रूसी सैन्य विमानों की दक्षिण कोरिया के KADIZ में घुसपैठ, सियोल ने लड़ाकू विमान तैनात किए
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने बुधवार को जानकारी दी कि कई रूसी सैन्य विमान मंगलवार को देश के पूर्वी समुद्री क्षेत्र के ऊपर कोरियन एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (KADIZ) में दाखिल हुए और कुछ समय बाद वापस लौट गए। रक्षा विभाग के बयान के अनुसार, इस घुसपैठ की भनक लगते ही दक्षिण कोरियाई वायुसेना ने तत्काल लड़ाकू विमान तैनात कर दिए।
घटनाक्रम: कहाँ और कैसे हुई घुसपैठ
JCS के बयान के मुताबिक, रूसी विमान दक्षिण कोरिया के सबसे पूर्वी द्वीप डोकडो और समीपवर्ती उल्लुंगदो द्वीप के आसपास KADIZ में प्रवेश कर गए। दक्षिण कोरियाई सेना ने विमानों की गतिविधि को पहले ही चिह्नित कर लिया था और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए अपने लड़ाकू विमान हवा में भेज दिए।
हालाँकि, सेना ने स्पष्ट किया कि रूसी विमानों ने दक्षिण कोरिया के वास्तविक संप्रभु हवाई क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया। गौरतलब है कि KADIZ किसी देश का संप्रभु हवाई क्षेत्र नहीं होता — यह एक स्व-घोषित पहचान क्षेत्र है, जिसमें प्रवेश करने वाले विदेशी विमानों से अपनी पहचान बताने की अपेक्षा की जाती है, ताकि अनजाने टकराव की संभावना कम हो सके।
क्षेत्रीय सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच त्रिपक्षीय सैन्य सहयोग को नई गति दी जा रही है। अमेरिका ने हाल ही में दक्षिण कोरिया और जापान के साथ मिलकर 'फ्रीडम एज' त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास की तैयारियों की पुष्टि की है।
यह ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष की पृष्ठभूमि में पूर्वी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचे स्तर पर है और उत्तर कोरिया के साथ रूस के बढ़ते सैन्य संबंधों पर भी सियोल की नज़र बनी हुई है।
पिछली घटनाओं का इतिहास
यह कोई पहली बार नहीं है। जून 2026 में भी करीब 10 चीनी और रूसी सैन्य विमान KADIZ में दाखिल हुए थे, जिसके बाद सियोल ने बीजिंग और मॉस्को के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इससे पहले दिसंबर 2025 में चीन और रूस के नौ सैन्य विमान इस क्षेत्र में प्रवेश कर चुके थे।
2019 से यह एक आवर्ती पैटर्न बन चुका है — दोनों देश संयुक्त अभ्यास के दौरान बिना किसी पूर्व सूचना के वर्ष में एक या दो बार अपने सैन्य विमान KADIZ में भेजते रहे हैं।
दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया और आगे की राह
दक्षिण कोरियाई सेना ने इस बार भी त्वरित प्रतिक्रिया दी और स्थिति को नियंत्रण में रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी विमानों की यह गतिविधि अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान के बढ़ते सैन्य गठजोड़ के विरुद्ध एक संकेतात्मक कदम हो सकती है। आने वाले समय में सियोल की कूटनीतिक प्रतिक्रिया और 'फ्रीडम एज' अभ्यास की प्रगति इस क्षेत्रीय समीकरण को और स्पष्ट करेगी।