पाकिस्तान 2025 ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में शीर्ष पर, TTP-BLA हमलों में 73% की उछाल
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति 2025 में अभूतपूर्व रूप से बिगड़ी है। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) के आंशिक आंकड़ों के अनुसार, मई के पहले 17 दिनों में ही आतंक से जुड़ी 57 हिंसक घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें सुरक्षाबलों, आतंकियों और आम नागरिकों सहित 200 लोगों की जान गई। इसी पृष्ठभूमि में इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस द्वारा प्रकाशित 2025 ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान पहली बार शीर्ष स्थान पर पहुँच गया है।
खैबर पख्तूनख्वा: TTP का पुनरुत्थान और रिकॉर्ड मौतें
खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के दोबारा सिर उठाने से सर्वाधिक प्रभावित है। SATP के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में यहाँ 545 घटनाओं में 2,359 लोगों की मौत हुई — जो 2009 के बाद किसी एक वर्ष में सबसे अधिक है। तुलनात्मक रूप से, 2024 में 487 घटनाओं में 1,363 मौतें दर्ज हुई थीं। यह वृद्धि 73.07 प्रतिशत की है, जो प्रांत में TTP की बढ़ती परिचालन क्षमता को दर्शाती है।
गौरतलब है कि TTP ने अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अपने ठिकानों को मजबूत किया है और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर हमलों की आवृत्ति तेज़ की है।
बलूचिस्तान: 98% की उछाल, जबरन गुमशुदगी पर उबाल
बलूचिस्तान हिंसा के मामले में दूसरा सबसे पीड़ित प्रांत रहा। 2025 में यहाँ 482 आतंकी वारदातें हुईं और 1,534 लोगों की मौत हुई, जबकि 2024 में 250 घटनाओं में 774 मौतें दर्ज की गई थीं — यानी 98.19 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि। रिपोर्टों के अनुसार, यह बिगड़ती स्थिति मुख्य रूप से बलूच राष्ट्रवादी समूहों की उस नाराज़गी का परिणाम है जो जबरन गुमशुदगी और कथित न्यायिक हत्याओं को लेकर वर्षों से उबल रही है।
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने सुरक्षाबलों और बुनियादी ढाँचे पर हमलों की जिम्मेदारी ली है। आलोचकों का कहना है कि इस्लामाबाद की सैन्य-केंद्रित नीति ने राजनीतिक समाधान की राह को और संकरा किया है।
अफगानिस्तान सीमा पर दोहरी हिंसा
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में दो अलग-अलग किस्म की हिंसा एक साथ जारी है। एक ओर घुसपैठिए उग्रवादी सुरक्षा चौकियों को निशाना बना रहे हैं, तो दूसरी ओर सीमा पर बाड़बंदी और ढाँचागत निर्माण को लेकर दोनों देशों की सेनाओं के बीच गोलीबारी की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब काबुल और इस्लामाबाद के राजनयिक संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद: 2013 के बाद सबसे ऊँचा स्तर
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में आतंकवाद से होने वाली मौतें 2013 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं। 2023 में 1,045 आतंकी वारदातें रिपोर्ट हुई थीं जिनमें 1,139 लोगों की जान गई थी। बढ़ती उग्रवादी हिंसा, सीमा पार संघर्षों में वृद्धि और सशस्त्र समूहों की बढ़ती क्षमता को देखते हुए विश्लेषक आने वाले समय में स्थिति के और बिगड़ने की आशंका जता रहे हैं।
आगे क्या
पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान पर एक साथ कई मोर्चों — TTP, BLA और अफगान सीमा — पर दबाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बलूचिस्तान में राजनीतिक शिकायतों का समाधान और अफगानिस्तान के साथ कूटनीतिक संवाद नहीं होता, सैन्य अभियान अकेले स्थायी स्थिरता नहीं ला सकते।