सऊदी जेल से तीन महीने बाद बारामूला लौटा अमजद अली, जेकेएसए ने जयशंकर का जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
बारामूला (जम्मू-कश्मीर) निवासी अमजद अली करीब तीन महीने सऊदी अरब की जेल में बिताने के बाद सकुशल स्वदेश लौट आए हैं। इस रिहाई पर जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर विदेश मंत्रालय के कूटनीतिक प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया है। 20 जुलाई 2026 को सार्वजनिक हुई इस जानकारी के अनुसार, अमजद 25 जून को रिहा हुए और अब अपने परिवार के साथ बारामूला में हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
अमजद अली सऊदी अरब के दम्माम शहर में स्वास्थ्यकर्मी के रूप में कार्यरत थे। मार्च 2026 में कथित तौर पर सऊदी सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने उन्हें उनके कार्यालय से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। परिजनों को बताया गया था कि यह महज कुछ घंटों की औपचारिकता होगी।
जेकेएसए के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहामी ने अपने पत्र में बताया कि पुलिस स्टेशन पहुँचते ही अमजद का पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए गए और उनसे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद 5 मार्च को ईरानी नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर फेसबुक पर साझा किए गए एक शोक संदेश को लेकर पूछताछ की गई।
बिना आरोप के तीन महीने जेल में
अमजद का कहना था कि वह पोस्ट केवल संवेदना व्यक्त करने के लिए थी और उसका कोई अन्य उद्देश्य नहीं था। इसके बावजूद उन्हें जेल भेज दिया गया, जहाँ वे करीब तीन महीने तक रहे। इस पूरी अवधि में उन्हें औपचारिक रूप से कोई आरोप नहीं बताया गया। परिवार लंबे समय तक उनकी स्थिति से अनजान रहा और गहरी मानसिक पीड़ा में रहा।
जेकेएसए का हस्तक्षेप और कूटनीतिक प्रयास
मामले की जानकारी मिलते ही जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने विदेश मंत्री जयशंकर को पत्र लिखकर तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की माँग की। संगठन ने अनुरोध किया कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से अमजद तक कांसुलर पहुँच सुनिश्चित की जाए, कानूनी सहायता दी जाए और यदि कोई गंभीर आरोप सिद्ध न हो तो शीघ्र रिहाई के प्रयास किए जाएँ। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि अमजद का किसी गैरकानूनी या चरमपंथी गतिविधि से कोई संबंध नहीं है और वे केवल रोजगार के उद्देश्य से सऊदी अरब गए थे।
रिहाई और घर वापसी
खुहामी के अनुसार, विदेश मंत्रालय के लगातार कूटनीतिक प्रयासों के बाद 25 जून 2026 को अमजद अली को रिहा कर दिया गया। सऊदी अधिकारियों ने उनकी भारत वापसी की व्यवस्था की और वे सुरक्षित रूप से बारामूला अपने घर पहुँच गए। करीब तीन महीने बाद परिवार से उनका मिलन हुआ।
मीडिया और संगठन की भूमिका
जेकेएसए ने विदेश मंत्री जयशंकर के त्वरित हस्तक्षेप और मानवीय दृष्टिकोण को इस रिहाई का श्रेय दिया। साथ ही संगठन ने उन मीडिया संस्थानों की भी सराहना की जिन्होंने इस मामले को प्रमुखता से उठाकर परिवार की पीड़ा को सार्वजनिक मंच तक पहुँचाया। यह मामला विदेशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों, विशेषकर कश्मीर के युवाओं की कांसुलर सुरक्षा की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है।