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इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो बोले — मोदी की कई नीतियाँ अपनाईं, मेरे DNA में भी है भारतीय मूल

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इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो बोले — मोदी की कई नीतियाँ अपनाईं, मेरे DNA में भी है भारतीय मूल

सारांश

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने जकार्ता में खुलकर कहा — वे PM मोदी के बड़े प्रशंसक हैं और उनकी कई नीतियाँ इंडोनेशिया में अपना चुके हैं। साथ ही DNA जाँच में भारतीय मूल की पुष्टि और इंडोनेशियाई भाषा में 50% संस्कृत शब्दों का जिक्र कर उन्होंने दोनों देशों की सांस्कृतिक जड़ों को उजागर किया।

मुख्य बातें

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने 7 जुलाई 2026 को जकार्ता में PM मोदी की नीतियाँ अपनाने की खुलकर पुष्टि की।
राष्ट्रपति प्रबोवो ने बताया कि DNA जीनोम सीक्वेंसिंग जाँच में उनके भीतर भारतीय मूल की पुष्टि हुई।
इंडोनेशिया, भारत के चुनाव आयोग (ECI) से शांतिपूर्ण चुनाव संचालन के तरीके सीख रहा है।
1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे; प्रबोवो 2025 के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि रहे।
इंडोनेशियाई भाषा के लगभग 50% शब्द संस्कृत से आए हैं, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
प्रबोवो ने खुद बताया कि उन्होंने पाँच आम चुनाव लड़े और चार में हार मिली — इसे उन्होंने अपनी 'गैर-पेशेवर राजनेता' छवि का प्रमाण बताया।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने 7 जुलाई 2026 को जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए खुलकर स्वीकार किया कि वे मोदी की नीतियों के गहरे प्रशंसक हैं और उनमें से कई नीतियाँ उन्होंने इंडोनेशिया में भी लागू की हैं। राष्ट्रपति प्रबोवो ने यह भी बताया कि डीएनए जीनोम सीक्वेंसिंग जाँच में उनके भीतर भारतीय मूल की पुष्टि हुई है।

मोदी की नीतियों की खुली तारीफ

राष्ट्रपति प्रबोवो ने अपने संबोधन में कहा, "मैं नरेंद्र मोदी जी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। मैं सिर्फ अच्छी बातें करने के लिए यह नहीं कह रहा — मेरे करीबी सहयोगी भी इसकी पुष्टि करेंगे।" उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति बनने से पहले भी वे प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का गहराई से अध्ययन करते थे। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में जोड़ा, "उन नीतियों पर कोई कॉपीराइट नहीं है, इसलिए मैंने उनमें से कई यहाँ भी अपनाईं — और प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी उदारता से मुझे ऐसा करने दिया, इसलिए अब मुझ पर कोई मुकदमा भी नहीं कर सकता।"

गौरतलब है कि प्रबोवो ने स्वयं बताया कि उन्होंने पाँच आम चुनाव लड़े और उनमें से चार में हार का सामना किया — यह जिक्र उन्होंने यह बताने के लिए किया कि वे 'पेशेवर राजनेता' नहीं हैं और उनकी प्रशंसा स्वाभाविक है।

DNA में भारतीय मूल और सांस्कृतिक जुड़ाव

राष्ट्रपति प्रबोवो ने बताया कि भारत की राजकीय यात्रा से ठीक पहले उन्होंने डीएनए जीनोम सीक्वेंसिंग जाँच कराई थी, जिसमें उनके डीएनए में भारतीय मूल की पुष्टि हुई। उन्होंने कहा, "यह बिल्कुल सच है। शायद इसी वजह से जब भी मैं भारतीय संगीत सुनता हूँ, मेरा शरीर अपने आप थिरकने लगता है।" इस बात पर उपस्थित लोगों ने जोरदार तालियाँ बजाईं।

उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि उनकी कैबिनेट के अधिकतर मंत्रियों के डीएनए में भी संभवतः भारतीय मूल होगा, क्योंकि उनके कई मंत्री भारतीय गाने बहुत अच्छी तरह गाते हैं और नृत्य के प्रति भी उनका विशेष लगाव है।

लोकतंत्र और चुनाव आयोग से सीख

राष्ट्रपति प्रबोवो ने इंडोनेशिया और भारत को "दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश" बताया और कहा कि इंडोनेशिया, भारत के चुनाव आयोग (ECI) से शांतिपूर्ण चुनाव संचालन के मामले में बहुत कुछ सीख रहा है। उन्होंने कहा, "भारत में 1.4 अरब लोग हैं, कई जातीय समूह और भाषाएँ हैं — ठीक हमारी तरह। इसके बावजूद दशकों से यहाँ शांतिपूर्ण चुनाव और सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण होता रहा है। यह वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है।"

उन्होंने लोकतंत्र की चुनौतियों को भी स्वीकार किया — "लोकतंत्र आसान रास्ता नहीं है। कई उलझनें और मुश्किलें आती हैं, लेकिन न्याय, उम्मीद और सबको साथ लेकर चलने के लिए यही सबसे अच्छा तरीका है।"

ऐतिहासिक रिश्ते और संस्कृत का जुड़ाव

राष्ट्रपति प्रबोवो ने 2025 के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने को भी याद किया। उन्होंने बताया कि 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे — यह ऐतिहासिक कड़ी दोनों देशों के गहरे रिश्तों की गवाह है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इंडोनेशियाई भाषा के लगभग 50 प्रतिशत शब्द संस्कृत से आए हैं और कई नागरिकों के नाम भी संस्कृत मूल के हैं। उनके अनुसार, "सैकड़ों वर्षों से भारतीय सभ्यता का हमारी सभ्यता और संस्कृति पर गहरा प्रभाव रहा है — यही वजह है कि दोनों देशों के बीच इतनी नजदीकी है।"

आगे की राह

यह संबोधन प्रधानमंत्री मोदी की जकार्ता राजकीय यात्रा के दौरान हुआ, जो भारत-इंडोनेशिया द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग के विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'नीतियाँ कॉपी करने' की बात को विशिष्ट नीतिगत क्षेत्रों से जोड़े बिना — जैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण या खाद्य सुरक्षा — यह आकलन करना कठिन है कि इंडोनेशिया में इन नीतियों के परिणाम कैसे रहे। सांस्कृतिक निकटता और DNA का जिक्र राजनयिक माहौल को गर्म करता है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि दोनों देश व्यापार, रक्षा और तकनीक में इस सद्भावना को ठोस समझौतों में कितना बदल पाते हैं।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो ने PM मोदी की कौन-सी नीतियाँ अपनाने की बात कही?
राष्ट्रपति प्रबोवो ने किसी एक नीति का नाम लिए बिना कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति बनने से पहले ही मोदी सरकार की नीतियों का गहन अध्ययन किया था और उनमें से कई इंडोनेशिया में भी लागू की हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन नीतियों पर कोई कॉपीराइट नहीं है।
प्रबोवो सुबियांतो के DNA में भारतीय मूल कैसे पता चला?
राष्ट्रपति प्रबोवो के अनुसार, भारत की राजकीय यात्रा से ठीक पहले उन्होंने DNA जीनोम सीक्वेंसिंग जाँच कराई थी, जिसमें उनके भीतर भारतीय मूल की पुष्टि हुई। उन्होंने इसे अपने भारतीय संगीत और संस्कृति के प्रति स्वाभाविक लगाव की वजह बताया।
भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक संबंध कितने पुराने हैं?
दोनों देशों के संबंध दशकों पुराने हैं। 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे। राष्ट्रपति प्रबोवो स्वयं 2025 के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।
इंडोनेशिया भारत के चुनाव आयोग से क्या सीख रहा है?
राष्ट्रपति प्रबोवो के अनुसार, इंडोनेशिया भारत के चुनाव आयोग (ECI) से विविध भाषाओं और जातीय समूहों वाले बड़े देश में शांतिपूर्ण चुनाव कराने और सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के तरीके सीख रहा है। उन्होंने इसे भारत की 'बड़ी उपलब्धि' बताया।
इंडोनेशियाई भाषा में संस्कृत के कितने शब्द हैं?
राष्ट्रपति प्रबोवो के अनुसार, इंडोनेशियाई भाषा के लगभग 50 प्रतिशत शब्द संस्कृत से आए हैं। उन्होंने इसे भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रमाण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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