दक्षिण कोरिया का KADIZ उल्लंघन पर कड़ा विरोध: चीन-रूस के 10 सैन्य विमानों की घुसपैठ
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने 28 जून 2026 को सोल स्थित चीनी और रूसी दूतावासों के सैन्य अधिकारियों को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया, जब 27 जून को दोनों देशों के लगभग 10 सैन्य विमान कोरियाई वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (KADIZ) में बिना पूर्व सूचना के दाखिल हुए। ये विमान देश के पूर्वी और दक्षिणी समुद्री क्षेत्रों के ऊपर कुछ समय तक रहने के बाद वापस लौट गए।
मुख्य घटनाक्रम
ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) के अनुसार, चीनी और रूसी सैन्य विमान 27 जून को क्रमवार तरीके से KADIZ में प्रवेश करने के बाद वापस लौट गए। इन विमानों में कथित तौर पर बमवर्षक और लड़ाकू विमान दोनों शामिल थे। दक्षिण कोरियाई सेना ने विमानों के KADIZ में दाखिल होने से पहले ही उनकी पहचान कर ली और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए अपने वायुसेना के लड़ाकू विमान तत्काल तैनात कर दिए।
सरकार की प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोल स्थित चीनी और रूसी दूतावासों के सैन्य प्रतिनिधियों को बुलाकर इस अनधिकृत प्रवेश पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। अधिकारी ने दोनों देशों से स्पष्ट रूप से कहा कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरियाई सेना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप KADIZ से संबंधित गतिविधियों पर सतर्कता के साथ उचित कार्रवाई करती रहेगी।
KADIZ क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है
गौरतलब है कि वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (KADIZ) वास्तविक संप्रभु हवाई क्षेत्र नहीं होता। यह एक ऐसा निर्धारित क्षेत्र है जहाँ विदेशी विमानों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी पहचान सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी अनजाने टकराव या भ्रम की स्थिति से बचा जा सके। इसके बावजूद, बिना पूर्व सूचना के इस क्षेत्र में प्रवेश को कूटनीतिक दृष्टि से गंभीर उकसावे की कार्रवाई माना जाता है।
पुराना पैटर्न और क्षेत्रीय संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। आँकड़ों के अनुसार, 2019 से अब तक चीन और रूस ने संयुक्त अभ्यासों के दौरान बिना पूर्व सूचना के वर्ष में एक या दो बार अपने सैन्य विमान KADIZ में भेजे हैं। यह घटना उसी दीर्घकालिक पैटर्न का हिस्सा प्रतीत होती है, जिसमें दोनों देश मिलकर दक्षिण कोरिया की वायु सुरक्षा संवेदनशीलता को परखते रहे हैं।
आगे क्या होगा
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह इस मामले पर राजनयिक चैनलों के माध्यम से दबाव बनाए रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी घटनाएँ बार-बार होती रहीं, तो सोल अपने सहयोगी देशों — विशेषकर अमेरिका और जापान — के साथ समन्वित प्रतिक्रिया के विकल्पों पर विचार कर सकता है।