खैबर पख्तूनख्वा में शैक्षणिक संस्थानों पर आतंकी हमले: 2026 में अब तक 11 घटनाएँ, 13 की मौत
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इस साल शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमलों में खतरनाक उछाल आया है। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) के 14 जून 2026 तक के आंशिक आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक 11 हमले दर्ज किए गए हैं जिनमें 13 लोगों की जान जा चुकी है। यह आँकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चिंताजनक रूप से अधिक है।
पिछले वर्ष से कितनी बढ़ी हिंसा
'यूरेशिया रिव्यू' में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, 2025 में इसी अवधि के दौरान खैबर पख्तूनख्वा में शैक्षणिक संस्थानों पर केवल एक हमला दर्ज हुआ था, जिसमें तीन बच्चे घायल हुए थे। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2025 के पूरे वर्ष में ऐसी 11 घटनाएँ हुई थीं और उनमें कोई मौत नहीं हुई थी — केवल तीन लोग घायल हुए थे। इस प्रकार 2026 में महज छह महीनों में ही पूरे 2025 के बराबर घटनाएँ दर्ज हो चुकी हैं और मृत्यु संख्या में भी तेज़ वृद्धि हुई है।
दो दशकों का भयावह इतिहास
इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट के रिसर्च एसोसिएट तुषार रंजन मोहंती ने 'यूरेशिया रिव्यू' में लिखा, 'वर्ष 2006 से अब तक शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाकर कम से कम 557 हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 321 लोगों की मौत हुई और 208 लोग घायल हुए हैं। हालाँकि, खैबर पख्तूनख्वा के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में मीडिया की पहुँच सीमित है और सरकारी एजेंसियों से भी जानकारी लगातार नहीं मिलती, इसलिए असल संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।' गौरतलब है कि पहला दर्ज हमला 25 दिसंबर 2006 को कोहाट जिले के दर्रा आदमखेल इलाके में एक लड़कियों के स्कूल पर हुआ था, जिसमें बम धमाके से स्कूल के तीन कमरे पूरी तरह नष्ट हो गए थे। उस हमले से पहले कट्टरपंथियों ने कई मिडिल और हाई स्कूलों को धमकी भरे पत्र भेजे थे, जिनमें लड़कियों की पढ़ाई कक्षा चार से आगे बंद करने की माँग की गई थी।
सबसे घातक हमला: पेशावर का एपीएस नरसंहार
इस श्रृंखला का सबसे भीषण हमला 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल (APS) पर हुआ था। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के सात आतंकियों ने स्कूल पर धावा बोला और आठ घंटे से अधिक चले इस हमले में कम से कम 135 छात्रों, 10 स्कूल कर्मचारियों (जिनमें प्रिंसिपल भी शामिल थीं) और तीन सैनिकों की मौत हुई। इसके अलावा 121 लोग घायल हुए, जिनमें 118 छात्र और तीन स्टाफ सदस्य थे। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अंततः सभी सात हमलावरों को मार गिराया।
मई 2026 में सुरक्षा स्थिति और बिगड़ी
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) ने अपनी मासिक सुरक्षा रिपोर्ट में बताया कि मई 2026 में पाकिस्तान में सुरक्षा हालात और खराब हुए हैं। विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकी हमलों, मौतों, आत्मघाती हमलों और अपहरण की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय की कमी के बाद मई में हमलों में फिर से तेज़ी आई, जो यह संकेत देती है कि सुरक्षा की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
आगे क्या
आँकड़ों के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा में स्कूलों और शिक्षण संस्थानों पर हमलों का यह सिलसिला दो दशकों से जारी है और 2026 में इसकी रफ्तार तेज़ हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मीडिया पहुँच और पारदर्शी सरकारी आँकड़ों के अभाव में वास्तविक स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। शिक्षा के अधिकार और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें पाकिस्तान की सुरक्षा नीति पर टिकी हैं।