9 अगस्त 2026
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रूस-भारत रेलवे कॉरिडोर: हिंद महासागर तक जमीनी पहुँच के लिए मॉस्को ने संभावनाएँ तलाशनी शुरू कीं

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रूस-भारत रेलवे कॉरिडोर: हिंद महासागर तक जमीनी पहुँच के लिए मॉस्को ने संभावनाएँ तलाशनी शुरू कीं

सारांश

रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने भारत तक जमीनी रेल संपर्क की संभावना का खुलासा किया है — होर्मुज और बॉस्फोरस जैसे संवेदनशील जलमार्गों पर निर्भरता घटाने की रणनीति के तहत। प्रस्तावित मार्ग तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर गुज़रेगा, लेकिन अभी यह केवल प्रारंभिक विचार-विमर्श के स्तर पर है।

मुख्य बातें

रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने 9 अगस्त 2026 को भारत तक जमीनी रेलवे कॉरिडोर की संभावना तलाशने की बात कही।
प्रस्तावित मार्ग तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होते हुए भारत तक जाएगा।
मॉस्को का लक्ष्य बॉस्फोरस और होर्मुज स्ट्रेट जैसे समुद्री मार्गों पर निर्भरता घटाना है।
होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल व्यापार का 25% और एलएनजी की 20% खेप गुज़रती है।
यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है — कोई मार्ग, सेवा या समयसीमा तय नहीं।

रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने 9 अगस्त 2026 को खुलासा किया कि मॉस्को एक ऐसे रेलवे कॉरिडोर की संभावना तलाश रहा है जो रूस को हिंद महासागर तक सीधी जमीनी पहुँच दे सके और भारत से उसे जोड़ सके। यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और इसके तहत कोई मार्ग, यात्री सेवा, टिकट दर या समयसीमा अभी निर्धारित नहीं की गई है।

प्रस्तावित मार्ग और देश

खुसनुलिन के अनुसार, संभावित रेलवे कॉरिडोर रूस से तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत तक जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस ऐसे किसी भी मार्ग पर विचार करने के लिए तैयार है जो भारत तक पहुँच सुनिश्चित करे।

इस मार्ग में कई संप्रभु देश शामिल हैं, जिसके कारण ट्रांजिट अधिकार, सुरक्षा व्यवस्था और सीमा पार आवाजाही के समन्वय जैसी जटिल कूटनीतिक चुनौतियाँ सामने आएंगी। साथ ही, बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे के विकास की भी आवश्यकता होगी।

रणनीतिक पृष्ठभूमि: समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करना

खुसनुलिन ने रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस को दिए साक्षात्कार में कहा कि मॉस्को को प्रमुख समुद्री मार्गों पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक परिवहन गलियारों की जाँच करनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से बॉस्फोरस और होर्मुज स्ट्रेट का उल्लेख किया।

गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत और एलएनजी की करीब 20 प्रतिशत खेप वहन करता है — यानी यह दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापार बिंदुओं में से एक है। इन जलमार्गों पर किसी भी भू-राजनीतिक व्यवधान की स्थिति में रूस की आपूर्ति श्रृंखला गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

भारत और मध्य एशिया के लिए संभावित लाभ

यदि यह कॉरिडोर भविष्य में साकार होता है, तो भारत को रूस और मध्य एशिया के देशों के साथ कनेक्टिविटी के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे व्यापार, लोगों की आवाजाही और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत पहले से ही अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के तहत ईरान के रास्ते रूस और मध्य एशिया से जुड़ने की दिशा में काम कर रहा है। रूस का यह नया प्रस्ताव उसी व्यापक रणनीति का विस्तार माना जा सकता है।

चुनौतियाँ और सीमाएँ

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रस्ताव की राह में कई बाधाएँ हैं। अफगानिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता, पाकिस्तान के साथ भारत के तनावपूर्ण संबंध और ईरान पर पश्चिमी प्रतिबंध — ये सभी कारक इस कॉरिडोर के व्यावहारिक क्रियान्वयन को जटिल बनाते हैं। खुसनुलिन ने स्वयं स्वीकार किया कि यह अभी केवल संभावनाओं की जाँच का चरण है।

आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित देश राजनयिक और तकनीकी स्तर पर कितनी तेज़ी से समन्वय स्थापित कर पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक धरातल पर अत्यंत जटिल है — अफगानिस्तान की अस्थिरता, पाकिस्तान-भारत तनाव और ईरान पर पश्चिमी प्रतिबंध इसकी राह में बड़ी बाधाएँ हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि भारत पहले से INSTC के तहत ईरान-रूस मार्ग पर काम कर रहा है, इसलिए नया प्रस्ताव पूरक है, प्रतिस्पर्धी नहीं। मुख्यधारा की कवरेज इस तथ्य को नज़रअंदाज़ करती है कि इस मार्ग में पाकिस्तान की भागीदारी भारत के लिए कूटनीतिक रूप से संवेदनशील है — और जब तक नई दिल्ली की सहमति स्पष्ट नहीं होती, यह प्रस्ताव एकतरफा रूसी इच्छा से अधिक कुछ नहीं।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूस-भारत रेलवे कॉरिडोर प्रस्ताव क्या है?
रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने एक ऐसे रेलवे मार्ग की संभावना तलाशने की बात कही है जो रूस को तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत से जोड़े। यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और कोई आधिकारिक समझौता या समयसीमा तय नहीं हुई है।
रूस यह रेलवे कॉरिडोर क्यों बनाना चाहता है?
रूस बॉस्फोरस और होर्मुज स्ट्रेट जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत और एलएनजी की करीब 20 प्रतिशत खेप गुज़रती है, जिससे किसी भी व्यवधान की स्थिति में रूस की आपूर्ति श्रृंखला खतरे में पड़ सकती है।
इस प्रस्तावित मार्ग में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
खुसनुलिन के अनुसार, संभावित मार्ग रूस से तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत तक जाएगा। इन सभी देशों की भागीदारी के लिए बड़े पैमाने पर कूटनीतिक समन्वय आवश्यक होगा।
भारत के लिए इस कॉरिडोर का क्या महत्व है?
यदि यह कॉरिडोर साकार होता है, तो भारत को रूस और मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार, लोगों की आवाजाही और पर्यटन में नए अवसर मिल सकते हैं। हालाँकि, पाकिस्तान की भागीदारी और अफगानिस्तान की अस्थिरता इसे भारत के दृष्टिकोण से कूटनीतिक रूप से संवेदनशील बनाती है।
क्या यह कॉरिडोर जल्द बन सकता है?
फिलहाल यह प्रस्ताव केवल संभावनाओं की जाँच के स्तर पर है। अभी तक कोई मार्ग, यात्री सेवा, टिकट दर या निर्माण की शुरुआत की तारीख तय नहीं की गई है। कई देशों की सहमति, बुनियादी ढाँचे का विकास और ट्रांजिट समझौते इसे दीर्घकालिक परियोजना बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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