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पीओके के कोटली में महिला प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का आरोप, वायरल वीडियो में भागती दिखीं महिलाएं

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पीओके के कोटली में महिला प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का आरोप, वायरल वीडियो में भागती दिखीं महिलाएं

सारांश

पीओके के कोटली में महिला प्रदर्शनकारियों पर कथित फायरिंग का वीडियो वायरल हुआ — यह उस बढ़ते दमन की तस्वीर है जिसमें 5 जून से अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जाने का आरोप है। यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

मुख्य बातें

कोटली (पीओके) में 30 जुलाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस फायरिंग का आरोप; वायरल वीडियो में महिलाएं भागती दिखीं।
पिछले तीन दिनों में पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 40 से अधिक लोगों की मौत और दर्जनों घायल।
यूकेपीएनपी के अनुसार 5 जून से अब तक 100 से अधिक नागरिक मारे गए, सैकड़ों घायल और कई कथित तौर पर जबरन गायब।
27-28 जुलाई के बीच रावलकोट और मीरपुर में भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई की खबर।
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ से तत्काल हस्तक्षेप और स्वतंत्र जांच की मांग की।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के कोटली में 30 जुलाई को एक वीडियो सामने आया, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं को अपनी जान बचाकर भागते हुए देखा जा सकता है। आरोप है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रही इन महिलाओं पर गोलियां चलाईं। यह घटना उस व्यापक दमन की कड़ी बताई जा रही है जो पिछले कई हफ्तों से पीओके में जारी है।

कोटली में क्या हुआ

कोटली में बड़ी संख्या में महिला प्रदर्शनकारी एकत्रित हुई थीं और रावलकोट तथा मीरपुर में पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई के विरोध में नारे लगा रही थीं। कथित तौर पर इसी दौरान पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, जिससे भगदड़ मच गई। वायरल वीडियो में महिलाओं को जान बचाकर दौड़ते हुए स्पष्ट देखा जा सकता है।

एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हम अपने भाइयों का साथ देने के लिए बाहर आए हैं। हम उन्हें बताना चाहते हैं कि हम उनके साथ खड़े हैं। जो लोग हम पर गोली चला रहे हैं, मैं उनसे कहना चाहती हूं कि हम किसी चीज से डरने वाले नहीं हैं।'

पिछले तीन दिनों का घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, पिछले तीन दिनों में पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों घायल हुए हैं। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने बुधवार को कहा कि 27 और 28 जुलाई के बीच रावलकोट, मीरपुर और अन्य इलाकों में कथित तौर पर लगभग 40 नागरिक मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हुए और मनमाने तरीके से गिरफ्तार किए गए।

यूकेपीएनपी ने यह भी आरोप लगाया कि 5 जून से अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, सैकड़ों गंभीर रूप से घायल हुए हैं और कई लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया है।

मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप

यूकेपीएनपी ने पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ जरूरत से अधिक या गैरकानूनी बल का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पीओके में बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर जन आंदोलन लगातार तेज हो रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का पालन कराने के लिए दबाव बनाया जाए।

आगे की स्थिति

पीओके में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नजर इस क्षेत्र पर टिकी है और आने वाले दिनों में वैश्विक दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यही इस संकट की सबसे बड़ी समस्या है: पीओके में स्वतंत्र पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की पहुंच न के बराबर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की 'तत्काल कार्रवाई' की मांगें तब तक कागजी रहेंगी जब तक जमीन पर सत्यापन का कोई ठोस तंत्र नहीं बनता।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटली में महिला प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग का मामला क्या है?
30 जुलाई को पीओके के कोटली में बड़ी संख्या में महिलाएं रावलकोट और मीरपुर में पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर रही थीं। आरोप है कि पुलिस ने इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिसका एक वीडियो वायरल हुआ।
पीओके में पिछले तीन दिनों में कितने लोग मारे गए हैं?
यूकेपीएनपी के अनुसार, 27 और 28 जुलाई के बीच रावलकोट, मीरपुर और अन्य इलाकों में कथित तौर पर लगभग 40 नागरिक मारे गए। संगठन का यह भी आरोप है कि 5 जून से अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, हालांकि ये आंकड़े स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
यूकेपीएनपी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या मांग की है?
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तीन मांगें रखी हैं — नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराना, और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के पालन के लिए दबाव बनाना।
पीओके में यह प्रदर्शन किस बात को लेकर हो रहे हैं?
पीओके में नागरिक बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कोटली में महिलाएं विशेष रूप से रावलकोट और मीरपुर में पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई के विरोध में उतरी थीं और अपने साथी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नारे लगा रही थीं।
क्या पीओके में पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है?
यूकेपीएनपी का कहना है कि शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ जरूरत से अधिक या गैरकानूनी बल का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है। हालांकि, पीओके में स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की पहुंच सीमित होने के कारण इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
राष्ट्र प्रेस
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