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पाकिस्तान में सेना ही असली सत्ता, शहबाज सरकार वैधता संकट में: शोधकर्ता वास शेनॉय

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पाकिस्तान में सेना ही असली सत्ता, शहबाज सरकार वैधता संकट में: शोधकर्ता वास शेनॉय

सारांश

राजनीतिक शोधकर्ता वास शेनॉय की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में सत्ता का असली केंद्र सेना है — निर्वाचित सरकार नहीं। 2024 चुनावों पर सवाल, इमरान खान की गिरफ्तारी, TTP के बढ़ते हमले और आर्थिक संकट मिलकर देश को एक गहरे संस्थागत संकट की ओर धकेल रहे हैं।

मुख्य बातें

शोधकर्ता वास शेनॉय के अनुसार पाकिस्तान एक 'हाइब्रिड सिस्टम' में चल रहा है, जहाँ सेना नागरिक राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों में निर्णायक भूमिका में है।
2024 के चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल, इमरान खान की गिरफ्तारी और मीडिया पर कथित प्रतिबंध — ये सब शहबाज शरीफ सरकार की वैधता को कमज़ोर कर रहे हैं।
TTP ने खैबर पख्तूनख्वा में हमले तेज़ किए हैं; IS-K और बलूच अलगाववादी भी सक्रिय हैं।
पाकिस्तान भारी कर्ज़, सीमित कर आधार, ऊर्जा संकट और विदेशी सहायता पर निर्भरता जैसी संरचनात्मक आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है।
शेनॉय ने चेतावनी दी कि अमेरिका को जनरल आसिम मुनीर को जनरल जिया-उल-हक जैसा समर्थन देने से बचना चाहिए।
पाकिस्तान के परमाणु हथियार अभी सुरक्षित हैं, लेकिन भविष्य में अंदरूनी मिलीभगत या सैन्य विभाजन से जोखिम बढ़ सकता है।

पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था एक 'हाइब्रिड सिस्टम' के रूप में संचालित हो रही है, जिसमें निर्वाचित सरकार के समानांतर सेना राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक राजनीति दोनों क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाती है। यह विश्लेषण राजनीतिक शोधकर्ता वास शेनॉय ने 'द टाइम्स ऑफ इज़रायल' में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार गंभीर वैधता संकट से जूझ रही है।

वैधता संकट की जड़ें

2024 के आम चुनावों की निष्पक्षता पर उठे सवाल, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी व राजनीतिक अलगाव, मीडिया पर कथित प्रतिबंध, न्यायपालिका की स्वतंत्रता में कमी और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा — ये सभी मिलकर शरीफ सरकार की साख को कमज़ोर कर रहे हैं। शेनॉय के अनुसार, इन परिस्थितियों ने पाकिस्तान के लाखों नागरिकों में यह धारणा बलवती की है कि चुनाव के माध्यम से शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन अब संभव नहीं रहा। इसके चलते संवैधानिक राजनीति पर जनता का भरोसा कमज़ोर हुआ है और जनाक्रोश सीधे राज्य की संस्थाओं की ओर मुड़ रहा है।

सुरक्षा संकट: टीटीपी से आईएस-के तक

रिपोर्ट में पाकिस्तान के बिगड़ते सुरक्षा माहौल पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। शेनॉय के अनुसार, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा में अपने हमले तेज़ कर दिए हैं, जबकि बलूच अलगाववादी दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में सरकार को चुनौती दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, इस्लामिक स्टेट-खुरासान (IS-K) और अन्य सांप्रदायिक संगठन भी सक्रिय हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अफगानिस्तान इन समूहों में से कुछ के लिए सुरक्षित ठिकाने का काम करता है, और पाकिस्तान की आतंकवादी संगठनों के प्रति अतीत की चयनात्मक नीति ने 'उपयोगी' और 'शत्रुतापूर्ण' संगठनों के बीच की रेखा धुंधली कर दी है।

आर्थिक संकट: कर्ज़, ऊर्जा और जलवायु की तिहरी मार

शेनॉय ने रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय सहायता से भुगतान संतुलन संकट का तत्काल खतरा फिलहाल टल गया है, लेकिन पाकिस्तान अब भी भारी कर्ज़, सीमित कर आधार, ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय समस्याओं, कमज़ोर सार्वजनिक सेवाओं और विदेशी वित्तीय सहायता पर निर्भरता जैसी संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि गरीबी, तेज़ी से बढ़ती आबादी और बाढ़, भीषण गर्मी तथा जल संकट जैसी समस्याएँ देश की क्षमता को और कमज़ोर कर रही हैं।

परमाणु हथियारों को लेकर चेतावनी

रिपोर्ट में पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिलाया गया है। शेनॉय के अनुसार, फिलहाल ये हथियार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और विशेष कमान एवं नियंत्रण प्रणाली के अधीन हैं और उग्रवादी संगठनों के हाथ लगने की संभावना बेहद कम है। हालाँकि उन्होंने आगाह किया कि भविष्य में अंदरूनी मिलीभगत से परमाणु सामग्री की चोरी, परमाणु ढाँचे में तोड़फोड़, हथियारों के परिवहन पर हमले या सैन्य तंत्र में विभाजन जैसे जोखिमों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।

अमेरिका को क्या करना चाहिए

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अमेरिका को पाकिस्तान के साथ आर्थिक और जलवायु सहयोग जारी रखना चाहिए, लेकिन साथ ही विश्वसनीय चुनाव, मज़बूत नागरिक शासन और सभी आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध समान कार्रवाई की स्पष्ट शर्तें भी रखनी चाहिए। शेनॉय ने विशेष रूप से कहा कि वॉशिंगटन को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को उसी तरह समर्थन देने से बचना चाहिए, जैसा अतीत में जनरल जिया-उल-हक को दिया गया था। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संकट एक साथ गहराते दिख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे 'हाइब्रिड सिस्टम' का नाम देकर अमेरिकी नीति-निर्माताओं को संबोधित करने का समय महत्वपूर्ण है। असली सवाल यह है कि क्या वॉशिंगटन इस बार शर्त-आधारित सहयोग की राह चुनेगा या फिर रणनीतिक सुविधा के नाम पर जवाबदेही की बलि चढ़ाएगा। भारत के नज़रिए से देखें तो पाकिस्तान में TTP और IS-K की बढ़ती सक्रियता और परमाणु जोखिम की चेतावनी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सीधी चिंता है। रिपोर्ट जो कह रही है, उससे ज़्यादा ज़रूरी यह है कि दुनिया इसे सुन रही है या नहीं।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान का 'हाइब्रिड सिस्टम' क्या है?
शोधकर्ता वास शेनॉय के अनुसार, पाकिस्तान में निर्वाचित सरकार के समानांतर सेना राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक राजनीति दोनों में निर्णायक भूमिका निभाती है — इसी व्यवस्था को 'हाइब्रिड सिस्टम' कहा गया है। इसमें चुनी हुई सरकार औपचारिक रूप से शासन करती है, लेकिन वास्तविक शक्ति सेना के हाथों में रहती है।
शहबाज शरीफ सरकार को वैधता संकट क्यों हो रहा है?
2024 के आम चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल, इमरान खान और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी, मीडिया पर कथित प्रतिबंध, न्यायपालिका की स्वतंत्रता में कमी और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा — ये सभी मिलकर शहबाज शरीफ सरकार की साख को कमज़ोर कर रहे हैं। इससे नागरिकों में यह धारणा बनी है कि चुनाव के ज़रिए शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन अब संभव नहीं।
पाकिस्तान में TTP और IS-K की स्थिति क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने खैबर पख्तूनख्वा में हमले तेज़ कर दिए हैं, जबकि बलूच अलगाववादी दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में सरकार को चुनौती दे रहे हैं। इस्लामिक स्टेट-खुरासान (IS-K) भी सक्रिय है और अफगानिस्तान इन समूहों के लिए सुरक्षित ठिकाने का काम करता है।
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर क्या चेतावनी दी गई है?
शेनॉय के अनुसार, फिलहाल पाकिस्तान के परमाणु हथियार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और विशेष कमान-नियंत्रण प्रणाली के अधीन हैं और उग्रवादियों के हाथ लगने की संभावना बेहद कम है। लेकिन भविष्य में अंदरूनी मिलीभगत, सामग्री की चोरी या सैन्य तंत्र में विभाजन जैसे जोखिमों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
अमेरिका को पाकिस्तान नीति में क्या बदलाव करना चाहिए?
रिपोर्ट में सुझाव है कि अमेरिका आर्थिक और जलवायु सहयोग जारी रखे, लेकिन विश्वसनीय चुनाव, मज़बूत नागरिक शासन और सभी आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध समान कार्रवाई की शर्तें रखे। शेनॉय ने विशेष रूप से कहा कि वॉशिंगटन को जनरल आसिम मुनीर को जनरल जिया-उल-हक जैसा बिना शर्त समर्थन देने से बचना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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