21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सऊदी जेल से तीन महीने बाद बारामूला लौटा अमजद अली, जेकेएसए ने जयशंकर का जताया आभार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सऊदी जेल से तीन महीने बाद बारामूला लौटा अमजद अली, जेकेएसए ने जयशंकर का जताया आभार

सारांश

सऊदी अरब के दम्माम में स्वास्थ्यकर्मी के रूप में काम करने वाले बारामूला के अमजद अली को फेसबुक शोक पोस्ट के चलते तीन महीने बिना औपचारिक आरोप के जेल में रहना पड़ा। जेकेएसए की पहल और विदेश मंत्रालय के कूटनीतिक दबाव के बाद 25 जून को उनकी रिहाई हुई — यह मामला विदेशों में भारतीय कामगारों की कांसुलर सुरक्षा का अहम उदाहरण बन गया।

मुख्य बातें

बारामूला निवासी अमजद अली को मार्च 2026 में सऊदी अरब के दम्माम में कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था।
हिरासत का कारण 5 मार्च को ईरानी नेता अयातुल्ला खामेनेई के निधन पर फेसबुक पर साझा की गई शोक पोस्ट बताई गई।
करीब तीन महीने तक बिना औपचारिक आरोप के जेल में रहने के बाद 25 जून 2026 को उन्हें रिहा किया गया।
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने विदेश मंत्री डॉ.
जयशंकर को पत्र लिखकर कूटनीतिक हस्तक्षेप की माँग की थी।
विदेश मंत्रालय के प्रयासों के बाद सऊदी अधिकारियों ने अमजद की भारत वापसी की व्यवस्था की; वे अब सुरक्षित बारामूला में हैं।

बारामूला (जम्मू-कश्मीर) निवासी अमजद अली करीब तीन महीने सऊदी अरब की जेल में बिताने के बाद सकुशल स्वदेश लौट आए हैं। इस रिहाई पर जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर विदेश मंत्रालय के कूटनीतिक प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया है। 20 जुलाई 2026 को सार्वजनिक हुई इस जानकारी के अनुसार, अमजद 25 जून को रिहा हुए और अब अपने परिवार के साथ बारामूला में हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

अमजद अली सऊदी अरब के दम्माम शहर में स्वास्थ्यकर्मी के रूप में कार्यरत थे। मार्च 2026 में कथित तौर पर सऊदी सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने उन्हें उनके कार्यालय से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। परिजनों को बताया गया था कि यह महज कुछ घंटों की औपचारिकता होगी।

जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहामी ने अपने पत्र में बताया कि पुलिस स्टेशन पहुँचते ही अमजद का पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए गए और उनसे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद 5 मार्च को ईरानी नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर फेसबुक पर साझा किए गए एक शोक संदेश को लेकर पूछताछ की गई।

बिना आरोप के तीन महीने जेल में

अमजद का कहना था कि वह पोस्ट केवल संवेदना व्यक्त करने के लिए थी और उसका कोई अन्य उद्देश्य नहीं था। इसके बावजूद उन्हें जेल भेज दिया गया, जहाँ वे करीब तीन महीने तक रहे। इस पूरी अवधि में उन्हें औपचारिक रूप से कोई आरोप नहीं बताया गया। परिवार लंबे समय तक उनकी स्थिति से अनजान रहा और गहरी मानसिक पीड़ा में रहा।

जेकेएसए का हस्तक्षेप और कूटनीतिक प्रयास

मामले की जानकारी मिलते ही जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने विदेश मंत्री जयशंकर को पत्र लिखकर तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की माँग की। संगठन ने अनुरोध किया कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से अमजद तक कांसुलर पहुँच सुनिश्चित की जाए, कानूनी सहायता दी जाए और यदि कोई गंभीर आरोप सिद्ध न हो तो शीघ्र रिहाई के प्रयास किए जाएँ। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि अमजद का किसी गैरकानूनी या चरमपंथी गतिविधि से कोई संबंध नहीं है और वे केवल रोजगार के उद्देश्य से सऊदी अरब गए थे।

रिहाई और घर वापसी

खुहामी के अनुसार, विदेश मंत्रालय के लगातार कूटनीतिक प्रयासों के बाद 25 जून 2026 को अमजद अली को रिहा कर दिया गया। सऊदी अधिकारियों ने उनकी भारत वापसी की व्यवस्था की और वे सुरक्षित रूप से बारामूला अपने घर पहुँच गए। करीब तीन महीने बाद परिवार से उनका मिलन हुआ।

मीडिया और संगठन की भूमिका

जेकेएसए ने विदेश मंत्री जयशंकर के त्वरित हस्तक्षेप और मानवीय दृष्टिकोण को इस रिहाई का श्रेय दिया। साथ ही संगठन ने उन मीडिया संस्थानों की भी सराहना की जिन्होंने इस मामले को प्रमुखता से उठाकर परिवार की पीड़ा को सार्वजनिक मंच तक पहुँचाया। यह मामला विदेशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों, विशेषकर कश्मीर के युवाओं की कांसुलर सुरक्षा की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि उन्हें स्थानीय कानूनों की पूरी जानकारी नहीं होती। तीन महीने तक बिना औपचारिक आरोप के हिरासत में रखना और पासपोर्ट जब्त करना गंभीर कांसुलर चिंता का विषय है। यह मामला यह भी दर्शाता है कि नागरिक समाज संगठनों और मीडिया की सक्रियता कूटनीतिक प्रक्रिया को तेज कर सकती है — लेकिन सवाल यह है कि क्या विदेश मंत्रालय के पास ऐसे मामलों के लिए कोई सक्रिय निगरानी तंत्र है, या हर बार प्रतिक्रियात्मक हस्तक्षेप पर निर्भर रहना पड़ेगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमजद अली को सऊदी अरब में क्यों गिरफ्तार किया गया था?
जेकेएसए के अनुसार, अमजद अली को कथित तौर पर ईरानी नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर फेसबुक पर साझा की गई एक शोक पोस्ट के कारण 5 मार्च 2026 को सऊदी सिविल डिफेंस अधिकारियों ने हिरासत में लिया। अमजद का कहना था कि वह पोस्ट केवल संवेदना व्यक्त करने के लिए थी।
अमजद अली कब रिहा हुए और अब कहाँ हैं?
विदेश मंत्रालय के कूटनीतिक प्रयासों के बाद अमजद अली को 25 जून 2026 को रिहा किया गया। वे अब सुरक्षित रूप से अपने घर बारामूला, जम्मू-कश्मीर पहुँच चुके हैं।
जेकेएसए ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप, रियाद स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से कांसुलर पहुँच और कानूनी सहायता की माँग की। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि अमजद का किसी गैरकानूनी गतिविधि से कोई संबंध नहीं है।
क्या अमजद अली पर कोई औपचारिक आरोप लगाए गए थे?
जेकेएसए के अनुसार, तीन महीने की हिरासत के दौरान अमजद अली को औपचारिक रूप से कोई आरोप नहीं बताया गया। इस अनिश्चितता के कारण उनका परिवार लंबे समय तक गहरी मानसिक पीड़ा में रहा।
यह मामला विदेशों में भारतीय कामगारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों की कांसुलर सुरक्षा और सोशल मीडिया से जुड़े कानूनी जोखिमों को उजागर करता है। यह दर्शाता है कि नागरिक समाज की सक्रियता और मीडिया की भूमिका कूटनीतिक प्रक्रिया को गति दे सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले