15 जुलाई 2026
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मुल्तान में पाकिस्तान पुलिस ने 13 अफगान डॉक्टर और एक मेडिकल छात्र गिरफ्तार किए, वीजा लंबित होने के बावजूद निर्वासन केंद्र भेजा

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मुल्तान में पाकिस्तान पुलिस ने 13 अफगान डॉक्टर और एक मेडिकल छात्र गिरफ्तार किए, वीजा लंबित होने के बावजूद निर्वासन केंद्र भेजा

सारांश

पाकिस्तान के मुल्तान में 13 अफगान डॉक्टर और एक मेडिकल छात्र गिरफ्तार — वीजा आवेदन एक साल से लंबित, फिर भी अटक निरुद्ध केंद्र भेजा गया। यह पाकिस्तान के उस बड़े अभियान का हिस्सा है जिसमें बन्नू के तीन शिविरों से 525 अफगान परिवारों को भी वापस भेजा जा चुका है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के मुल्तान में पुलिस ने मंगलवार, 15 जुलाई को एक सरकारी अस्पताल से 13 अफगान डॉक्टरों और एक मेडिकल छात्र को गिरफ्तार किया।
सभी हिरासती का कहना है कि उनके वीजा आवेदन लगभग एक वर्ष से पाकिस्तानी अधिकारियों के पास लंबित हैं।
गिरफ्तार लोगों को अटक स्थित डिटेंशन सेंटर भेजा गया, जहाँ से अफगानिस्तान निर्वासन की आशंका है।
खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में तीन शरणार्थी शिविरों से 525 अफगान परिवारों को तोरखम सीमा के रास्ते वापस भेजा गया।
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 28 जून को आदेश दिया था कि 10 जुलाई से बिना वैध वीजा के रहने वाले अफगान नागरिकों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
यह अभियान 2023 में शुरू हुए निर्वासन अभियान का विस्तार है, जिसे पिछले वर्ष अप्रैल में फिर से तेज किया गया था।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुल्तान शहर में पुलिस ने 13 अफगान चिकित्सकों और एक मेडिकल छात्र को मंगलवार, 15 जुलाई को एक सरकारी अस्पताल से गिरफ्तार कर अटक स्थित निरुद्ध केंद्र (डिटेंशन सेंटर) भेज दिया, जहाँ से उन्हें अफगानिस्तान निर्वासित किया जा सकता है। हिरासत में लिए गए इन लोगों का कहना है कि उनके वीजा आवेदन लगभग एक वर्ष से पाकिस्तानी अधिकारियों के पास लंबित हैं, फिर भी उन्हें बिना किसी आधिकारिक निर्णय के गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी का विवरण

अफगान समाचार एजेंसी खामा प्रेस की रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए 14 लोगों में से पाँच ने नए प्रवेश वीजा के लिए आवेदन किया था, जबकि शेष डॉक्टरों ने अपने मौजूदा वीजा के विस्तार का अनुरोध किया था। उनके अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान पाकिस्तानी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार उनके दस्तावेजों की जाँच की, परंतु आव्रजन (इमिग्रेशन) मामलों पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं सुनाया गया।

गिरफ्तार डॉक्टरों ने चिंता व्यक्त की है कि मेडिकल विशेषज्ञता और प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा होने से पहले ही उन्हें अफगानिस्तान भेजा जा सकता है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार और अफगान अधिकारियों से हस्तक्षेप कर पढ़ाई पूरी होने तक रहने की अनुमति देने की अपील की है।

व्यापक निर्वासन अभियान

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों, विशेषकर अफगान नागरिकों, के खिलाफ अपना अभियान तेज कर रहा है। 28 जून को पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया था कि 10 जुलाई से बिना वैध वीजा के देश में रहने वाले किसी भी अफगान नागरिक को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने वर्ष 2023 में शुरू किए गए निर्वासन अभियान को पिछले वर्ष अप्रैल में फिर से तेज किया था, जब सरकार ने लाखों अफगान नागरिकों के निवास परमिट रद्द कर दिए थे और चेतावनी दी थी कि देश नहीं छोड़ने पर गिरफ्तारी होगी।

खैबर पख्तूनख्वा में शरणार्थी शिविर खाली

इसी क्रम में, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में स्थित तीन शरणार्थी शिविरों — बिजान खेल, घोरीवाला और ममंद खेल — को पूरी तरह खाली कराकर 525 अफगान परिवारों को तोरखम सीमा चौकी के रास्ते अफगानिस्तान वापस भेज दिया गया है।

अतिरिक्त उपायुक्त उमर खिताब खान ने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा सरकार के निर्देशों के अनुसार अफगान शरणार्थियों की चरणबद्ध वापसी जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि अब प्रशासन का ध्यान उन अफगान नागरिकों पर है जो बन्नू और आसपास के इलाकों में किराए के मकानों या निजी आवासों में रह रहे हैं।

आगे क्या होगा

हिरासत में लिए गए डॉक्टरों और मेडिकल छात्र का भविष्य अटक के निरुद्ध केंद्र में उनकी वीजा स्थिति की समीक्षा पर निर्भर करेगा। यदि पाकिस्तान या अफगान अधिकारी हस्तक्षेप नहीं करते, तो उन्हें शीघ्र ही अफगानिस्तान निर्वासित किए जाने की आशंका है। यह मामला पाकिस्तान में अफगान नागरिकों की बढ़ती कानूनी अनिश्चितता को उजागर करता है, जहाँ प्रशासनिक देरी और कड़ी नीतियाँ एक साथ टकरा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और फिर उन्हीं आवेदकों को 'अवैध' घोषित कर गिरफ्तार करता है, तो यह प्रशासनिक विफलता है, न कि कानून का शासन। विशेष रूप से चिकित्सा प्रशिक्षुओं को अस्पताल से उठाना उस मानवीय पूँजी को नष्ट करता है जिसकी अफगानिस्तान को सबसे अधिक जरूरत है। पाकिस्तान का यह अभियान घरेलू राजनीतिक दबाव में तेज हुआ है, लेकिन लंबित वीजा मामलों में पारदर्शी प्रक्रिया के अभाव में यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों पर सवाल खड़े करता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुल्तान में गिरफ्तार अफगान डॉक्टरों का मामला क्या है?
पाकिस्तान के मुल्तान शहर में पुलिस ने 15 जुलाई को एक सरकारी अस्पताल से 13 अफगान डॉक्टरों और एक मेडिकल छात्र को गिरफ्तार कर अटक के डिटेंशन सेंटर भेज दिया। इन सभी के वीजा आवेदन लगभग एक वर्ष से पाकिस्तानी अधिकारियों के पास लंबित थे।
पाकिस्तान अफगान नागरिकों के खिलाफ यह अभियान क्यों चला रहा है?
पाकिस्तान सरकार ने 28 जून को आदेश दिया था कि 10 जुलाई से बिना वैध वीजा के रहने वाले अफगान नागरिकों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। यह 2023 में शुरू हुए निर्वासन अभियान का हिस्सा है, जिसे पिछले वर्ष अप्रैल में फिर से तेज किया गया था।
खैबर पख्तूनख्वा के शरणार्थी शिविरों में क्या हुआ?
बन्नू जिले के तीन शरणार्थी शिविरों — बिजान खेल, घोरीवाला और ममंद खेल — को पूरी तरह खाली कराकर 525 अफगान परिवारों को तोरखम सीमा चौकी के रास्ते अफगानिस्तान वापस भेजा गया। अतिरिक्त उपायुक्त उमर खिताब खान ने बताया कि यह खैबर पख्तूनख्वा सरकार के निर्देशों के तहत चरणबद्ध वापसी का हिस्सा है।
गिरफ्तार डॉक्टरों का आगे क्या होगा?
हिरासत में लिए गए डॉक्टरों और मेडिकल छात्र को अटक के निरुद्ध केंद्र में रखा गया है, जहाँ से उन्हें अफगानिस्तान निर्वासित किया जा सकता है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार और अफगान अधिकारियों से हस्तक्षेप कर प्रशिक्षण पूरा होने तक रहने की अनुमति देने की अपील की है।
क्या लंबित वीजा आवेदन के बावजूद गिरफ्तारी कानूनी है?
हिरासत में लिए गए डॉक्टरों के अनुसार, उन्होंने करीब एक वर्ष पहले नए वीजा या विस्तार के लिए आवेदन किया था और पाकिस्तानी अधिकारियों ने अब तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया था। इस कानूनी अनिश्चितता के बावजूद उनकी गिरफ्तारी ने मानवाधिकार संगठनों और अफगान समुदाय में गहरी चिंता पैदा की है।
राष्ट्र प्रेस
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