क्या पाकिस्तान में भारी टैक्स और कमजोर कल्याण प्रणाली से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान में उच्च और प्रतिगामी टैक्स
- महंगाई का सामना कर रही आबादी
- सरकार की उदासीनता
- राजकोषीय संकट और सामाजिक अनुबंध
- व्यापार करने की महंगाई
नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में जो भी सरकार रही है, चाहे वह नागरिक हो या सैन्य, सभी ने उच्च और प्रतिगामी टैक्स लगाए हैं। इसके परिणामस्वरूप, यहाँ की अधिकांश आबादी को महंगाई का सामना करना पड़ा है। इसके साथ ही, सरकार कल्याण के नाम पर भी कुछ नहीं देती। सरकार समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के प्रति पूरी तरह से उदासीन है। यह बात एक लेख में कहा गया है जो पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित हुआ है।
लाहौर से प्रकाशित द फ्राइडे टाइम्स के अनुसार, पाकिस्तान का राजकोषीय संकट केवल घाटे और आंकड़ों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक टूटे हुए सामाजिक अनुबंध का संकेत है। नागरिक जो देते हैं और जो उन्हें मिलता है, उसके बीच बढ़ा गैप है। कल्याण वितरण के बिना उच्च टैक्स न सिर्फ प्रभावकारी राजस्व उत्पन्न करने में असफल रहा है, बल्कि इसने भरोसा भी खत्म किया है, निवेश को हतोत्साहित किया है और औपचारिक अर्थव्यवस्था को कमजोर किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की विकास विफलता को अक्सर कम उत्पादकता, कमजोर निर्यात, नवाचार की कमी या अपूर्ण उद्यमिता जैसे तर्कों से समझाया जाता रहा है। लेकिन, असली समस्या सरकार द्वारा बनाए गए कॉस्ट स्ट्रक्चर में है, जिसने व्यापार करना बहुत महंगा और संरचना के हिसाब से बेमतलब बना दिया है।
लेख में निक्केई एशिया में प्रकाशित एक निजी क्षेत्र के विश्लेषण का उल्लेख किया गया है, जिसमें यह बताया गया है कि पाकिस्तान में व्यापार करना दूसरी दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्था के मुकाबले 34 प्रतिशत अधिक महंगा है। पाकिस्तान बिजनेस फोरम (पीबीएफ) के अध्ययन के अनुसार, अतिरिक्त लागत आकस्मिक या चक्रीय नहीं, बल्कि संरचनात्मक, संचयी और नीतिगत कारणों से उत्पन्न है।
लेख में कहा गया है, 'केवल 34 लाख प्रभावी करदाताओं की ओर से पूरे राज्य का वित्तपोषण किया जा रहा है, जो 8.56 करोड़ की कार्यबल का मात्र चार प्रतिशत है। हमने मध्यवर्ग के खिलाफ युद्ध घोषित कर दिया है। जब इस सीमित वर्ग को बहु-खरब रुपये के घाटे को पाटने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि अनौपचारिक अभिजात वर्ग अछूता रहता है, तो उत्कृष्टता को कर योग्य अपराध और पारदर्शिता को दिवालियापन का मार्ग बना दिया जाता है।'
लेख में यह भी कहा गया है कि त्रासदी यह नहीं है कि पाकिस्तान बहुत कम कर एकत्र करता है, बल्कि यह है कि वह अव्यवस्थित तरीके से कर लगाता है। संकीर्ण कर आधार पर ऊंची दरें, कम प्राप्ति और लगभग पांच लाख करोड़ रुपये के कर व्यय के साथ, लगातार मिनी-बजट, सुपर टैक्स, पेट्रोलियम पर उपकर, कड़े स्रोत पर कर कटौती प्रावधान और अनुमानित कराधान के विस्तार के बावजूद ऋण-से-कर अनुपात 700 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है।
-- राष्ट्र प्रेस
अर्पित याज्ञनिक/डीएससी