा नहीं है, उनकी करेंसी की हालत खराब है। उनकी सेना हार चुकी है, उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है, उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है।'
ट्रंप ने यह भी कहा कि संघर्ष समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में तेज़ी से गिरावट आएगी। उन्होंने ईरान के सामने यह विकल्प रखा कि वह खुद तय करे कि यह संघर्ष किस तरह खत्म हो।
दो विपरीत आख्यान: तेहरान और वाशिंगटन के बयानों का विरोधाभास
यह ऐसे समय में आया है जब तेहरान और वाशिंगटन एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत आख्यान पेश कर रहे हैं। एक ओर पेजेश्कियन दावा कर रहे हैं कि ईरान ने आर्थिक दबाव झेलते हुए भी मोर्चा सँभाले रखा है, तो दूसरी ओर ट्रंप ईरान को आर्थिक और सैन्य रूप से पूरी तरह कमज़ोर बता रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों के दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना अभी संभव नहीं है।
गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने वर्षों से कई स्तरों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिनका उद्देश्य ईरान के परमाणु और सैन्य कार्यक्रमों पर अंकुश लगाना रहा है। 301 प्रतिशत महंगाई का ट्रंप का दावा असाधारण है और इसके आधार को सरकारी तौर पर सत्यापित नहीं किया जा सका है।
तेल बाज़ार पर असर की चिंता
ट्रंप के इस बयान का सबसे व्यापक असर वैश्विक तेल बाज़ार पर पड़ सकता है। यदि संघर्ष वास्तव में जल्द समाप्त होता है और ईरानी तेल आपूर्ति बाज़ार में आती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट संभव है — जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए राहत की बात होगी।
आगे क्या होगा
फिलहाल दोनों पक्षों के बयान कूटनीतिक संकेतों से अधिक बयानबाज़ी के स्तर पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी ठोस समझौते या युद्धविराम के संकेत तब तक स्पष्ट नहीं होंगे, जब तक दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वार्ता के ठोस संकेत नहीं मिलते। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें इस पर टिकी हैं।