नॉर्वे-भारत साझेदारी पर मंत्री ऑक्रस्ट: '1950 से जारी सहयोग आज वैश्विक ताकत बन चुका है'
सारांश
मुख्य बातें
नॉर्वे के अंतर्राष्ट्रीय विकास मंत्री एस्मुंड ऑक्रस्ट ने 19 मई को ओस्लो में एक विशेष साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि भारत नॉर्वे की अंतर्राष्ट्रीय विकास रणनीति में केंद्रीय स्थान रखता है और दोनों देशों के बीच दशकों पुराना संबंध आज एक परिपक्व वैश्विक साझेदारी में तब्दील हो चुका है। मंत्री ऑक्रस्ट ने इस रिश्ते को विकास सहयोग के इतिहास में एक अनुकरणीय उदाहरण बताया।
ऐतिहासिक संबंध: सहायता से साझेदारी तक
मंत्री ऑक्रस्ट ने कहा, 'भारत नॉर्वे के लिए विकास और विदेश नीति के क्षेत्र में एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देश कई वर्षों से मिलकर काम कर रहे हैं।' उन्होंने एक उल्लेखनीय तथ्य साझा किया — 1950 के दशक में नॉर्वे से विकास सहायता प्राप्त करने वाला भारत पहला देश था। उन्होंने कहा, 'यह इस बात का अच्छा उदाहरण है कि कैसे कोई देश सहायता लेने वाले से एक महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार बन सकता है। भारत के साथ इस संबंध पर नॉर्वे को गर्व है।'
गौरतलब है कि यह यात्रा सात दशकों की है — जब भारत एक नवस्वतंत्र देश के रूप में विकास सहायता पर निर्भर था, आज वह G20 की अध्यक्षता कर चुका है और वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व करता है। यह परिवर्तन नॉर्वे-भारत संबंधों की गहराई को रेखांकित करता है।
हरित ऊर्जा और जलवायु सहयोग
जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा के विषय पर मंत्री ऑक्रस्ट ने कहा, 'नॉर्वे में नवीकरणीय ऊर्जा, खासकर जलविद्युत (हाइड्रो पावर), का लंबे समय से उपयोग होता रहा है। नॉर्वे तकनीक, ग्रिड सिस्टम और ऊर्जा प्रबंधन के अनुभव साझा करके भारत की मदद कर सकता है।'
उन्होंने कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (CCS) तकनीक का विशेष उल्लेख किया, जो दोनों देशों के बीच ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'दोनों देश एक-दूसरे से सीखने और सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2070 तक नेट-ज़ीरो के लक्ष्य की ओर अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेज़ी से बढ़ा रहा है।
जलवायु संकट में भारत की भूमिका
मंत्री ऑक्रस्ट ने माना कि जलवायु परिवर्तन आज की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है और इसके समाधान के लिए समय सीमित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'भारत जैसे बड़े और महत्वपूर्ण देश की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।' उनके अनुसार नॉर्वे, भारत के साथ मिलकर जलवायु संकट से निपटने और वैश्विक स्तर पर समाधान खोजने के लिए निरंतर सहयोग जारी रखने के लिए उत्सुक है।
यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्तपोषण को लेकर बहस तेज़ है। नॉर्वे जैसे देश, जो जीवाश्म ईंधन से अपनी समृद्धि बनाते हुए भी हरित ऊर्जा में अग्रणी हैं, भारत के लिए तकनीकी साझेदारी के महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं।
आगे की राह
मंत्री ऑक्रस्ट के बयानों से स्पष्ट है कि नॉर्वे-भारत संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि ऊर्जा, तकनीक और जलवायु नीति के क्षेत्रों में एक सक्रिय कार्यशील साझेदारी है। आने वाले समय में CCS तकनीक, हाइड्रो पावर ग्रिड प्रबंधन और हरित वित्तपोषण के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा होने की संभावना है।