भारत-नेपाल व्यापार में बड़ा स्कोप: नेपाली सांसद संदीप राणा बोले — खुली सीमा और साझा संस्कृति बनेगी ताकत
सारांश
मुख्य बातें
नेपाली सांसद संदीप राणा ने 27 जुलाई को मुंबई में कहा कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय व्यापार की असीमित संभावनाएँ हैं, और साझा संस्कृति, खुली सीमा तथा हिमालयी प्राकृतिक संसाधन इस व्यापारिक रिश्ते को नई ऊँचाई दे सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार असंतुलित है — नेपाल भारत से बड़े पैमाने पर सामान आयात करता है, जबकि निर्यात की संभावनाएँ अभी पूरी तरह नहीं भुनाई गई हैं।
मौजूदा व्यापार का स्वरूप
राणा ने बताया कि नेपाल, भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और हर क्षेत्र से जुड़ी वस्तुएँ भारत से मँगाई जाती हैं। इसके विपरीत, नेपाल से भारत में आने वाली वस्तुएँ अपेक्षाकृत सीमित हैं — मुख्यतः चाय, कुछ स्टील उत्पाद और तेल जैसी चीजें। उनके अनुसार यह असंतुलन व्यापार विस्तार की सबसे बड़ी संभावना भी है।
हिमालयी जैविक उत्पाद — नेपाल की खास पहचान
सांसद राणा ने जोर देकर कहा कि नेपाल में उत्पादित वस्तुएँ हिमालय की गोद में उगती हैं — पूरी तरह ताज़ी, जैविक (ऑर्गेनिक) और स्वच्छ पर्वतीय जल से सिंचित। उनके अनुसार, भारत में 140 करोड़ की विशाल उपभोक्ता आबादी के सामने नेपाल के 3 करोड़ लोगों के देश से आने वाले ये उत्पाद आसानी से बाज़ार पा सकते हैं, क्योंकि दोनों देशों का खान-पान और जीवनशैली काफी हद तक एक जैसी है।
खुली सीमा — व्यापार का सबसे बड़ा लाभ
राणा ने रेखांकित किया कि भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा (ओपन बॉर्डर) एक अनूठी सुविधा है, जो दोनों देशों के नागरिकों को बिना किसी बाधा के आने-जाने की छूट देती है। इस सुविधा के चलते दैनिक उपभोग की वस्तुओं का अनौपचारिक और औपचारिक दोनों स्तरों पर आदान-प्रदान पहले से होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस ढाँचे का उपयोग करते हुए संगठित व्यापार को और विस्तार दिया जा सकता है।
दोनों सरकारों का सहयोगात्मक रुख
सांसद राणा ने नेपाल की आंतरिक स्थिति पर भी संतोष जताया। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार वर्तमान में अच्छे ढंग से कार्य कर रही है और दोनों देशों के बीच मित्रता के चलते दोनों सरकारें नागरिकों के हित को प्राथमिकता देते हुए मिलकर काम कर रही हैं। यह सहयोगात्मक माहौल व्यापारिक संभावनाओं को और अनुकूल बनाता है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-नेपाल व्यापार को औपचारिक और संस्थागत ढाँचे में लाने की जरूरत है, ताकि हिमालयी जैविक उत्पाद, जलविद्युत और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में दोनों देश एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठा सकें। राणा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कई पहल चल रही हैं।