पाकिस्तान: ट्रांसजेंडर समुदाय में बढ़ती बेरोजगारी और भेदभाव की चिंता

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पाकिस्तान: ट्रांसजेंडर समुदाय में बढ़ती बेरोजगारी और भेदभाव की चिंता

सारांश

पाकिस्तान के ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग भेदभाव और नौकरी आरक्षण की कमी से परेशान हैं। सरकारी संस्थानों में नौकरी न मिलने से उन्हें स्थायी रोजगार और गरिमापूर्ण जीवन जीने में कठिनाई हो रही है। क्या सरकार इस पर ध्यान देगी?

मुख्य बातें

ट्रांसजेंडर समुदाय को नौकरी में आरक्षण की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
भेदभाव और हिंसा के मामलों में वृद्धि हुई है।
सरकार से स्थायी रोजगार और उचित वेतन की मांग।
ट्रांसजेंडर अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानून मौजूद हैं, लेकिन कार्यान्वयन की आवश्यकता है।
आर्थिक महंगाई ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है।

इस्लामाबाद, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के फैसलाबाद में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने भेदभाव और ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अधिनियम 2018’ के प्रभावी कार्यान्वयन की कमी पर चिंता जताई है। विशेष रूप से सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थाओं में तीन प्रतिशत नौकरी आरक्षण का न होना एक गंभीर समस्या बन गया है।

एक पुलिस सेवा केंद्र में विक्टिम सपोर्ट ऑफिसर डॉ. फरी ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग, जो बेहद योग्य हैं, स्थायी रोजगार प्राप्त करने में लगातार कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, फरी ने बताया कि उनके पास फैसलाबाद के कृषि विश्वविद्यालय से डॉक्टर ऑफ वेटरिनरी मेडिसिन (डीवीएम) की डिग्री है, लेकिन फिर भी उन्हें नौकरी पाने में संघर्ष करना पड़ रहा है।

फरी ने कहा कि एक निजी डेयरी फार्म में काम करते समय उन्हें नियोक्ताओं और आम लोगों से मौखिक दुर्व्यवहार और असंवेदनशील टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।

डॉ. फरी ने बताया कि उन्होंने आरक्षित कोटे के तहत कई सरकारी विभागों में नौकरियों के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें किसी भी पद पर चयनित नहीं किया गया।

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को प्रति माह 30,000 पाकिस्तानी रुपए (पीकेआर) का वेतन मिल रहा है, जो न्यूनतम वेतन मानकों से भी कम है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में इतने कम वेतन में परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।

उन्होंने कहा, "इन परिस्थितियों में हम न तो अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकते हैं और न ही गरिमापूर्ण जीवन जी सकते हैं।" उन्होंने सरकार से स्थायी रोजगार और उचित वेतन प्रदान करने की अपील की।

इससे पहले जनवरी में आई एक रिपोर्ट में ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता बिंदिया राणा पर हुए हमले का जिक्र करते हुए बताया गया कि पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है।

राणा पर उनके घर पर उस समय हमला किया गया, जब वह जहरिश खानजादी के साथ चाय पी रही थीं। जहरिश भी एक ट्रांसजेंडर महिला हैं और ‘जेंडर अलायंस इंटरैक्टिव’ (जीआईए) नामक संगठन के लिए काम करती हैं। यह संगठन ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की वकालत करता है।

ब्रिटेन के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र 'द गार्डियन' ने खानज़ादी के हवाले से बताया, "जैसे ही राणा ने रसोई से ही रिमोट के जरिए दरवाजा खोला, उसके कुछ ही सेकंड के भीतर तीन गोलियों की आवाज गूंज उठी। हमलावर वहां से भाग निकले, और राणा बाल-बाल बच गईं।"

सुबह होते-होते, उन्होंने अनजान हमलावरों के खिलाफ पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी थी। एक एक्टिविस्ट होने के नाते, खानज़ादी को इस बात का पूरा अंदाजा था कि पाकिस्तान में ट्रांस समुदाय को किन-किन खतरों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उन्हें कभी यह उम्मीद नहीं थी कि कराची में अपने ही घर की चारदीवारी में वह खुद ही किसी हमले का शिकार बन जाएंगी।

19 जनवरी को हुई गोलीबारी की यह घटना, पाकिस्तान में ट्रांसजेंडरों पर होने वाले क्रूर हमलों और हत्याओं की एक लंबी कड़ी में सबसे ताजा मामला है। इससे पहले नादिरा नाम की एक ट्रांस महिला कराची के 'सी व्यू' बीच पर थी। तभी एक आदमी उसके पास गलत इरादे से आया। नादिरा ने उसका विरोध किया, जिसके बाद उस आदमी ने नादिरा पर चाकू से हमला कर दिया।

'द गार्डियन' अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया, "पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ हिंसा में भारी बढ़ोतरी हुई है। जीआईए ने 2022 से लेकर सितंबर 2025 के बीच सिंध प्रांत में ट्रांसजेंडरों की 55 हत्याओं के मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 17 हत्याएं अकेले कराची में हुई हैं।"

खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत के कई जिलों में स्थानीय बुजुर्गों ने ट्रांस महिलाओं को इलाका छोड़कर चले जाने का फरमान सुना दिया है। इन बुजुर्गों का आरोप है कि ये महिलाएं युवाओं को बिगाड़ रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर समुदाय को कौन-कौन सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
ट्रांसजेंडर समुदाय को भेदभाव, नौकरी में आरक्षण की कमी, स्थायी रोजगार की अनुपलब्धता, और मौखिक दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है।
क्या ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कोई कानूनी अधिकार हैं?
'ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अधिनियम 2018' के तहत उनके अधिकारों की रक्षा की गई है, लेकिन इसके प्रभावी कार्यान्वयन की कमी है।
पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ हिंसा की क्या स्थिति है?
पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ हिंसा में वृद्धि हो रही है, जिसमें हाल के हमले और हत्याएं शामिल हैं।
सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय की मदद के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार ने कुछ योजनाएं घोषित की हैं, लेकिन इनका प्रभावी कार्यान्वयन और स्थायी रोजगार की व्यवस्था अभी भी आवश्यक है।
क्या ट्रांसजेंडर समुदाय की स्थिति में सुधार के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन है?
हाँ, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों द्वारा ट्रांसजेंडर अधिकारों की वकालत की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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