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जाफा की अबुलाफिया बेकरी: युद्ध और तनाव के बीच सांप्रदायिक सौहार्द की 145 साल पुरानी मिसाल

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जाफा की अबुलाफिया बेकरी: युद्ध और तनाव के बीच सांप्रदायिक सौहार्द की 145 साल पुरानी मिसाल

सारांश

युद्ध और तनाव के बीच जाफा की अबुलाफिया बेकरी 145 साल से सांप्रदायिक एकता की मिसाल बनी है — यहूदी, ईसाई, मुस्लिम और भारतीय सभी एक ही काउंटर पर। पर्यटन में गिरावट से कारोबार प्रभावित हुआ, पर लेबनान संघर्षविराम के बाद उम्मीद की किरण दिखी है।

मुख्य बातें

अबुलाफिया बेकरी , जाफा (इजरायल) , सन् 1879 से संचालित है और अब छठी पीढ़ी द्वारा चलाई जा रही है।
बेकरी के सीईओ सैद अबुलाफिया के अनुसार, यहूदी, ईसाई और मुस्लिम — तीनों समुदाय यहाँ समान रूप से आते हैं।
डायमंड एक्सचेंज से जुड़े भारतीय कर्मचारी भी इस बेकरी के नियमित ग्राहकों में शामिल हैं।
बेकरी के कुल ग्राहकों में लगभग 15 प्रतिशत पर्यटक हैं; पिछले तीन वर्षों से पर्यटन में गिरावट से कारोबार प्रभावित।
हाल के लेबनान संघर्षविराम के बाद हालात में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं।

इजरायल के ऐतिहासिक शहर जाफा में स्थित अबुलाफिया बेकरी मध्य-पूर्व के मौजूदा संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के बावजूद सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बनी हुई है। सन् 1879 से संचालित यह बेकरी यहूदी, ईसाई और मुस्लिम — तीनों समुदायों को एक ही छत के नीचे जोड़ती आई है। बेकरी के सीईओ सैद अबुलाफिया के अनुसार, भोजन और संस्कृति आज भी उस पुल की भूमिका निभा रहे हैं जिसे राजनीतिक हालात तोड़ नहीं पाए।

145 साल की विरासत, छठी पीढ़ी का दायित्व

सैद अबुलाफिया इस बेकरी की छठी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने बताया, "1879 से हम इस कारोबार में हैं। हमारी बेकरी में पारंपरिक मध्य-पूर्वी पेस्ट्री और बेकरी उत्पाद तैयार किए जाते हैं।" बेकरी के लोकप्रिय व्यंजनों में तिल वाले बैगल्स, ज़ातर के साथ पीटा ब्रेड, और फेटा चीज़ व आलू से भरे सांबुसक शामिल हैं। यह प्रतिष्ठान आज इजरायल में एक जाना-पहचाना ब्रांड बन चुका है।

गौरतलब है कि अबुलाफिया परिवार मुस्लिम अरब परिवार है, फिर भी उनकी बेकरी की पहचान किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं रही। सैद ने कहा, "हमारे ग्राहकों में सभी धर्मों के लोग शामिल हैं — यहूदी, ईसाई और मुस्लिम समान रूप से यहाँ आते हैं।"

भारतीय समुदाय का भी खास जुड़ाव

इजरायल में कार्यरत भारतीय नागरिक भी इस बेकरी के नियमित ग्राहकों में शामिल हैं। सैद के अनुसार, डायमंड एक्सचेंज से जुड़े भारतीय कर्मचारी विशेष रूप से यहाँ नियमित रूप से आते हैं। यह तथ्य बेकरी की उस सार्वभौमिक अपील को रेखांकित करता है जो भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमाओं को पार करती है।

पर्यटन में गिरावट से कारोबार पर असर

क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा हालात का सीधा असर बेकरी के कारोबार पर भी पड़ा है। सैद अबुलाफिया के अनुसार, उनके कुल ग्राहकों में लगभग 15 प्रतिशत पर्यटक होते हैं। पिछले तीन वर्षों से पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा प्रभाव बेकरी की आय पर पड़ा है।

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में व्यापक संघर्ष के कारण इजरायल का पर्यटन क्षेत्र भारी दबाव में है और कई व्यवसाय अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

संघर्षविराम के बाद उम्मीद की किरण

हालात पूरी तरह निराशाजनक नहीं हैं। सैद ने बताया कि हाल में हुए लेबनान संघर्षविराम के बाद स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। उन्होंने मध्य-पूर्व में स्थायी शांति की उम्मीद जताते हुए कहा कि यह शांति न केवल व्यापार के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए आवश्यक है।

भोजन और संस्कृति: शांति का माध्यम

सैद अबुलाफिया का मानना है कि भोजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान वह सेतु है जो राजनीतिक विभाजन को पाट सकता है। जाफा की यह बेकरी उसी भावना की जीती-जागती मिसाल है — जहाँ हर दिन अलग-अलग धर्मों और पृष्ठभूमियों के लोग एक ही काउंटर पर खड़े होकर एक जैसी रोटी खरीदते हैं। युद्ध और संकट के बीच भी यह खुशबू बरकरार है, और यही इस बेकरी की असली ताकत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राज्य-स्तरीय संघर्षों से ज़्यादा टिकाऊ होती है? 145 साल की निरंतरता बताती है कि हाँ — लेकिन पर्यटन में 15% की गिरावट यह भी दर्शाती है कि ऐसे प्रतीक भी व्यापक संघर्ष की आर्थिक मार से अछूते नहीं रहते। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष की आँच में जल रहे अरब-मुस्लिम व्यवसाय भी शांति के सबसे मुखर पैरोकार हैं — क्योंकि उनकी आजीविका उसी पर टिकी है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अबुलाफिया बेकरी क्या है और यह कहाँ स्थित है?
अबुलाफिया बेकरी इजरायल के ऐतिहासिक शहर जाफा में स्थित एक प्रसिद्ध पारंपरिक बेकरी है, जो सन् 1879 से संचालित है। यह तिल वाले बैगल्स, ज़ातर पीटा ब्रेड और सांबुसक जैसे मध्य-पूर्वी व्यंजनों के लिए जानी जाती है।
अबुलाफिया बेकरी को सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक क्यों माना जाता है?
यह बेकरी एक मुस्लिम अरब परिवार द्वारा संचालित होने के बावजूद यहूदी, ईसाई और मुस्लिम — तीनों समुदायों के ग्राहकों को समान रूप से आकर्षित करती है। सीईओ सैद अबुलाफिया के अनुसार, भोजन और संस्कृति यहाँ धार्मिक विभाजन से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ते हैं।
इजरायल में चल रहे संघर्ष का अबुलाफिया बेकरी पर क्या असर पड़ा है?
क्षेत्रीय तनाव के कारण पर्यटन में गिरावट आई है, जिससे बेकरी का कारोबार प्रभावित हुआ है क्योंकि उनके लगभग 15 प्रतिशत ग्राहक पर्यटक होते हैं। पिछले तीन वर्षों से पर्यटकों की संख्या काफी कम रही है।
लेबनान संघर्षविराम के बाद बेकरी के हालात में क्या बदलाव आया?
सैद अबुलाफिया के अनुसार, हाल के लेबनान संघर्षविराम के बाद हालात में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। उन्हें उम्मीद है कि मध्य-पूर्व में स्थायी शांति लौटने पर पर्यटन और कारोबार दोनों फिर पटरी पर आएँगे।
क्या भारतीय नागरिक भी अबुलाफिया बेकरी जाते हैं?
हाँ, इजरायल में कार्यरत भारतीय नागरिक, विशेष रूप से डायमंड एक्सचेंज से जुड़े कर्मचारी, इस बेकरी के नियमित ग्राहकों में शामिल हैं। यह बेकरी की उस व्यापक अपील को दर्शाता है जो विभिन्न राष्ट्रीयताओं और पृष्ठभूमियों के लोगों को आकर्षित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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