नेपाल बाढ़: 1,455 मौतें, 5,285 लापता; खोज-बचाव अभियान बंद, ₹559 अरब के पुनर्निर्माण की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने 5 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शुरू किए गए खोज और बचाव अभियान को औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया है, क्योंकि अब किसी जीवित व्यक्ति के मिलने की संभावना नहीं रही। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के आँकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1,455 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 5,285 लोग अभी भी लापता हैं।
बचाव अभियान बंद करने का फैसला क्यों
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह निर्णय जिला सुरक्षा समितियों, जिला आपदा प्रबंधन समितियों और NDRRMA की कार्यकारी समिति की सिफारिशों तथा जमीनी निरीक्षण से मिली जानकारी के आधार पर लिया गया। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ ने नदी के किनारे बसे इलाकों और बुनियादी ढाँचे को भारी क्षति पहुँचाई थी।
आपदा के 40 दिन बाद अब सरकार का पूरा ध्यान पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर केंद्रित हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून-जनित आपदाएँ हर वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं, और इस वर्ष का विनाश पिछले कई दशकों में सबसे गंभीर बताया जा रहा है।
नुकसान का आकलन और पुनर्निर्माण बजट
राष्ट्रीय योजना आयोग और NDRRMA की संयुक्त तकनीकी टीम द्वारा तैयार 'रैपिड डिजास्टर नीड्स असेसमेंट' (RDNA) रिपोर्ट के अनुसार, हालिया बाढ़ से अनुमानित 274.48 अरब नेपाली रुपये का भौतिक नुकसान हुआ है, जबकि कुल नुकसान 408.28 अरब नेपाली रुपये तक पहुँच गया है।
बैठक में वित्त मंत्रालय से 559.18 अरब नेपाली रुपये (लगभग 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर) के बजट की सिफारिश करने का निर्णय लिया गया। यह बजट 504 योजनाओं और कार्यक्रमों के तहत प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, प्रभावित बुनियादी ढाँचे और संपत्तियों की बहाली के लिए 723 अरब नेपाली रुपये से अधिक की आवश्यकता होगी।
सरकार की प्रतिक्रिया और समन्वय
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि आपदा प्रबंधन के कार्य संघीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारों के बीच समन्वय से किए गए हैं और पुनर्निर्माण व पुनर्वास का काम भी इसी तरह आगे बढ़ाया जाएगा। परिषद ने NDRRMA को निर्देश दिया कि जिन परियोजनाओं का लागत अनुमान अभी तय नहीं हुआ है, उनकी जानकारी मिलने पर अतिरिक्त बजट की सिफारिश की जाए।
परिषद ने खोज, बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों में शामिल सुरक्षाकर्मियों, जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, निजी क्षेत्र के संगठनों, स्वयंसेवकों, मीडियाकर्मियों के साथ-साथ संकट में सहायता करने वाले देशों और विकास सहयोगियों का आभार भी व्यक्त किया।
आम जनता और प्रभावित इलाकों पर असर
भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे गाँव और कस्बे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। 5,285 लापता लोगों के परिजन अभी भी अनिश्चितता में हैं, और अब सरकार द्वारा बचाव अभियान बंद किए जाने के बाद उनकी पीड़ा और गहरी हो गई है। गौरतलब है कि नेपाल की भौगोलिक स्थिति इसे बाढ़ और भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है, और जलवायु परिवर्तन के कारण इन आपदाओं की तीव्रता बढ़ती जा रही है।
क्या होगा आगे
नेपाली सरकार अब 'आपदा-बाद जरूरत आकलन' पर काम कर रही है, जिसमें नुकसान का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा। 504 योजनाओं के तहत पुनर्निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों की भागीदारी और फंडिंग इस पुनर्निर्माण की गति को निर्धारित करेगी।