पेजेश्कियन ने शी जिनपिंग की इस्लामाबाद MOU पहल का स्वागत किया, ईरान ने कूटनीति को दी प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 26 सितंबर 2026 को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उस पहल की सराहना की, जिसमें जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MOU) पर वापस लौटने का आग्रह किया। पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि ईरान भी इसी दृष्टिकोण का समर्थन करता है और गंभीर, ठोस व परिणामोन्मुखी बातचीत के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ बनाने पर बल देता है।
एक्स पर पेजेश्कियन का बयान
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस विचारशील और ज़िम्मेदार समर्थन की सराहना करता हूँ, जिसमें उन्होंने इस्लामाबाद समझौता-पत्र पर लौटने और बातचीत व कूटनीति के ज़रिए मतभेदों को सुलझाने की बात कही है।' पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान पूर्व में तय वादों का सम्मान करते हुए नतीजे देने वाली बातचीत को आगे बढ़ाने को तैयार है।
यूएनजीए में ईरान का रुख
इससे पहले पेजेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में कहा था कि ईरान आतंकवादी नहीं, बल्कि आतंकवाद और आक्रामकता का शिकार है। उन्होंने कहा कि अपनी रक्षा-क्षमता को सुदृढ़ करना ही स्वतंत्रता बनाए रखने और हमलावरों को रोकने का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस्लामिक गणराज्य ईरान पर युद्ध थोपा गया है, और देश अपना बचाव कभी नहीं छोड़ेगा।
कूटनीति और दृढ़ता का संयोजन
पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि तेहरान बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, परंतु वह धमकियों की भाषा स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा, 'प्रतिरोध को बमों या आक्रामकता से नहीं हराया जा सकता।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है।
भू-राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि इस्लामाबाद MOU ईरान, चीन और अन्य पक्षों के बीच एक महत्वपूर्ण राजनयिक दस्तावेज़ रहा है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक संवाद की रूपरेखा तय करता है। शी जिनपिंग की यह पहल चीन की मध्यस्थ भूमिका को रेखांकित करती है, जो पहले भी ईरान-सऊदी अरब सुलह में सक्रिय रही है। ट्रंप से जिनपिंग की मुलाकात के बाद यह संकेत मिलता है कि वैश्विक शक्तियाँ ईरान के परमाणु मसले पर कूटनीतिक रास्ता खोजने को लेकर फिर सक्रिय हो रही हैं।
आगे की राह
पेजेश्कियन के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की नज़र इस पर होगी कि इस्लामाबाद MOU पर औपचारिक वार्ता कब और किस स्वरूप में फिर शुरू होती है। ईरान की ओर से कूटनीति के प्रति सहमति के ये संकेत क्षेत्रीय तनाव को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माने जा रहे हैं, हालाँकि ठोस प्रगति की अभी भी प्रतीक्षा है।