पीएफएएस प्रदूषण का कम लागत समाधान: जापानी शोध में नदी तलछट के बैक्टीरिया ने 'फॉरएवर केमिकल्स' हटाने की क्षमता दिखाई
सारांश
मुख्य बातें
कोबे विश्वविद्यालय के नेतृत्व में जापानी शोधकर्ताओं ने ओसाका प्रीफेक्चर की सामोंडो नदी की तलछट से ऐसे बैक्टीरियल स्ट्रेन की पहचान की है, जो पर्यावरण में मौजूद अत्यंत टिकाऊ प्रदूषक पीएफएएस (PFAS) — जिन्हें 'फॉरएवर केमिकल्स' कहा जाता है — को हटाने में सक्षम हैं। यह अध्ययन जर्नल ऑफ वॉटर प्रोसेस इंजीनियरिंग के अगस्त 2026 अंक में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह खोज इन रसायनों से होने वाले प्रदूषण से निपटने का एक किफायती जैविक तरीका विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
क्या हैं 'फॉरएवर केमिकल्स' और क्यों हैं खतरनाक
पीएफएएस रसायनों के एक विशाल समूह का नाम है, जिनमें कार्बन-फ्लोरीन बंध अत्यंत मजबूत होते हैं। इसी कारण ये प्राकृतिक वातावरण में आसानी से नहीं टूटते और दीर्घकाल तक पानी, मिट्टी तथा वन्यजीवों में बने रहते हैं। इनका उपयोग कपड़ों की जलरोधी परत से लेकर अग्निशमन फोम तक में किया जाता रहा है। सैन्य प्रतिष्ठानों और औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास इन रसायनों की सांद्रता विशेष रूप से अधिक पाई गई है।
शोध का तरीका और मुख्य निष्कर्ष
शोध दल ने सामोंडो नदी के किनारे से तलछट (गाद) के नमूने एकत्र किए और प्रयोगशाला में उन बैक्टीरियल स्ट्रेन को अलग किया जो पीएफओएस (PFOS) और पीएफओए (PFOA) की सांद्रता कम करने में सक्षम थे। अध्ययन में सामने आया कि पीएफएएस का बैक्टीरियल कोशिकाओं पर अवशोषण इन हानिकारक रसायनों को हटाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
प्रयोगशाला से बाहर भी इसकी उपयोगिता परखी गई — एक बैक्टीरियल स्ट्रेन ने औद्योगिक कचरा लैंडफिल से निकलने वाले लीचेट में पीएफएएस की मात्रा को उल्लेखनीय रूप से कम कर दिया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
कोबे विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हिदेयुकी इनुई ने कहा, 'यदि हम प्राकृतिक पर्यावरण से एकत्र किए गए बैक्टीरिया को संवर्धित कर उनका इस्तेमाल कर सकें, तो कम लागत में प्रदूषण को दूर करना संभव होगा।' यह ऐसे समय में आया है जब पीएफएएस प्रदूषण वैश्विक स्तर पर एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है और पारंपरिक उपचार विधियाँ अत्यंत महँगी हैं।
क्या अभी भी अस्पष्ट है
शोधकर्ताओं के अनुसार, कुछ सूक्ष्मजीवों द्वारा पीएफएएस को तोड़ने की क्षमता पहले भी प्रमाणित हो चुकी है। हालाँकि, इस प्रक्रिया में कौन से बैक्टीरिया प्रमुख भूमिका निभाते हैं तथा रासायनिक विघटन और कोशिकाओं पर अवशोषण में से किसका अनुपात अधिक है — यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। गौरतलब है कि यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है और व्यापक पैमाने पर उपयोग से पहले और अधिक परीक्षण आवश्यक होंगे।
आगे क्या
शोध दल का अगला लक्ष्य इन बैक्टीरियल स्ट्रेन की क्षमता को बड़े पैमाने पर परखना और एक व्यावहारिक जैव-उपचार (bioremediation) प्रणाली विकसित करना है। यदि यह तकनीक सफल रही, तो यह विश्वभर में पीएफएएस-प्रदूषित जल स्रोतों और औद्योगिक लैंडफिल के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।