इजरायल में लगेगी छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति, कॉन्सुल जनरल बोले — भारत-इजरायल दोस्ती का प्रतीक
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति और स्मारक स्थापित किए जाएंगे — यह घोषणा इजरायल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच ने 7 जून 2026 को नई दिल्ली में की। रेवाच ने कहा कि यह मूर्ति भारत और इजरायल के लोगों के बीच दोस्ती और प्रेरणा का दीर्घकालिक प्रतीक बनेगी। उन्होंने इस अवसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस पर भारत की जनता को शुभकामनाएं भी दीं।
प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि
रेवाच के अनुसार, इस विचार की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के बाद पड़ी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने के लिए बजट आवंटित किया गया, जिसके तहत एक सार्थक 'गुडविल प्रोजेक्ट' की परिकल्पना की गई। रक्षा, साइबर या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे परंपरागत सहयोग से अलग, यह पहल लोगों के दिलों से जुड़ने का प्रयास है।
रेवाच ने बताया कि जब उन्होंने यह विचार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय के सामने रखा, तो फडणवीस ने तुरंत बैठक के लिए हामी भरी और परियोजना को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
मूर्ति और स्मारक की योजना
कॉन्सुल जनरल ने बताया कि एक प्रतिष्ठित कलाकार से उच्च गुणवत्ता की मूर्ति बनवाई जाएगी और उसे इजरायल भेजा जाएगा। इजरायल में किस नगरपालिका क्षेत्र में मूर्ति स्थापित की जाएगी, इस पर अभी विचार-विमर्श जारी है। इसके अतिरिक्त, शिवाजी महाराज के जीवन और विचारों पर आधारित पुस्तक का हिब्रू भाषा में अनुवाद करने की भी योजना है, ताकि इजरायली नागरिक उनकी रणनीति और मूल्यों से परिचित हो सकें।
रेवाच ने कहा कि भारत और इजरायल के इतिहास में कई समानताएं हैं — दोनों देशों को अपनी पहचान और भूमि के लिए दशकों तक संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने इसे इस सांस्कृतिक पहल की वैचारिक प्रेरणा बताया।
लेबनान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इजरायल का रुख
रेवाच ने लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि इजरायल का लेबनान के लोगों या सरकार से कोई विवाद नहीं है। उनके अनुसार, हिज्बुल्लाह दशकों से बिना किसी उचित कारण के लेबनान सीमा पर रहने वाले इजरायली नागरिकों पर रॉकेट दाग रहा है। उन्होंने ईरान को क्षेत्रीय अस्थिरता की मुख्य जड़ बताया, जो हिज्बुल्लाह, हूती, हमास और इराकी शिया मिलिशिया जैसे प्रॉक्सी संगठनों को वित्त, प्रशिक्षण और हथियार मुहैया कराता है।
ईरानी राजदूत द्वारा इजरायली कार्रवाई को 'संप्रभुता का उल्लंघन' और 'युद्ध अपराध' बताए जाने के सवाल पर रेवाच ने कहा कि जब तक हमले जारी रहेंगे, इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करता रहेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के हस्तक्षेप के बिना इस क्षेत्र में स्थायी शांति संभव है।
सांस्कृतिक कूटनीति का नया आयाम
यह पहल भारत-इजरायल संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। अब तक दोनों देशों का सहयोग मुख्यतः रक्षा, कृषि-तकनीक, साइबर सुरक्षा और व्यापार तक सीमित था। छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे भारतीय महानायक की मूर्ति इजरायल में स्थापित करना लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का एक अभूतपूर्व प्रयास है। गौरतलब है कि यह परियोजना दोनों देशों की सरकारों के सक्रिय समर्थन से आगे बढ़ रही है।
आने वाले महीनों में मूर्ति की स्थापना स्थल की आधिकारिक घोषणा और कलाकार के चयन की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।