27 जून 2026
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पीयूष गोयल ने लंदन में 'केयरएज ग्लोबल' की सॉवरेन रेटिंग्स रिपोर्ट लॉन्च की, 45 देशों की अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण

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पीयूष गोयल ने लंदन में 'केयरएज ग्लोबल' की सॉवरेन रेटिंग्स रिपोर्ट लॉन्च की, 45 देशों की अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण

सारांश

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में केयरएज ग्लोबल की 'सॉवरेन रेटिंग्स' रिपोर्ट का तीसरा संस्करण लॉन्च किया — जो 45 देशों और वैश्विक जीडीपी के 85% का विश्लेषण करती है। यह भारतीय रेटिंग एजेंसी की वैश्विक वित्तीय केंद्रों में पहचान बनाने की बड़ी कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में केयरएज ग्लोबल की 'सॉवरेन रेटिंग्स: अ फ्रेश पर्स्पेक्टिव' रिपोर्ट का तीसरा संस्करण लॉन्च किया।
रिपोर्ट में 45 देशों की अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण है, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।
रिपोर्ट पाँच मानकों पर आधारित है: अर्थव्यवस्था की संरचना, सरकारी वित्त, विदेशी लेन-देन, मौद्रिक स्थिरता और सुशासन।
मेहुल पंड्या (MD और ग्रुप CEO) ने पारदर्शी और भविष्योन्मुखी कार्यप्रणाली पर जोर दिया।
रेवती कस्तुरे (CEO, केयरएज ग्लोबल) ने कहा कि लंदन लॉन्च वैश्विक निवेशकों और नीति-निर्माताओं से संबंध मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 27 जून 2026 को लंदन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल की प्रमुख रिपोर्ट 'सॉवरेन रेटिंग्स: अ फ्रेश पर्स्पेक्टिव' का तीसरा संस्करण लॉन्च किया। इस रिपोर्ट में 45 देशों की अर्थव्यवस्थाओं का गहन विश्लेषण किया गया है, जो मिलकर वैश्विक जीडीपी का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ

यह रिपोर्ट पाँच प्रमुख आधारों पर तैयार की गई है — अर्थव्यवस्था की संरचना, सरकार की वित्तीय स्थिति, विदेशी लेन-देन की मज़बूती, मौद्रिक स्थिरता और सुशासन। इन पाँच मानकों के आधार पर विकसित और उभरती दोनों प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं के क्रेडिट जोखिम का भविष्योन्मुखी आकलन किया गया है।

रिपोर्ट वैश्विक आर्थिक रुझानों, सरकारी वित्तीय स्थिति, संस्थागत मज़बूती और बाहरी आर्थिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता जैसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। इसका उद्देश्य निवेशकों और नीति-निर्माताओं को अनिश्चित वैश्विक परिवेश में बेहतर निर्णय लेने में सहायता करना है।

मंत्री पीयूष गोयल की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा, 'इस तरह की शोध-आधारित रिपोर्टें देशों की आर्थिक स्थिति और बदलते वैश्विक माहौल को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती हैं। यह ज़रूरी है कि रेटिंग एजेंसियों के देशों की रेटिंग तय करने के तरीके पर खुलकर चर्चा हो।' गोयल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उभरती अर्थव्यवस्थाएँ पश्चिमी रेटिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रही हैं।

केयरएज नेतृत्व का दृष्टिकोण

केयरएज के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्रुप सीईओ मेहुल पंड्या ने कहा, 'सॉवरेन रेटिंग्स का तीसरा संस्करण देशों के जोखिम का आकलन करने के लिए हमारी पारदर्शी, गहन शोध और भविष्योन्मुखी सोच को दर्शाता है। हमने पूँजी निवेश, बुनियादी ढाँचे का विकास और घरेलू फंडिंग व्यवस्था की मज़बूती जैसे अहम पहलुओं को विशेष महत्त्व दिया है।' उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कार्यप्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित है, लेकिन उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विशिष्ट चुनौतियों और अवसरों को भी ध्यान में रखती है।

केयरएज ग्लोबल की सीईओ रेवती कस्तुरे ने कहा, '2026 का यह संस्करण दिखाता है कि केयरएज ग्लोबल तेज़ी से एक भरोसेमंद वैश्विक रेटिंग एजेंसी के रूप में उभर रही है। हमारी पहचान स्वतंत्र विश्लेषण, पारदर्शी कार्यप्रणाली और उभरते देशों की अर्थव्यवस्थाओं की गहरी समझ के लिए बन रही है।'

लंदन में लॉन्च का रणनीतिक महत्त्व

कस्तुरे ने स्पष्ट किया कि लंदन में इस रिपोर्ट का लॉन्च कंपनी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह ब्रिटेन जैसे प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्रों में निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ अपने संबंध और प्रगाढ़ करना चाहती है। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर रेटिंग एजेंसियों की पारदर्शिता और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रति उनके नज़रिए पर बहस तेज़ हो रही है।

आगे की राह

केयरएज ग्लोबल की इस रिपोर्ट से वैश्विक निवेशकों को देशों के क्रेडिट जोखिम का एक वैकल्पिक और अधिक संतुलित दृष्टिकोण मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह एजेंसी अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखती है, तो यह मूडीज़, एसएंडपी और फिच जैसी स्थापित एजेंसियों के एकाधिकार को चुनौती दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एसएंडपी और फिच जैसी पश्चिमी एजेंसियाँ विकासशील देशों के साथ न्याय करती हैं? भारत खुद कई बार इन एजेंसियों के आकलन से असहमति जता चुका है। लंदन में लॉन्च रणनीतिक रूप से चतुर है — वैश्विक वित्तीय केंद्र में उपस्थिति दर्ज कराना विश्वसनीयता की पहली शर्त है। लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब बड़े संस्थागत निवेशक केयरएज की रेटिंग को अपने निर्णयों में शामिल करने लगें — और वह रास्ता अभी लंबा है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केयरएज ग्लोबल की 'सॉवरेन रेटिंग्स' रिपोर्ट क्या है?
यह केयरएज ग्लोबल द्वारा तैयार की गई एक वार्षिक रिपोर्ट है जो देशों के क्रेडिट जोखिम का स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से आकलन करती है। इसके 2026 के तीसरे संस्करण में 45 देशों की अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण किया गया है, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग 85 प्रतिशत हैं।
पीयूष गोयल ने यह रिपोर्ट कहाँ और कब लॉन्च की?
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह रिपोर्ट 27 जून 2026 को लंदन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में लॉन्च की। लंदन को इसलिए चुना गया क्योंकि यह एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्र है।
इस रिपोर्ट में किन मानकों पर देशों का मूल्यांकन किया गया है?
रिपोर्ट पाँच प्रमुख मानकों पर आधारित है — अर्थव्यवस्था की संरचना, सरकार की वित्तीय स्थिति, विदेशी लेन-देन की मज़बूती, मौद्रिक स्थिरता और सुशासन। इन मानकों के आधार पर विकसित और उभरती दोनों प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं का भविष्योन्मुखी आकलन किया गया है।
केयरएज ग्लोबल की यह रिपोर्ट निवेशकों के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह रिपोर्ट निवेशकों और नीति-निर्माताओं को अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल में बेहतर निर्णय लेने में सहायता करती है। यह मूडीज़ और एसएंडपी जैसी पश्चिमी एजेंसियों के एकाधिकार के विकल्प के रूप में एक स्वतंत्र और उभरती अर्थव्यवस्था-केंद्रित दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
केयरएज ग्लोबल की वैश्विक विस्तार योजना क्या है?
केयरएज ग्लोबल की सीईओ रेवती कस्तुरे के अनुसार, कंपनी लंदन जैसे प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्रों में निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ अपने संबंध मज़बूत करने की योजना पर काम कर रही है। यह लॉन्च उसी रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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