तेहरान में 9 मई से 100% सरकारी उपस्थिति अनिवार्य, गवर्नर मोतेमिदियन का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
तेहरान के गवर्नर मोहम्मद सदेग मोतेमिदियन ने गुरुवार, 7 मई को घोषणा की कि ईरान की राजधानी तेहरान में सभी मंत्रालय, सरकारी संगठन और कार्यकारी एजेंसियाँ 9 मई (शनिवार) से 100 प्रतिशत स्टाफ के साथ पूर्ण क्षमता पर कार्य करना शुरू करेंगी। यह जानकारी अर्द्ध-आधिकारिक मेहर न्यूज एजेंसी ने दी। 40 दिनों तक चले अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद यह पहला बड़ा कदम है, जो तेहरान में सामान्य जन-जीवन की बहाली की दिशा में उठाया गया है।
गवर्नर का आदेश: क्या है निर्देश
गवर्नर मोतेमिदियन के अनुसार, सभी सरकारी विभाग 9 मई से 100 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ काम करेंगे। हालाँकि, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों के पुनरारंभ की जानकारी संबंधित शिक्षा मंत्रालय अलग से जारी करेगा। यह आदेश उस समय आया है जब पिछले दो-तीन हफ्तों से तेहरान में धीरे-धीरे सामान्य जीवन की झलक दिखाई देने लगी है।
संघर्ष विराम के बावजूद अनिश्चितता बरकरार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान के नागरिक अभी भी सशंकित हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ओर डील की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर धमकी भी दे रहे हैं। इजरायल भी इसी रुख पर कायम है। दोनों देशों ने स्पष्ट कहा है कि यदि ईरान संघर्ष विराम समझौते के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो संघर्ष फिर से शुरू हो सकता है।
फुजैराह हमला और भारतीय नागरिक घायल
यह अनिश्चितता सोमवार को और गहरा गई जब अमेरिका ने दो ईरानी सैन्य नौकाओं पर हमला किया। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने यूएई स्थित फुजैराह तेल पोर्ट पर एक टैंकर को निशाना बनाया। इस हमले में तीन भारतीय नागरिक भी घायल हो गए, जिसकी भारत समेत कई देशों ने कड़े शब्दों में निंदा की।
आर्थिक संकट: IMF का 70% महंगाई का अनुमान
युद्ध का आर्थिक असर भी गहरा रहा है। कई नागरिकों की नौकरियाँ जा चुकी हैं और महंगाई तेज़ी से बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के अनुसार, ईरान में इस वर्ष महंगाई दर 70 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश पहले से ही दशकों के प्रतिबंधों से जूझ रहा था।
आगे क्या होगा
सरकारी कार्यालयों की पूर्ण बहाली तेहरान की जन-जीवन वापसी का एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कदम दोनों है। लेकिन जब तक अमेरिका-ईरान के बीच कोई स्थायी समझौता नहीं होता और इजरायल की भूमिका स्पष्ट नहीं होती, तब तक स्थिति नाज़ुक बनी रहेगी। अगले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि तेहरान की यह बहाली टिकाऊ है या महज़ एक अस्थायी राहत।