जमात-ए-इस्लामी की सीमा पर विरोध प्रदर्शन की योजना, भारत ने हाई अलर्ट जारी किया
सारांश
मुख्य बातें
भारत की खुफिया एजेंसियों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर हाई अलर्ट जारी किया है, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी संगठन अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजे जाने के विरोध में शुक्रवार, 13 जून से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, 15 जून को एक बड़ी रैली और जुलूस की भी योजना है।
प्रदर्शन की योजना और दायरा
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन की रणनीति खास तौर पर उन सीमावर्ती जिलों को केंद्र में रखकर बनाई गई है जहाँ जमात-ए-इस्लामी का राजनीतिक प्रभाव सबसे अधिक है। हाल के चुनावों में पार्टी ने भारत की सीधी सीमा से लगे जिलों में अपनी 68 में से 51 सीटें जीती थीं। भारतीय एजेंसियों ने इन चुनावी परिणामों पर पहले भी चिंता जताई थी और सीमा पर अतिरिक्त चौकसी की सिफारिश की थी।
स्टूडेंट-नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने कथित तौर पर हुई घुसपैठ के खिलाफ 'मानवीय ढाल' बनाने की माँग की है, जिससे सुरक्षा चिंताएँ और बढ़ गई हैं।
भारत सरकार का पक्ष
एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत की ओर से सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'यह जानकारी और कहानी जो बनाई जा रही है, वह पूरी तरह से झूठी है। इसका मकसद लोगों को भारतीय सरकार के खिलाफ भड़काना और गलत जानकारी फैलाकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भी निशाना बनाना है।'
भारत ने बांग्लादेश से राष्ट्रीयता सत्यापन प्रक्रिया में तेजी लाने की अपील की है ताकि निर्वासन की प्रक्रिया द्विपक्षीय समझौतों के तहत सुचारू रूप से आगे बढ़ सके। अधिकारियों ने दोहराया कि किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं की जा रही और सभी कदम कानूनी ढाँचे के भीतर उठाए जा रहे हैं।
जमात के आरोप और भारत का खंडन
जमात-ए-इस्लामी ने BSF पर सीमा क्षेत्रों में बांग्लादेशी नागरिकों की हत्या करने का आरोप लगाया है और यह कहानी गढ़ने की कोशिश की है कि भारतीय सुरक्षा बलों ने लोगों को जबरदस्ती सीमा पार कराया। भारत ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। खुफिया विभाग के अनुसार, बांग्लादेश में 11 पार्टियों के गठबंधन के दो मुख्य उद्देश्य हैं — भ्रामक सूचना अभियान चलाना और भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा करना।
गठबंधन ने तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार पर भी इस मुद्दे पर नरम रवैया अपनाने और भारत के साथ मिली होने का आरोप लगाया है।
भारत-बांग्लादेश संबंध और रणनीतिक पृष्ठभूमि
इस साल की शुरुआत में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में सुधार आया है और दोनों देश कई मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं। बांग्लादेश ने संकेत दिया है कि वह अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहता है और भारत की रणनीतिक अहमियत को समझता है।
भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद जमात ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के साथ मिलकर भारत में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई थी। अधिकारियों का आरोप है कि इसका उद्देश्य जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करना, सांप्रदायिक तनाव बढ़ाना, अपराध नेटवर्क को मजबूत करना और स्थानीय रोजगार पर आर्थिक दबाव पैदा करना था।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
हाल ही में पश्चिम बंगाल और असम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजने पर फिर से जोर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अवैध प्रवासन से जनसांख्यिकीय बदलाव, आतंकी संगठनों द्वारा भर्ती, स्थानीय रोजगार पर असर, जाली मुद्रा नेटवर्क और मवेशी तस्करी जैसी समस्याएँ कथित तौर पर बढ़ी हैं।
एक अधिकारी ने चेतावनी दी, 'हिंसा भड़काने की कोशिशें होंगी, जो भारत में भी फैल सकती हैं।' हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पूरी तरह सतर्क है और ऐसी किसी भी कोशिश को नाकाम किया जाएगा।