सर्बियाई राष्ट्रपति वुसिक की चीन यात्रा: 'मैत्री पदक' सम्मान, ताइवान को बताया चीन का आंतरिक मामला
सारांश
मुख्य बातें
सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने 30 मई को बीजिंग में चीन की अपनी पहली राजकीय यात्रा के दौरान एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि यह उनके राजनीतिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा है। उन्होंने चीन द्वारा प्रदान किए गए 'मैत्री पदक' के लिए आभार व्यक्त किया और सर्बिया-चीन संबंधों को नई ऊँचाई देने की प्रतिबद्धता जताई।
यात्रा का महत्व और द्विपक्षीय संबंध
वुसिक ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग उनकी अपेक्षाओं से कहीं अधिक गहरा हुआ है। उन्होंने चिकित्सा, ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार यह सहयोग सर्बिया के विकास को नई गति प्रदान करेगा।
वुसिक ने 'साझा भविष्य वाले सर्बिया-चीन समुदाय' के निर्माण में योगदान देने की इच्छा व्यक्त की — यह वही शब्दावली है जो चीनी राजनयिक प्रवचन में केंद्रीय महत्व रखती है। गौरतलब है कि सर्बिया यूरोप में उन गिने-चुने देशों में से एक है जो चीन के साथ इस स्तर की घनिष्ठता बनाए हुए है।
चीन को बताया वैश्विक स्थिरता का स्तंभ
वुसिक ने वर्तमान वैश्विक परिस्थिति को 'बेहद खास' बताते हुए कहा कि इस संदर्भ में चीन का महत्व न केवल एशिया बल्कि पूरे विश्व के लिए स्थिरता के स्तंभ के रूप में और अधिक स्पष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा कि विश्व भर के देश चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के विचारों पर ध्यान दे रहे हैं।
उनके अनुसार चीन की विदेश नीति पूर्वानुमेय, जिम्मेदार और समाधान-उन्मुख है। उन्होंने कहा, 'जबकि विश्व के अन्य हिस्से अस्थिर हैं, चीन ने हमेशा स्थिरता, शांति और सद्भाव बनाए रखा है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिमी देशों और चीन के बीच व्यापार व भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।
ताइवान पर सर्बिया का स्पष्ट रुख
वुसिक ने साक्षात्कार में ताइवान के प्रश्न पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि यह चीन का आंतरिक मामला है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देते हुए कहा, 'यूएन चार्टर के अनुसार ताइवान चीन का है। यह बहुत साफ है।' यह बयान सर्बिया की दीर्घकालिक 'एक-चीन नीति' के समर्थन की पुनरावृत्ति है।
आगे की दिशा
इस यात्रा से सर्बिया और चीन के बीच तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के नए समझौतों की उम्मीद जताई जा रही है। यूरोपीय संघ की सदस्यता की दिशा में बढ़ रहे सर्बिया के लिए चीन के साथ इस स्तर की घनिष्ठता कूटनीतिक रूप से एक संतुलन-नीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में ठोस सहयोग की रूपरेखा सामने आने की संभावना है।