पीओके चुनाव में हिंसा: पीपीपी कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की गोली मारकर हत्या, पीएमएल-एन पर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 28 जुलाई को हुए विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हिंसक झड़पें और धांधली के आरोप हावी रहे — नक्याल में गोलीबारी में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के 35 वर्षीय कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संघीय गठबंधन सहयोगी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पीपीपी ने एक-दूसरे पर चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया।
मुख्य घटनाक्रम
पीपीपी ने एक बयान में आरोप लगाया कि कोटली जिले के नक्याल में वोटिंग के दौरान पीएमएल-एन उम्मीदवार या उनके समर्थकों की ओर से की गई गोलीबारी में मुख्तार यूनुस की जान गई और दो अन्य कार्यकर्ता घायल हुए। पार्टी के अनुसार, 'पीएमएल-एन उम्मीदवारों की ओर से हुई गोलीबारी की घटनाओं में हमारे कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए।'
पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी ने हत्या पर गहरा दुख जताया और अधिकारियों की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा, 'संबंधित अधिकारी कहाँ हैं? चुनाव आयोग क्या कर रहा है?' एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंध के स्थानीय सरकार मंत्री सईद घानी ने भी पीएमएल-एन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।
चुनाव का दायरा और मतदान
पीओके में चुनाव के पहले चरण में भीमबर, मीरपुर और कोटली जिलों की 13 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जिनके लिए करीब 300 उम्मीदवार मैदान में थे। 14 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाताओं वाले इस चरण में पीएमएल-एन, पीपीपी और इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (आईपीपी) प्रमुख दलों के रूप में सामने थे। पीओके सरकार ने मतदान दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर मतदाताओं से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की थी।
सेना की भूमिका पर सवाल
एक अधिकारी ने दावा किया — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी — कि पीओके में चुनावी प्रक्रिया महज दिखावा है, क्योंकि नतीजे पहले ही पाकिस्तानी सेना तय कर चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व में सेना ने यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है कि पाकिस्तान सरकार पीओके के लोगों की माँगों के आगे न झुके। यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में जन-असंतोष लंबे समय से सुलग रहा है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
गौरतलब है कि पीएमएल-एन और पीपीपी — जो केंद्र में एक ही गठबंधन सरकार के सहयोगी हैं — पीओके में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं और एक-दूसरे पर धांधली के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्टों के अनुसार, घानी ने कहा कि पार्टी को ऐसी जानकारी मिली थी जिससे संकेत मिलता है कि गोलीबारी पीएमएल-एन उम्मीदवार या उनके समर्थकों की ओर से हुई — यह आरोप पीएमएल-एन ने नकारा है।
आगे क्या होगा
पहले चरण के नतीजे और शेष चरणों की मतदान प्रक्रिया पर सभी की नज़र है। मुख्तार यूनुस की हत्या की जाँच और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर पीपीपी का दबाव बढ़ने की संभावना है। आलोचकों का कहना है कि बिना स्वतंत्र निगरानी के इन चुनावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न बना रहेगा।