पाकिस्तान में मल्टीपल स्क्लेरोसिस मरीजों की बड़ी मुश्किल: सालाना ₹10 लाख तक इलाज खर्च, सरकारी सहायता नाकाफी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) से पीड़ित मरीज इलाज की आसमान छूती लागत और सरकारी अस्पतालों में आधुनिक उपचार सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार से तत्काल आर्थिक सहायता की माँग की है, ताकि युवा रोगियों को रोकी जा सकने वाली विकलांगता से बचाया जा सके।
मरीजों की संख्या और इलाज की लागत
चिकित्सकों के अनुमान के अनुसार, पाकिस्तान में एमएस से पीड़ित मरीजों की संख्या 12,000 से 14,000 के बीच है, हालाँकि इस बीमारी से संबंधित कोई व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस अभी तक तैयार नहीं किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक मरीज के उपचार पर सालाना लगभग 10 लाख पाकिस्तानी रुपये तक का खर्च आ सकता है — एक ऐसी राशि जो अधिकांश परिवारों की पहुँच से बाहर है।
कुछ मरीज प्रांतीय सेहत कार्ड कार्यक्रम के अंतर्गत उपचार करवा रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों और मरीज अधिकार संगठनों का कहना है कि इस योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि इलाज की पूरी लागत को कवर नहीं करती। पर्याप्त वित्तीय सहयोग के अभाव में कई मरीज बीच में ही उपचार छोड़ने को विवश हो जाते हैं।
इलाज बंद करने के गंभीर परिणाम
न्यूरोलॉजिस्टों का स्पष्ट कहना है कि उपचार में रुकावट आने पर बीमारी तेज़ी से बढ़ सकती है और मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर हमला करने लगती है। इसके लक्षणों में दृष्टि संबंधी समस्याएँ, अत्यधिक थकान, चलने और संतुलन बनाए रखने में कठिनाई, तथा हाथ-पैरों में सुन्नपन या कमज़ोरी शामिल हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर उपचार से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है, दोबारा उभरने की संभावना कम की जा सकती है और मरीज के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।
दवाओं की कीमतों में भारी उछाल
रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2026 में पाकिस्तान के खुले बाज़ार और रावलपिंडी के दवा केंद्र बोहर बाज़ार में कई दवाओं की कीमतों में 50% से लेकर 500% तक की वृद्धि दर्ज की गई। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एंटीबायोटिक, पेट संबंधी बीमारियों और खाँसी की दवाओं के दाम भी काफी बढ़ गए हैं।
इंसुलिन इंजेक्शन डिवाइस की कीमत 2,200 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 4,720 पाकिस्तानी रुपये तक पहुँच गई है। आलोचकों ने इस मूल्य वृद्धि को आम लोगों के लिए 'असहनीय' बताते हुए कहा है कि कम आय वाले मरीज आवश्यक दवाओं तक पहुँचने में असमर्थ होते जा रहे हैं।
सरकार से हस्तक्षेप की माँग
मरीज अधिकार संगठनों और चिकित्सकों ने सरकार से माँग की है कि आवश्यक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लगाया जाए और एमएस जैसी दीर्घकालिक बीमारियों के उपचार के लिए विशेष वित्तीय सहायता योजना बनाई जाए। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही गंभीर दबाव में है और स्वास्थ्य सेवाओं पर सार्वजनिक खर्च सीमित बना हुआ है।
गौरतलब है कि विशेषज्ञों के अनुसार एमएस के सटीक कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन पारिवारिक इतिहास होने पर इसका जोखिम बढ़ सकता है। बिना समुचित नीतिगत हस्तक्षेप के, हज़ारों मरीजों का भविष्य अनिश्चितता में बना रहेगा।