3 नवंबर 2026
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पूजा सेठी ने केन पैक्सटन को ललकारा — भारतीय-अमेरिकियों पर बो फ्रेंच की नस्लवादी पोस्ट की निंदा करें

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पूजा सेठी ने केन पैक्सटन को ललकारा — भारतीय-अमेरिकियों पर बो फ्रेंच की नस्लवादी पोस्ट की निंदा करें

सारांश

टेक्सास में चुनाव से एक दिन पहले भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार पूजा सेठी ने रिपब्लिकन केन पैक्सटन को सीधे घेरा — अपने साथी बो फ्रेंच की नस्लवादी पोस्ट की निंदा करें, जिसे 5 करोड़ से ज़्यादा बार देखा गया। जीत पर सेठी टेक्सास विधानमंडल की पहली दक्षिण एशियाई महिला बनेंगी।

मुख्य बातें

पूजा सेठी ने चुनाव से एक दिन पहले 'एक्स' पर केन पैक्सटन को चुनौती दी कि वे बो फ्रेंच की नस्लवादी पोस्ट की सार्वजनिक निंदा करें।
बो फ्रेंच की 13 सितंबर की 'एक्स' पोस्ट को 5 करोड़ 40 लाख से अधिक बार देखा गया, जिसमें दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों पर निशाना साधा गया था।
पैक्सटन ने उसी दिन नस्लवाद की 'सामान्य निंदा' की, लेकिन फ्रेंच का नाम नहीं लिया ।
'एक्स' यूजर वसंत भट्ट ने दावा किया कि पैक्सटन ने 31 अक्टूबर को इरविंग के बीएपीएस मंदिर का दौरा किया — तस्वीरों की पुष्टि लंबित।
सेठी जीतीं तो टेक्सास विधानमंडल की पहली दक्षिण एशियाई महिला बनेंगी; वह ट्रैविस काउंटी डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व अध्यक्ष हैं।
टेक्सास में मंगलवार, 4 नवंबर 2026 को मतदान होगा।

टेक्सास हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 (ऑस्टिन) से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और भारतीय-अमेरिकी नेत्री पूजा सेठी ने रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार केन पैक्सटन को खुली चुनौती दी है कि वे अपने पार्टी सहयोगी बो फ्रेंच की उन पोस्ट्स की सार्वजनिक निंदा करें, जिन्हें व्यापक रूप से भारतीय-अमेरिकियों के विरुद्ध नस्लवादी करार दिया जा रहा है। चुनाव से ठीक एक दिन पहले — 3 नवंबर 2026 को — 'एक्स' पर की गई यह अपील उस वक्त आई है जब टेक्सास में मतदान के घंटे गिने जा रहे हैं।

विवाद की जड़ — फ्रेंच की वायरल पोस्ट

टेक्सास रेलरोड कमीशन के रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने 13 सितंबर को 'एक्स' पर एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के छात्र एक फुटबॉल मैच की जीत का जश्न मना रहे थे — तस्वीर में कई छात्र दक्षिण एशियाई मूल के दिखते थे।

फ्रेंच ने लिखा था, 'मैंने सुना है कि इस साल यूटी का ग्रेजुएशन कुछ ऐसा दिख रहा था। मुझे यकीन नहीं हुआ। साफ है कि समस्या अब किसी की कल्पना से कहीं ज़्यादा गंभीर हो चुकी है।' 'एक्स' के अनुसार इस पोस्ट को 5 करोड़ 40 लाख से अधिक बार देखा गया, जिससे भारतीय-अमेरिकी समुदाय में तीव्र आक्रोश फैल गया।

सेठी का पैक्सटन पर सीधा आरोप

सेठी ने 'एक्स' पर लिखा, 'मैं केन पैक्सटन से उम्मीद करती हूं कि वे भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ बो फ्रेंच के कट्टर हमलों की निंदा करेंगे। या फिर जब उन्हें हमारे वोटों की ज़रूरत होती है, तो उनका यह गुस्सा कहीं गायब हो जाता है?'

उन्होंने 'एक्स' यूजर वसंत भट्ट की एक पोस्ट का भी हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया था कि पैक्सटन ने 31 अक्टूबर को इरविंग स्थित बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर का दौरा किया था। भट्ट ने लिखा था, 'तो जब चुनाव जीतने की बात आती है, तब आप हमारे मंदिरों में जाते हैं, हमारे देवी-देवताओं के सामने झुकते हैं और हमारी पवित्र पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं; जबकि दूसरी तरफ आप ऐसे लोगों के साथ जुड़े रहते हैं और उनका समर्थन करते हैं जो खुलेआम हिंदू-विरोधी और नस्लवादी हैं?' भट्ट ने यह भी बताया कि वे इस दौरे की पुष्टि के लिए तस्वीरें तलाश रहे हैं।

पैक्सटन की प्रतिक्रिया — बिना नाम लिए

फ्रेंच की पोस्ट सामने आने के उसी दिन टेक्सास के अटॉर्नी जनरल पैक्सटन ने पोस्ट किया था, 'मैं हर तरह के नस्लवाद की निंदा करता हूं।' हालांकि उन्होंने अपने बयान में फ्रेंच का नाम नहीं लिया, और इसके बजाय सीनेट प्रतिद्वंद्वी — डेमोक्रेट जेम्स टालारिको — के एक पुराने बयान को उद्धृत किया।

इससे पहले टालारिको ने भी 'एक्स' पर पैक्सटन से पूछा था, 'क्या आप इस खुलेआम नस्लवाद की निंदा करेंगे, या फिर चरमपंथियों के सामने घुटने टेक देंगे?' पैक्सटन के चुनाव अभियान की ओर से सेठी की हालिया पोस्ट पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।

सेठी — एक ऐतिहासिक उम्मीदवारी

सेठी एक वकील हैं और ट्रैविस काउंटी डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं। यदि वे जीतती हैं, तो वे टेक्सास विधानमंडल में पहुँचने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला होंगी — एक ऐतिहासिक उपलब्धि जो इस चुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित बना रही है।

उन्होंने रविवार को अपनी पोस्ट में लिखा, 'ऐसे समय में जब नफरत बढ़ रही है, हमारे पास इतिहास रचने का मौका है। हम डरेंगे नहीं। हमें चुप नहीं कराया जा सकेगा। टेक्सास में नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।'

क्या होगा आगे

टेक्सास में मंगलवार, 4 नवंबर 2026 को मतदान होगा। सेठी बनाम फ्रेंच के बीच नस्लीय टिप्पणी का यह विवाद राज्य में तेज़ी से बढ़ती भारतीय-अमेरिकी आबादी की राजनीतिक हिस्सेदारी के संदर्भ में एक निर्णायक चुनावी मुद्दा बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय चुनावी हथियार तो बनते हैं, पर उनकी सुरक्षा के लिए साफ प्रतिबद्धता से बचा जाता है। सेठी की अपील असल में दो सवाल एक साथ उठाती है — क्या भारतीय-अमेरिकी मतदाता इस चुप्पी को स्वीकार करेंगे, और क्या एक दक्षिण एशियाई महिला की ऐतिहासिक जीत टेक्सास की बदलती जनसांख्यिकी का प्रतिबिंब बन सकती है। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज़ एक सोशल मीडिया विवाद की तरह पेश कर रही है, लेकिन असल मुद्दा यह है कि अमेरिका के सबसे बड़े राज्यों में से एक में भारतीय मूल के नागरिकों की राजनीतिक पहचान और जवाबदेही की माँग अब मतपेटी तक पहुँच चुकी है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूजा सेठी ने केन पैक्सटन को क्या चुनौती दी है?
सेठी ने पैक्सटन से मांग की है कि वे अपने पार्टी सहयोगी बो फ्रेंच की उस 'एक्स' पोस्ट की सार्वजनिक निंदा करें, जिसमें दक्षिण एशियाई मूल के यूटी छात्रों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पैक्सटन समुदाय के वोट चाहते हैं, लेकिन नस्लवादी टिप्पणियों पर चुप हैं।
बो फ्रेंच की विवादित पोस्ट में क्या था?
टेक्सास रेलरोड कमीशन के रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने 13 सितंबर को 'एक्स' पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के छात्रों की एक तस्वीर शेयर की, जिनमें कई दक्षिण एशियाई मूल के थे। उन्होंने लिखा कि 'समस्या कल्पना से कहीं ज़्यादा गंभीर है' — इस पोस्ट को 5 करोड़ 40 लाख से अधिक बार देखा गया।
पैक्सटन ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
पैक्सटन ने उसी दिन 'हर तरह के नस्लवाद की निंदा' की, लेकिन अपने बयान में फ्रेंच का नाम नहीं लिया और इसके बजाय डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वी जेम्स टालारिको के एक पुराने बयान का हवाला दिया। सेठी की हालिया पोस्ट पर पैक्सटन अभियान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
पूजा सेठी की जीत क्यों ऐतिहासिक होगी?
यदि सेठी टेक्सास हाउस डिस्ट्रिक्ट 47 से जीतती हैं, तो वे टेक्सास विधानमंडल में पहुँचने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बनेंगी। वह एक वकील हैं और ट्रैविस काउंटी डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व अध्यक्ष हैं।
टेक्सास चुनाव में मतदान कब होगा?
टेक्सास में मंगलवार, 4 नवंबर 2026 को मतदान होगा। सेठी-पैक्सटन-फ्रेंच से जुड़ा यह विवाद चुनाव के अंतिम घंटों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच प्रमुख मुद्दा बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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