पीओके के कोटली में महिला प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का आरोप, वायरल वीडियो में भागती दिखीं महिलाएं
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के कोटली में 30 जुलाई को एक वीडियो सामने आया, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं को अपनी जान बचाकर भागते हुए देखा जा सकता है। आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रही इन महिलाओं पर गोलियां चलाईं। यह घटना उस व्यापक दमन की कड़ी बताई जा रही है जो पिछले कई हफ्तों से पीओके में जारी है।
कोटली में क्या हुआ
कोटली में बड़ी संख्या में महिला प्रदर्शनकारी एकत्रित हुई थीं और रावलकोट तथा मीरपुर में पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई के विरोध में नारे लगा रही थीं। कथित तौर पर इसी दौरान पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, जिससे भगदड़ मच गई। वायरल वीडियो में महिलाओं को जान बचाकर दौड़ते हुए स्पष्ट देखा जा सकता है।
एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हम अपने भाइयों का साथ देने के लिए बाहर आए हैं। हम उन्हें बताना चाहते हैं कि हम उनके साथ खड़े हैं। जो लोग हम पर गोली चला रहे हैं, मैं उनसे कहना चाहती हूं कि हम किसी चीज से डरने वाले नहीं हैं।'
पिछले तीन दिनों का घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों घायल हुए हैं। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने बुधवार को कहा कि 27 और 28 जुलाई के बीच रावलकोट, मीरपुर और अन्य इलाकों में कथित तौर पर लगभग 40 नागरिक मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हुए और मनमाने तरीके से गिरफ्तार किए गए।
यूकेपीएनपी ने यह भी आरोप लगाया कि 5 जून से अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, सैकड़ों गंभीर रूप से घायल हुए हैं और कई लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया है।
मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप
यूकेपीएनपी ने पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ जरूरत से अधिक या गैरकानूनी बल का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर जन आंदोलन लगातार तेज हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का पालन कराने के लिए दबाव बनाया जाए।
आगे की स्थिति
पीओके में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नजर इस क्षेत्र पर टिकी है और आने वाले दिनों में वैश्विक दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।