3 अगस्त 2026
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खैबर पख्तूनख्वा में शैक्षणिक संस्थानों पर आतंकी हमले: 2026 में अब तक 11 घटनाएँ, 13 की मौत

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खैबर पख्तूनख्वा में शैक्षणिक संस्थानों पर आतंकी हमले: 2026 में अब तक 11 घटनाएँ, 13 की मौत

सारांश

2026 में खैबर पख्तूनख्वा में स्कूलों पर हमले सिर्फ आँकड़े नहीं हैं — ये एक बढ़ते संकट की चेतावनी हैं। छह महीनों में 11 हमले और 13 मौतें, जबकि 2025 की पूरी साल में एक भी मौत नहीं हुई थी। 2006 से अब तक 557 हमलों में 321 की मौत — और असली संख्या इससे भी अधिक हो सकती है।

मुख्य बातें

खैबर पख्तूनख्वा में 2026 में अब तक शैक्षणिक संस्थानों पर 11 हमले , जिनमें 13 लोगों की मौत — SATP के 14 जून तक के आँकड़ों के अनुसार।
2025 की इसी अवधि में केवल एक हमला हुआ था जिसमें तीन बच्चे घायल हुए थे; पूरे 2025 में कोई मौत नहीं।
2006 से अब तक शैक्षणिक संस्थानों पर कम से कम 557 हमले , 321 मौतें और 208 घायल — तुषार रंजन मोहंती के अनुसार असल संख्या और अधिक हो सकती है।
सबसे घातक हमला 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल (APS) पर हुआ था जिसमें 135 छात्रों सहित कम से कम 148 लोगों की मौत हुई थी।
PICSS की रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हमलों में फिर से तेज़ी आई है।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इस साल शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमलों में खतरनाक उछाल आया है। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) के 14 जून 2026 तक के आंशिक आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक 11 हमले दर्ज किए गए हैं जिनमें 13 लोगों की जान जा चुकी है। यह आँकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चिंताजनक रूप से अधिक है।

पिछले वर्ष से कितनी बढ़ी हिंसा

'यूरेशिया रिव्यू' में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, 2025 में इसी अवधि के दौरान खैबर पख्तूनख्वा में शैक्षणिक संस्थानों पर केवल एक हमला दर्ज हुआ था, जिसमें तीन बच्चे घायल हुए थे। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2025 के पूरे वर्ष में ऐसी 11 घटनाएँ हुई थीं और उनमें कोई मौत नहीं हुई थी — केवल तीन लोग घायल हुए थे। इस प्रकार 2026 में महज छह महीनों में ही पूरे 2025 के बराबर घटनाएँ दर्ज हो चुकी हैं और मृत्यु संख्या में भी तेज़ वृद्धि हुई है।

दो दशकों का भयावह इतिहास

इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट के रिसर्च एसोसिएट तुषार रंजन मोहंती ने 'यूरेशिया रिव्यू' में लिखा, 'वर्ष 2006 से अब तक शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाकर कम से कम 557 हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 321 लोगों की मौत हुई और 208 लोग घायल हुए हैं। हालाँकि, खैबर पख्तूनख्वा के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में मीडिया की पहुँच सीमित है और सरकारी एजेंसियों से भी जानकारी लगातार नहीं मिलती, इसलिए असल संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।' गौरतलब है कि पहला दर्ज हमला 25 दिसंबर 2006 को कोहाट जिले के दर्रा आदमखेल इलाके में एक लड़कियों के स्कूल पर हुआ था, जिसमें बम धमाके से स्कूल के तीन कमरे पूरी तरह नष्ट हो गए थे। उस हमले से पहले कट्टरपंथियों ने कई मिडिल और हाई स्कूलों को धमकी भरे पत्र भेजे थे, जिनमें लड़कियों की पढ़ाई कक्षा चार से आगे बंद करने की माँग की गई थी।

सबसे घातक हमला: पेशावर का एपीएस नरसंहार

इस श्रृंखला का सबसे भीषण हमला 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल (APS) पर हुआ था। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के सात आतंकियों ने स्कूल पर धावा बोला और आठ घंटे से अधिक चले इस हमले में कम से कम 135 छात्रों, 10 स्कूल कर्मचारियों (जिनमें प्रिंसिपल भी शामिल थीं) और तीन सैनिकों की मौत हुई। इसके अलावा 121 लोग घायल हुए, जिनमें 118 छात्र और तीन स्टाफ सदस्य थे। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अंततः सभी सात हमलावरों को मार गिराया।

मई 2026 में सुरक्षा स्थिति और बिगड़ी

पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) ने अपनी मासिक सुरक्षा रिपोर्ट में बताया कि मई 2026 में पाकिस्तान में सुरक्षा हालात और खराब हुए हैं। विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकी हमलों, मौतों, आत्मघाती हमलों और अपहरण की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय की कमी के बाद मई में हमलों में फिर से तेज़ी आई, जो यह संकेत देती है कि सुरक्षा की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

आगे क्या

आँकड़ों के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा में स्कूलों और शिक्षण संस्थानों पर हमलों का यह सिलसिला दो दशकों से जारी है और 2026 में इसकी रफ्तार तेज़ हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मीडिया पहुँच और पारदर्शी सरकारी आँकड़ों के अभाव में वास्तविक स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। शिक्षा के अधिकार और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें पाकिस्तान की सुरक्षा नीति पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है — जिसका लक्ष्य शिक्षा, विशेषकर लड़कियों की शिक्षा, को हथियार बनाकर समाज को डराना है। 2006 से 557 दर्ज हमलों के बावजूद पाकिस्तानी राज्य का जवाब अपर्याप्त रहा है, और मीडिया पहुँच पर प्रतिबंध यह सुनिश्चित करता है कि असली तस्वीर दुनिया के सामने न आए। 2025 की पूरी साल की तुलना में 2026 के छह महीनों में ही बराबर घटनाएँ और कहीं अधिक मौतें — यह प्रवृत्ति बताती है कि TTP और उससे जुड़े संगठन अब अधिक घातक और केंद्रित होते जा रहे हैं। जब तक पारदर्शी आँकड़े, स्वतंत्र मीडिया पहुँच और जवाबदेह सुरक्षा नीति नहीं आती, यह संकट और गहरा होता रहेगा।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में खैबर पख्तूनख्वा में शैक्षणिक संस्थानों पर कितने हमले हुए हैं?
SATP के 14 जून 2026 तक के आँकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक 11 हमले दर्ज हुए हैं जिनमें 13 लोगों की मौत हुई है। यह 2025 की इसी अवधि की तुलना में बड़ी वृद्धि है जब केवल एक हमला हुआ था।
2006 से खैबर पख्तूनख्वा में स्कूलों पर कुल कितने हमले हुए हैं?
इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट के अनुसार 2006 से अब तक कम से कम 557 हमले दर्ज किए गए हैं जिनमें 321 मौतें और 208 घायल हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मीडिया पहुँच की सीमाओं के कारण वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुआ हमला क्या था?
दिसंबर 2014 में TTP के सात आतंकियों ने पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला किया था जो आठ घंटे से अधिक चला। इसमें कम से कम 135 छात्रों, 10 स्कूल कर्मचारियों और तीन सैनिकों की मौत हुई तथा 121 लोग घायल हुए — यह शैक्षणिक संस्थानों पर अब तक का सबसे घातक हमला है।
पाकिस्तान में मई 2026 में सुरक्षा स्थिति कैसी रही?
PICSS की मासिक सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति बिगड़ी है, विशेषकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में। हमलों, मौतों, आत्मघाती हमलों और अपहरण की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई।
खैबर पख्तूनख्वा में स्कूलों पर पहला दर्ज हमला कब और कहाँ हुआ था?
पहला दर्ज हमला 25 दिसंबर 2006 को कोहाट जिले के दर्रा आदमखेल इलाके में एक लड़कियों के स्कूल पर हुआ था। बम धमाके में स्कूल के तीन कमरे नष्ट हो गए थे और इससे पहले कट्टरपंथियों ने कई स्कूलों को लड़कियों की पढ़ाई बंद करने की धमकी दी थी।
राष्ट्र प्रेस
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