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पेड़ों की कार्बन स्टोरेज क्षमता पर सवाल: फोटोसिंथेसिस और वुड ग्रोथ में अंतर, नए अध्ययन का खुलासा

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पेड़ों की कार्बन स्टोरेज क्षमता पर सवाल: फोटोसिंथेसिस और वुड ग्रोथ में अंतर, नए अध्ययन का खुलासा

सारांश

नए शोध ने जलवायु रणनीतियों की एक बड़ी मान्यता को चुनौती दी है — पेड़ जितना कार्बन सोखते हैं, उतना लकड़ी में संग्रहित नहीं होता। अमेरिका के 137 स्थानों पर हुए इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि मौजूदा जलवायु मॉडल जंगलों की कार्बन क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर आँक रहे हैं।

मुख्य बातें

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के लैमॉन्ट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक मुकुंद राव के नेतृत्व में यह अध्ययन अमेरिका के 137 स्थानों पर किया गया।
कई क्षेत्रों में पेड़ों की वुड ग्रोथ फोटोसिंथेसिस बंद होने से कई महीने पहले ही रुक गई।
पूर्वी अमेरिका में 36% और कैलिफोर्निया में 26% कार्बन अवशोषण वृद्धि रुकने के बाद हुआ।
गर्म और शुष्क परिस्थितियों में वुड ग्रोथ लगभग तुरंत रुक जाती है, जबकि फोटोसिंथेसिस जारी रह सकता है।
मौजूदा जलवायु मॉडल जंगलों की कार्बन स्टोरेज क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर दर्शा सकते हैं।
शोध से सवाल उठता है कि क्या केवल पौधारोपण जलवायु लक्ष्यों के लिए पर्याप्त है।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के लैमॉन्ट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों पर बड़ा सवाल खड़ा किया है — पेड़ वास्तव में उतना कार्बन संग्रहित नहीं कर पाते जितना अब तक माना जाता रहा है। शोध के अनुसार, प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) और लकड़ी की वृद्धि (वुड ग्रोथ) के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है, जिसे अधिकांश जलवायु मॉडल नज़रअंदाज़ करते आए हैं। यह अध्ययन 13 जून 2026 को सामने आया और इसने वन-आधारित कार्बन अवशोषण नीतियों की सीमाओं पर नई बहस छेड़ दी है।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

यह शोध अमेरिका के 137 स्थानों पर किया गया। अध्ययन में पाया गया कि कई क्षेत्रों में पेड़ों की वुड ग्रोथ उस समय से कई महीने पहले रुक गई, जब फोटोसिंथेसिस पूरी तरह बंद हुआ। इसका सीधा अर्थ है कि पेड़ कार्बन तो अवशोषित करते रहते हैं, लेकिन वह कार्बन लकड़ी के रूप में दीर्घकालिक रूप से संग्रहित नहीं होता।

अध्ययन के प्रमुख लेखक और लैमॉन्ट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक मुकुंद राव ने कहा, "सिर्फ अधिक फोटोसिंथेसिस का मतलब वुड ग्रोथ नहीं है।" उनके अनुसार, अधिकांश जलवायु मॉडल यह मानकर चलते हैं कि जहाँ फोटोसिंथेसिस होता है वहाँ पेड़ तेज़ गति से बढ़ते हैं, लेकिन यह धारणा हमेशा सही नहीं है।

क्षेत्रवार आँकड़े क्या कहते हैं

पूर्वी अमेरिका के स्थलों पर लगभग 36 प्रतिशत वार्षिक कार्बन अवशोषण उस अवधि के बाद हुआ जब पेड़ों की वृद्धि पहले ही रुक चुकी थी। कैलिफोर्निया में यह आँकड़ा लगभग 26 प्रतिशत रहा। चार स्थलों पर किए गए गहन विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि लकड़ी की वृद्धि केवल उन परिस्थितियों में होती है जब वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा और कम शुष्क हो।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ता खतरा

वैज्ञानिकों ने चेताया कि वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण हीटवेव और सूखे की घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे वुड ग्रोथ के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ लगातार कम होती जा रही हैं। गर्म और शुष्क मौसम में पेड़ों की वृद्धि लगभग तुरंत रुक जाती है, जबकि फोटोसिंथेसिस कुछ हद तक जारी रह सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर की सरकारें जंगलों को कार्बन सिंक के रूप में अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं में शामिल कर रही हैं।

जलवायु मॉडल पर प्रभाव

अध्ययन के अनुसार, वर्तमान जलवायु मॉडल — जो फोटोसिंथेसिस और वृद्धि को एक समान मानते हैं — भविष्य में जंगलों की कार्बन स्टोरेज क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर आँक सकते हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब वन-आधारित कार्बन अनुमानों पर सवाल उठे हों, लेकिन इस शोध की व्यापकता — 137 स्थान — इसे विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।

आगे की राह

इस शोध ने यह प्रश्न खड़ा किया है कि क्या केवल पौधारोपण जैसी रणनीतियाँ जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होंगी, या फिर तकनीकी कार्बन निष्कासन के समाधान भी अनिवार्य रूप से अपनाने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु नीति निर्माताओं को वन-आधारित कार्बन क्रेडिट की गणना पद्धति पर पुनर्विचार करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो भारत सहित वे देश जो बड़े पैमाने पर वनीकरण को अपनी जलवायु योजना का आधार बनाते हैं, वे वास्तविक उत्सर्जन कटौती की जगह एक भ्रामक गणित पर भरोसा कर रहे हैं। हीटवेव और सूखे की बढ़ती आवृत्ति के साथ यह अंतर और गहरा होगा — ठीक उस समय जब जंगलों से सबसे अधिक उम्मीद की जा रही है। नीति निर्माताओं को तकनीकी कार्बन निष्कासन को विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य पूरक मानना होगा।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नए अध्ययन में पेड़ों की कार्बन स्टोरेज क्षमता के बारे में क्या पाया गया?
अध्ययन के अनुसार पेड़ जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए जितना कार्बन संग्रहित करने में सक्षम माने जाते हैं, वास्तव में उनकी क्षमता उससे कम हो सकती है। इसकी वजह यह है कि फोटोसिंथेसिस हमेशा सीधे वुड ग्रोथ में नहीं बदलता, इसलिए अवशोषित कार्बन लंबे समय तक लकड़ी में संग्रहित नहीं रहता।
फोटोसिंथेसिस और वुड ग्रोथ में क्या अंतर है?
फोटोसिंथेसिस वह प्रक्रिया है जिसमें पेड़ सूर्य की रोशनी से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं, जबकि वुड ग्रोथ वह प्रक्रिया है जिसमें यह कार्बन लकड़ी के रूप में दीर्घकालिक रूप से संग्रहित होता है। अध्ययन में पाया गया कि वुड ग्रोथ फोटोसिंथेसिस बंद होने से कई महीने पहले ही रुक सकती है, विशेषकर गर्म और शुष्क परिस्थितियों में।
यह अध्ययन कहाँ और कैसे किया गया?
यह शोध अमेरिका के 137 स्थानों पर किया गया और इसका नेतृत्व कोलंबिया यूनिवर्सिटी के लैमॉन्ट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक मुकुंद राव ने किया। इसके अलावा चार स्थलों पर गहन विश्लेषण भी किया गया जिसमें वुड ग्रोथ और फोटोसिंथेसिस के बीच के अंतर को विस्तार से मापा गया।
इस शोध का जलवायु नीति पर क्या असर पड़ सकता है?
अध्ययन से संकेत मिलता है कि मौजूदा जलवायु मॉडल जंगलों की कार्बन स्टोरेज क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर आँक सकते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या केवल पौधारोपण जैसी रणनीतियाँ पर्याप्त होंगी, या कार्बन हटाने के लिए तकनीकी समाधान भी ज़रूरी होंगे।
जलवायु परिवर्तन से पेड़ों की कार्बन संग्रह क्षमता पर क्या असर पड़ रहा है?
वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण हीटवेव और सूखे की घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे वुड ग्रोथ के लिए ज़रूरी ठंडी और कम शुष्क परिस्थितियाँ कम होती जा रही हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में पेड़ों की दीर्घकालिक कार्बन संग्रह क्षमता और घट सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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