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'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों पर शाइना एनसी का जवाब: शिंदे का फोकस सिर्फ महाराष्ट्र विकास पर

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'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों पर शाइना एनसी का जवाब: शिंदे का फोकस सिर्फ महाराष्ट्र विकास पर

सारांश

'ऑपरेशन टाइगर' की अटकलों के बीच शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने साफ़ कहा — शिंदे का फोकस विकास पर है, सियासी अभियान पर नहीं। कथित तौर पर इस अभियान का निशाना उद्धव गुट के 6-7 लोकसभा सांसद हैं, पर आधिकारिक पुष्टि अब भी बाकी है।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने 17 जून को कहा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का ध्यान सिर्फ महाराष्ट्र के विकास पर है।
उन्होंने 'ऑपरेशन टाइगर' जैसी राजनीतिक अटकलों से बचने की अपील की।
अमरावती, नांदेड़, सोलापुर, कोल्हापुर, परभणी और लातूर से नेता लगातार शिवसेना में शामिल हो रहे हैं।
कथित 'ऑपरेशन टाइगर' का लक्ष्य शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6-7 लोकसभा सांसदों को शिंदे गुट में लाना बताया जा रहा है।
इस अभियान की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों 'ऑपरेशन टाइगर' को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने 17 जून को स्पष्ट किया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का संपूर्ण ध्यान केवल महाराष्ट्र के विकास और प्रगति पर टिका है, न कि किसी राजनीतिक अभियान पर। उन्होंने किसी भी तरह की अटकलबाज़ी से बचने की अपील की।

शाइना एनसी का बयान

शाइना एनसी ने कहा कि एकनाथ शिंदे की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने बताया कि अमरावती, नांदेड़, सोलापुर, कोल्हापुर, परभणी और लातूर समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से नेता लगातार शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। उनके अनुसार यह सरकार के मज़बूत प्रशासन और विकास मॉडल पर जनता के बढ़ते भरोसे का प्रमाण है।

शाइना एनसी ने यह भी कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने या किसी भी राजनीतिक अटकल में पड़ने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई नेता स्वेच्छा से शिवसेना में शामिल होना चाहता है, तो उसका स्वागत है — और जो भी निर्णय महाराष्ट्र की जनता एवं राज्य के हित में होगा, पार्टी उसे सहर्ष स्वीकार करेगी।

'ऑपरेशन टाइगर' क्या है

राजनीतिक गलियारों में 'ऑपरेशन टाइगर' को एक रणनीतिक अभियान के रूप में देखा जा रहा है। चर्चाओं के अनुसार, इस कथित अभियान का लक्ष्य उद्धव ठाकरे गुट — शिवसेना (यूबीटी) — के बचे हुए नौ लोकसभा सांसदों में से छह से सात सांसदों को शिंदे गुट में शामिल कराना बताया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही ऊँचा है। शिवसेना में 2022 की ऐतिहासिक टूट के बाद से दोनों गुटों के बीच सांसदों और विधायकों को लेकर खींचतान जारी रही है।

संगठन विस्तार पर ज़ोर

शाइना एनसी के बयान से स्पष्ट होता है कि शिवसेना नेतृत्व फिलहाल किसी राजनीतिक अभियान की चर्चा से अधिक संगठन विस्तार और विकास के एजेंडे को प्राथमिकता दे रहा है। पार्टी का दावा है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से नए नेताओं का जुड़ना उसकी बढ़ती स्वीकार्यता और जनाधार की मज़बूती को दर्शाता है।

आगे क्या

राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र अब इस पर है कि क्या शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों में कोई वास्तविक हलचल होती है या यह चर्चाएं महज़ अटकलों तक सीमित रहती हैं। आधिकारिक पुष्टि के अभाव में 'ऑपरेशन टाइगर' अभी कथित तौर पर एक राजनीतिक संभावना के रूप में ही बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो नाम क्यों नहीं? 2022 की टूट के बाद से शिंदे गुट ने संख्या-बल की राजनीति में महारत दिखाई है, लेकिन लोकसभा सांसदों को तोड़ना विधायकों से कहीं अधिक जटिल संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रिया है। जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, यह चर्चा दबाव की राजनीति का हिस्सा भी हो सकती है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन टाइगर' महाराष्ट्र में क्या है?
'ऑपरेशन टाइगर' महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में चर्चित एक कथित रणनीतिक अभियान है, जिसके तहत एकनाथ शिंदे की शिवसेना, उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना-यूबीटी) के 9 में से 6-7 लोकसभा सांसदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है बताया जा रहा है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शाइना एनसी ने 'ऑपरेशन टाइगर' पर क्या कहा?
शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने 17 जून को कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने या राजनीतिक अटकलें लगाने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का पूरा ध्यान महाराष्ट्र के विकास पर केंद्रित है।
कौन-कौन से जिलों से नेता शिवसेना में शामिल हो रहे हैं?
शाइना एनसी के अनुसार अमरावती, नांदेड़, सोलापुर, कोल्हापुर, परभणी और लातूर समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से नेता शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। पार्टी इसे अपने विकास मॉडल पर जनता के बढ़ते भरोसे का प्रतीक मानती है।
क्या 'ऑपरेशन टाइगर' की कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है?
नहीं। अब तक किसी भी पक्ष — न शिंदे गुट, न शिवसेना (यूबीटी) — ने 'ऑपरेशन टाइगर' की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह अभी राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों तक ही सीमित है।
महाराष्ट्र में शिवसेना की टूट कब हुई थी?
शिवसेना में ऐतिहासिक टूट 2022 में हुई थी, जब एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत की और अलग गुट बनाया। तब से दोनों गुटों के बीच सांसदों और विधायकों को लेकर राजनीतिक खींचतान जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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