उत्तर कोरिया ने एआई-संचालित 'जैम-2.0' टॉरपीडो का परीक्षण किया, नौसैनिक ताकत बढ़ाने की रणनीति तेज
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने 17 अक्टूबर 2026 को एआई तकनीक से लैस नई टॉरपीडो प्रणाली 'जैम-2.0' का पानी के भीतर सफल परीक्षण किया, जिसे उसकी सरकारी मीडिया ने नौसैनिक क्षमताओं में एक निर्णायक छलाँग बताया। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के अनुसार, यह परीक्षण गुरुवार को किया गया और इसका उद्देश्य हथियार में किए गए तकनीकी सुधारों की पुष्टि करना था। हालाँकि, रिपोर्ट में टॉरपीडो की मारक दूरी, वास्तविक गति और अन्य परिचालन क्षमताओं का विवरण नहीं दिया गया।
परीक्षण का विवरण और दावे
KCNA ने बताया कि 'जैम-2.0' टॉरपीडो प्रणाली में लक्ष्य की पहचान करने और उसे निशाना साधने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का उपयोग किया गया है। परीक्षण के दौरान प्रणोदन प्रणाली (प्रोपल्शन सिस्टम) की दक्षता बढ़ाने और रॉकेट प्रणोदन उपकरणों के प्रदर्शन में सुधार से जुड़ी प्रमुख तकनीकों की पुष्टि हुई।
उत्तर कोरिया ने दावा किया कि पिछले पाँच वर्षों में इस प्रणाली से संबंधित 180 से अधिक परीक्षण किए जा चुके हैं। परीक्षण की निगरानी करने वाले वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने इसे नौसेना के विकास में महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देने वाली उपलब्धि बताया।
दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों का आकलन
दक्षिण कोरिया के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हथियार कथित तौर पर अत्यधिक तेज गति से चलने वाली 'सुपरकैविटेटिंग टॉरपीडो' प्रणाली हो सकती है। इस तकनीक में टॉरपीडो के अगले हिस्से के आसपास हवा का बुलबुला बनाया जाता है, जिससे पानी का प्रतिरोध कम होता है और हथियार सामान्य टॉरपीडो की तुलना में अधिक गति से आगे बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि इस तरह की टॉरपीडो को पानी के भीतर अत्यधिक गति से संचालित करते हुए उसकी दिशा और लक्ष्य पर नियंत्रण बनाए रखना तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
क्यूंगनाम विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर फार ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर लिम यूल-चुल के अनुसार, यह परीक्षण दक्षिण कोरियाई नौसेना के प्रमुख सतही युद्धपोतों को निशाना बनाने में सक्षम तेज गति वाली एआई-आधारित टॉरपीडो प्रणाली का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से किया गया हो सकता है।
सामरिक संदर्भ और नौसैनिक विस्तार
कोरिया डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोरम के महासचिव शिन जोंग-वू ने कहा कि उत्तर कोरिया अपनी पनडुब्बी क्षमताओं के विस्तार के साथ-साथ नई टॉरपीडो प्रणालियाँ विकसित कर रहा है। उनके अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण कोरियाई नौसेना की तुलना में अपनी सैन्य क्षमताओं के अंतर को कम करना है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाने के लिए लगातार हथियारों के परीक्षण कर रहा है। इसी सप्ताह बुधवार को उसने पूर्वी सागर में लगभग 3,000 टन की पनडुब्बी से दो प्रकार की रणनीतिक क्रूज मिसाइलें दागी थीं।
नए युद्धपोत और बढ़ती समुद्री शक्ति
उत्तर कोरिया ने हाल ही में 5,000 टन के दो विध्वंसक युद्धपोतों — 'चोए ह्योन' और 'कांग कोन' — को अपने बेड़े में शामिल किया है। यह इस बात का संकेत है कि प्योंगयांग अपनी पारंपरिक भूमि-आधारित सैन्य रणनीति के साथ-साथ समुद्री शक्ति को भी व्यापक रूप से विस्तारित कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में इस क्षेत्र में और अधिक परीक्षण किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।