11 अगस्त 2026
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श्रीलंका में साइबर ठगी के बड़े अड्डे उजागर, 'पिग-बुचेरिंग' घोटाले का नया केंद्र बना द्वीपीय देश

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श्रीलंका में साइबर ठगी के बड़े अड्डे उजागर, 'पिग-बुचेरिंग' घोटाले का नया केंद्र बना द्वीपीय देश

सारांश

म्यांमार और कंबोडिया के बाद अब श्रीलंका — आर्थिक संकट और कमज़ोर निगरानी ने इस द्वीपीय देश को अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का नया अड्डा बना दिया है। अप्रैल 2026 में एक ही छापे में 150 विदेशी गिरफ्तार हुए। 'पिग-बुचेरिंग' और सिम-बॉक्स धोखाधड़ी के ये नेटवर्क वैश्विक आपराधिक गिरोहों से जुड़े हैं।

मुख्य बातें

श्रीलंका म्यांमार , कंबोडिया और लाओस के बाद अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का नया केंद्र बनता जा रहा है।
अप्रैल 2026 में अंबकंदविला के एक होटल से 150 लोग गिरफ्तार, जिनमें 133 चीनी नागरिक और 13 वियतनामी शामिल।
कैंडी , पनादुरा और नेगोम्बो में लग्जरी होटल कथित तौर पर स्कैम सेंटर के रूप में इस्तेमाल हो रहे थे।
जाँचकर्ताओं ने सैकड़ों कंप्यूटर, मोबाइल और सिम-बॉक्स डिवाइस जब्त किए जो एक साथ हज़ारों फर्जी कॉल भेजने में सक्षम थे।
'पिग-बुचेरिंग' घोटाले में पीड़ितों से ऑनलाइन भरोसा जीतकर नकली निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगवाया जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार चीनी और नाइजीरियाई नागरिक इन नेटवर्क के प्रमुख संचालक हैं।

श्रीलंका तेज़ी से अंतरराष्ट्रीय टेलीकॉम धोखाधड़ी और 'पिग-बुचेरिंग' निवेश घोटालों का नया गढ़ बनता जा रहा है। आर्थिक संकट से जूझ रहे इस द्वीपीय देश में नियामकीय निगरानी की कमज़ोरी ने संगठित साइबर अपराधियों को यहाँ पाँव जमाने का मौका दे दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, म्यांमार, कंबोडिया और लाओस में सक्रिय साइबर अपराधी नेटवर्क अब अपने ठिकाने श्रीलंका की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं।

स्कैम सेंटरों का खुलासा और छापेमार कार्रवाइयाँ

साल 2024 के मध्य से श्रीलंका पुलिस और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने कई बड़े अभियान चलाए हैं, जिनमें विदेशी नागरिकों द्वारा संचालित स्कैम सेंटर पकड़े गए और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया। कैंडी, पनादुरा और नेगोम्बो में हुई छापेमार कार्रवाइयों में लग्जरी होटलों और गेस्ट हाउसों को निशाना बनाया गया, जिन्हें कथित तौर पर इन अपराधियों के ऑपरेशन बेस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।

अप्रैल 2026 में अंबकंदविला के एक लग्जरी होटल पर की गई कार्रवाई में 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया — इनमें 133 चीनी नागरिक, 13 वियतनामी, एक मलेशियाई और अन्य शामिल थे। जाँचकर्ताओं ने सैकड़ों कंप्यूटर, मोबाइल फोन और सिम-बॉक्स डिवाइस जब्त किए, जो एक साथ सैकड़ों सिम कार्ड चलाकर हज़ारों फर्जी कॉल और संदेश भेजने में सक्षम थे।

'पिग-बुचेरिंग' घोटाला: कैसे काम करता है यह जाल

'पिग-बुचेरिंग' इन ठगी नेटवर्क की कमाई का प्रमुख तरीका है। इसमें अपराधी पहले ऑनलाइन माध्यम से पीड़ित से दोस्ती या प्रेम संबंध जैसा भरोसेमंद रिश्ता बनाते हैं और फिर उन्हें नकली निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने के लिए मनाते हैं। ठग VPN का उपयोग करके अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाते हैं और सोशल मीडिया अकाउंट हैक करके भी लोगों से धन उगाही करते हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, हैक किए गए अकाउंट्स से पीड़ितों को फिशिंग लिंक भेजे गए और उन्हें स्थानीय निजी बैंक खातों में रकम जमा करने के लिए धोखा दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है।

भर्ती का जाल और मानव तस्करी का पहलू

इन नेटवर्क के भर्तीकर्ता सोशल मीडिया पर 'ऑनलाइन मार्केटिंग' या 'डेटा एंट्री' जैसी नौकरियों का विज्ञापन देकर लोगों को फँसाते हैं। नौकरी मिलने के बाद पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं और उन्हें जबरन धोखाधड़ी वाले अभियानों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है — जो मानव तस्करी के गंभीर संकेत हैं।

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से संबंध

रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि चीनी और नाइजीरियाई नागरिक इन नेटवर्क के प्रमुख संचालक हैं। कथित तौर पर ये केंद्र म्यांमार और कंबोडिया में मौजूद अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों से सीधे जुड़े हुए हैं। गौरतलब है कि विदेशी निवेश और बाहर से आने वाले धन पर श्रीलंका में अपेक्षाकृत कम जाँच-पड़ताल होती है, जिसे अपराधी अपने पक्ष में भुना रहे हैं।

आगे क्या होगा

श्रीलंका की एजेंसियाँ अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर इन नेटवर्क की जड़ें खोदने में जुटी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नियामकीय ढाँचे को मज़बूत नहीं किया जाता और विदेशी निवेश पर पारदर्शिता नहीं बढ़ती, तब तक श्रीलंका ऐसे अपराधियों के लिए आकर्षक ठिकाना बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

या छापेमार कार्रवाइयाँ सिर्फ ऊपरी परत को खुरचती रहेंगी। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि इन नेटवर्क के निशाने पर भारतीय नागरिक भी हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीलंका में साइबर ठगी के स्कैम सेंटर क्या हैं?
ये वे संगठित अपराध केंद्र हैं जहाँ विदेशी नागरिक लग्जरी होटलों और गेस्ट हाउसों से टेलीकॉम धोखाधड़ी और 'पिग-बुचेरिंग' निवेश घोटाले चलाते हैं। कैंडी, पनादुरा और नेगोम्बो सहित कई स्थानों पर ऐसे केंद्र पकड़े गए हैं।
'पिग-बुचेरिंग' घोटाला क्या होता है?
'पिग-बुचेरिंग' एक ऑनलाइन ठगी का तरीका है जिसमें अपराधी पहले पीड़ित से दोस्ती या प्रेम संबंध का भरोसा जीतते हैं, फिर उन्हें नकली निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने के लिए मनाते हैं और रकम हड़प लेते हैं। VPN के ज़रिए असली लोकेशन छिपाई जाती है।
अप्रैल 2026 में श्रीलंका में कितने लोग गिरफ्तार हुए?
अप्रैल 2026 में अंबकंदविला के एक लग्जरी होटल पर छापे में 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 133 चीनी नागरिक, 13 वियतनामी और एक मलेशियाई नागरिक शामिल थे।
श्रीलंका साइबर अपराधियों का नया ठिकाना क्यों बन रहा है?
आर्थिक संकट और विदेशी निवेश पर कमज़ोर नियामकीय निगरानी के कारण श्रीलंका अपराधियों के लिए अनुकूल वातावरण बन गया है। म्यांमार और कंबोडिया में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद अपराधी नेटवर्क यहाँ स्थानांतरित हो रहे हैं।
इन स्कैम नेटवर्क में लोगों को कैसे फँसाया जाता है?
भर्तीकर्ता सोशल मीडिया पर 'ऑनलाइन मार्केटिंग' या 'डेटा एंट्री' जैसी नौकरियों का विज्ञापन देकर लोगों को लुभाते हैं। नौकरी मिलने के बाद पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं और उन्हें जबरन धोखाधड़ी के काम में लगाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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