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PM मोदी ने जनेज जान्शा को स्लोवेनिया का चौथी बार PM बनने पर दी बधाई, द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने का संकल्प

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PM मोदी ने जनेज जान्शा को स्लोवेनिया का चौथी बार PM बनने पर दी बधाई, द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने का संकल्प

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने जनेज जान्शा को स्लोवेनिया का चौथी बार प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और व्यापार व निवेश में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। स्लोवेनिया की 90 सदस्यीय संसद में 51 मतों से चुने गए जान्शा यूरोप में उभरते दक्षिणपंथी गठबंधन की राजनीति का नया चेहरा बन रहे हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 28 मई 2025 को जनेज जान्शा को स्लोवेनिया का नया प्रधानमंत्री बनने पर एक्स के जरिए बधाई दी।
जान्शा ने चौथी बार स्लोवेनिया की प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली; इससे पहले 2004–2008 , 2012–2013 और 2020–2022 में भी पद पर रहे।
90 सदस्यीय संसद में 51 मतों के समर्थन से चुने गए; 36 सांसदों ने विरोध किया।
जान्शा की एसडीएस और सहयोगी दलों के गठबंधन को संसद में 43 सीटों का समर्थन प्राप्त है।
मोदी ने व्यापार, निवेश और आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशने पर बल दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई 2025 को स्लोवेनिया के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री जनेज जान्शा को बधाई दी और उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध और प्रगाढ़ होंगे। मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए व्यापार, निवेश और आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशने पर बल दिया।

मोदी का बधाई संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत, स्लोवेनिया के साथ मिलकर दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए काम करने को उत्सुक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते साझा समृद्धि और जनता के पारस्परिक लाभ की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे। यह संदेश भारत की यूरोपीय देशों के साथ कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा है।

जान्शा का चौथी बार सत्तारोहण

स्लोवेनिया की 90 सदस्यीय संसद ने 51 मतों के साथ दक्षिणपंथी नेता जनेज जान्शा को देश का नया प्रधानमंत्री चुना; 36 सांसदों ने विरोध में मत दिया। यह जान्शा का चौथा कार्यकाल है — इससे पहले वे 2004–2008, 2012–2013 और 2020–2022 में भी प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह फैसला उस राजनीतिक गतिरोध के बाद आया है जो हालिया आम चुनाव के बाद पैदा हुआ था, जब किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका था। रॉबर्ट गोलोब की पार्टी फ्रीडम मूवमेंट ने 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया, लेकिन सरकार बनाने में विफल रही। जान्शा की स्लोवेनियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एसडीएस) 28 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।

गठबंधन और एजेंडा

जान्शा की एसडीएस ने न्यू स्लोवेनिया, डेमोक्रेट्स, स्लोवेनियन पीपुल्स पार्टी और फोकस सहित कई मध्यम-दक्षिणपंथी दलों के साथ गठबंधन बनाया है, जिसे संसद में कुल 43 सीटों का समर्थन प्राप्त है। गठबंधन ने आर्थिक सुधार, भ्रष्टाचार नियंत्रण, नौकरशाही में कमी और सत्ता के विकेंद्रीकरण को प्राथमिकता दी है। जान्शा ने संकेत दिया है कि उनकी सरकार टैक्स नीति में बदलाव करेगी और निजी शिक्षा तथा स्वास्थ्य क्षेत्र को अधिक समर्थन देगी।

अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

जान्शा को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और हंगरी के नेता विक्टर ऑर्बन के करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप में दक्षिणपंथी और मध्य-दक्षिणपंथी गठबंधनों की वापसी का एक व्यापक राजनीतिक रुझान देखा जा रहा है। भारत-स्लोवेनिया संबंधों के संदर्भ में यह नेतृत्व परिवर्तन व्यापार और निवेश के नए द्वार खोल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो ट्रंप और ऑर्बन के करीबी माने जाते हैं, के सत्ता में आने से भारत-यूरोपीय संघ संबंधों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि स्लोवेनिया EU का सदस्य है। उल्लेखनीय है कि भारत-स्लोवेनिया व्यापार अभी सीमित है, इसलिए 'व्यापार और निवेश' का उल्लेख एक दीर्घकालिक संकेत अधिक है, तात्कालिक कार्यक्रम कम। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह कूटनीतिक गर्मजोशी किसी ठोस द्विपक्षीय समझौते में बदल पाती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनेज जान्शा कौन हैं और वे स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री कैसे बने?
जनेज जान्शा स्लोवेनिया की दक्षिणपंथी पार्टी स्लोवेनियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एसडीएस) के नेता हैं, जिन्हें 90 सदस्यीय संसद में 51 मतों से चौथी बार प्रधानमंत्री चुना गया। वे 2004–2008, 2012–2013 और 2020–2022 में भी इस पद पर रह चुके हैं।
PM मोदी ने जान्शा को बधाई क्यों दी?
प्रधानमंत्री मोदी ने जान्शा के स्लोवेनिया का नया प्रधानमंत्री बनने पर कूटनीतिक बधाई दी और दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आपसी सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। यह भारत की यूरोपीय देशों के साथ सक्रिय कूटनीति का हिस्सा है।
स्लोवेनिया में राजनीतिक गतिरोध कैसे सुलझा?
हालिया आम चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। रॉबर्ट गोलोब की फ्रीडम मूवमेंट 29 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन सरकार नहीं बना सकी। जान्शा ने मध्यम-दक्षिणपंथी दलों के साथ गठबंधन बनाकर 51 मत हासिल किए और प्रधानमंत्री बने।
जान्शा सरकार की मुख्य प्राथमिकताएँ क्या हैं?
जान्शा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने आर्थिक सुधार, भ्रष्टाचार नियंत्रण, नौकरशाही में कमी और सत्ता के विकेंद्रीकरण को प्राथमिकता दी है। इसके अलावा टैक्स नीति में बदलाव और निजी शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र को अधिक समर्थन देने का भी संकेत दिया गया है।
भारत-स्लोवेनिया संबंधों का भविष्य कैसा दिखता है?
PM मोदी ने व्यापार, निवेश और आपसी सहयोग के नए अवसरों पर जोर दिया है। स्लोवेनिया यूरोपीय संघ का सदस्य होने के कारण भारत-EU संबंधों के व्यापक ढाँचे में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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