मेलोनी का ट्रंप पर तीखा पलटवार: 'मैं और इटली किसी के आगे नहीं झुकते'
सारांश
मुख्य बातें
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें ट्रंप ने दावा किया था कि मेलोनी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए 'गिड़गिड़ाकर मिन्नत' की। मेलोनी ने 19 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मैं और इटली कभी किसी के आगे नहीं गिड़गिड़ाते।' इस विवाद ने अमेरिका और इटली के द्विपक्षीय संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रंप का विवादित बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक टीवी कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि हाल ही में संपन्न 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान इटली की प्रधानमंत्री ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए 'गिड़गिड़ाकर अनुरोध किया।' ट्रंप के इस बयान ने तत्काल राजनयिक विवाद को जन्म दिया और यूरोपीय राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
मेलोनी की कड़ी प्रतिक्रिया
मेलोनी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में ट्रंप के बयान को 'पूरी तरह काल्पनिक' करार दिया। उन्होंने कहा, 'हमें समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं, खासकर अपने सहयोगी देशों के साथ। हम चाहेंगे कि वे पश्चिमी देशों के दुश्मनों के प्रति भी उतनी ही सख्ती दिखाएं।'
मेलोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि 'राजनीतिक विचार चाहे जो भी हों, अमेरिका के राष्ट्रपति को किसी करीबी यूरोपीय सहयोगी देश के लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता का सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ाने या उनका अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है।'
जी-7 सम्मेलन में ट्रंप का अंदाज
फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के वर्किंग सेशन में ट्रंप देरी से पहुँचे। कॉन्फ्रेंस रूम में प्रवेश करते ही उन्होंने कहा, 'आई एम द बॉस।' उनके इस अंदाज पर सभी नेता हँसने लगे और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मुस्कुराते हुए उनका स्वागत किया। इसी सम्मेलन में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा की थी।
संबंधों पर असर और आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, मेलोनी और ट्रंप को दक्षिणपंथी राजनीतिक विचारधारा के करीबी सहयोगी माना जाता रहा है। ऐसे में यह सार्वजनिक विवाद असामान्य और राजनयिक दृष्टि से संवेदनशील है। आलोचकों का कहना है कि यह घटना नाटो और पश्चिमी गठबंधन के भीतर बढ़ती दरारों का संकेत हो सकती है। आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद की दिशा पर नज़र रहेगी।