2 अक्टूबर 2026
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ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर पर किया मुकदमा, अवैध प्रवासियों को इन-स्टेट ट्यूशन देने का आरोप

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ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर पर किया मुकदमा, अवैध प्रवासियों को इन-स्टेट ट्यूशन देने का आरोप

सारांश

ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर पर मुकदमा ठोका — यह अब तक की 26वीं ऐसी कानूनी कार्रवाई है जो अवैध प्रवासियों को इन-स्टेट ट्यूशन देने की नीतियों को चुनौती देती है। डेलावेयर से बाहर के अमेरिकी नागरिकों को $1,770 प्रति क्रेडिट आवर देना पड़ता है, जबकि स्थानीय निवासियों को $656 — और यही फीस अंतर इस कानूनी लड़ाई की जड़ है।

मुख्य बातें

अमेरिकी न्याय विभाग ने 2 अक्टूबर 2026 को यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया।
आरोप है कि विश्वविद्यालय बिना कानूनी इमिग्रेशन स्टेटस वाले प्रवासियों को इन-स्टेट ट्यूशन फीस ($656 प्रति क्रेडिट आवर) का लाभ देता है, जो डेलावेयर से बाहर के अमेरिकी नागरिकों ( $1,770 प्रति क्रेडिट आवर ) को नहीं मिलती।
यह ट्रंप प्रशासन की इस तरह की 26वीं कानूनी कार्रवाई है — छह मामलों में अदालतें संघीय सरकार के पक्ष में आदेश दे चुकी हैं।
एसोसिएट अटॉर्नी जनरल स्टेनली ई.
वुडवर्ड जूनियर ने कहा कि हर ऐसी नीति को चुनौती दी जाएगी जो अमेरिकी नागरिकों के मुकाबले अवैध प्रवासियों को प्राथमिकता देती है।
रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमा दायर होने तक यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर ने आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की थी।

अमेरिकी न्याय विभाग ने 2 अक्टूबर 2026 को यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय की ट्यूशन नीति के तहत अमेरिका में बिना कानूनी इमिग्रेशन स्टेटस वाले कुछ प्रवासी छात्र कम इन-स्टेट ट्यूशन फीस के लिए पात्र हो सकते हैं, जबकि डेलावेयर से बाहर रहने वाले अमेरिकी नागरिकों को अधिक नॉन-रेजिडेंट फीस चुकानी पड़ती है। न्याय विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था फेडरल कानून का सीधा उल्लंघन है — हालाँकि इस पर अभी अदालत ने कोई फैसला नहीं सुनाया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मुकदमा ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक कानूनी मुहिम का हिस्सा है, जिसमें राज्यों और विश्वविद्यालयों की उन ट्यूशन नीतियों को चुनौती दी जा रही है जो बिना कानूनी इमिग्रेशन दर्जे वाले प्रवासी छात्रों को स्थानीय निवासियों जैसी रियायती फीस का लाभ देती हैं। न्याय विभाग के अनुसार, गुरुवार को दायर इस मामले के साथ ऐसी नीतियों को चुनौती देने वाले मुकदमों की कुल संख्या 26 हो गई है।

गौरतलब है कि टेक्सास, केंटकी, ओक्लाहोमा, नेब्रास्का, इलिनॉय और कंसास से जुड़े छह मामलों में अदालतें अब तक संघीय सरकार के पक्ष में आदेश दे चुकी हैं। वहीं, कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, मैसाचुसेट्स, वर्जीनिया, मिनेसोटा, मैरीलैंड, कोलोराडो, कनेक्टिकट, वरमोंट, एरिजोना, न्यू मैक्सिको, ओरेगन, वॉशिंगटन और हवाई सहित अनेक राज्यों से संबंधित मामले अभी न्यायालयों में विचाराधीन हैं।

सरकारी पक्ष के तर्क

अमेरिका के एसोसिएट अटॉर्नी जनरल स्टेनली ई. वुडवर्ड जूनियर ने कहा, 'न्याय विभाग की कोशिश तब तक नहीं रुकेगी, जब तक हम ऐसे हर राज्य के कानून या यूनिवर्सिटी की नीति को चुनौती नहीं दे देते, जो हमारे अपने नागरिकों के मुकाबले अवैध प्रवासियों को प्राथमिकता देती है।' उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि राज्य ऐसी कम ट्यूशन फीस अवैध प्रवासियों को नहीं दे सकते, जो सभी अमेरिकी नागरिकों को उपलब्ध न हो।

न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने कहा, 'यह फेडरल कानून का सीधा मामला है। कॉलेज अवैध प्रवासियों को ऐसा फायदा नहीं दे सकते, जो अमेरिकी नागरिकों को नहीं दिया जाता।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'न्याय विभाग यह बर्दाश्त नहीं करेगा कि अमेरिकी छात्रों के साथ उनके अपने देश में दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाए।'

फीस का अंतर — विवाद की जड़

2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर ने कुछ अंडरग्रेजुएट कार्यक्रमों में डेलावेयर के निवासियों के लिए $656 प्रति क्रेडिट आवर की ट्यूशन फीस निर्धारित की है। वहीं, राज्य से बाहर के छात्रों के लिए यह दर $1,770 प्रति क्रेडिट आवर है। न्याय विभाग का कहना है कि यदि कोई प्रवासी — जो अमेरिका में कानूनी रूप से नहीं रह रहा — डेलावेयर में रहने के आधार पर कम फीस का लाभ उठाता है, तो यह उन अमेरिकी नागरिकों के साथ भेदभाव है जो किसी दूसरे राज्य से आकर पढ़ना चाहते हैं।

यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता

रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमा दायर होने तक यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर ने अपने आधिकारिक सार्वजनिक बयान पृष्ठ पर इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की थी। न्याय विभाग ने संघीय अदालत से विश्वविद्यालय की मौजूदा नीति को तत्काल प्रभाव से रोकने और भविष्य में इमिग्रेशन स्टेटस के आधार पर इसी प्रकार की नई नीतियाँ बनाने पर रोक लगाने की माँग की है। यह मामला अमेरिका में उच्च शिक्षा नीति और इमिग्रेशन कानून के बीच बढ़ते टकराव की एक नई कड़ी बन गया है — और आने वाले महीनों में अदालती फैसले इस पूरे परिदृश्य को नए सिरे से परिभाषित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इमिग्रेशन कानून और राज्यों के अधिकारों के बीच एक बड़े संवैधानिक टकराव की एक और परत है। 26 मामले दायर करना एक व्यवस्थित रणनीतिक अभियान का संकेत है, न कि अलग-थलग कानूनी कार्रवाई का। हालाँकि छह राज्यों में संघीय पक्ष को अदालती राहत मिली है, कई बड़े राज्य — जैसे कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क — अभी भी लड़ रहे हैं, जो बताता है कि अंतिम कानूनी परिणाम अनिश्चित है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस पहलू को नज़रअंदाज़ करती है कि इन नीतियों का सीधा असर उन लाखों छात्रों पर पड़ता है जो दशकों से अमेरिका में पल-बढ़े हैं — उनके भविष्य को इस कानूनी दाँव में दांव पर लगाया जा रहा है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर के खिलाफ मुकदमा किस बात पर है?
अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर अपनी ट्यूशन नीति के तहत बिना कानूनी इमिग्रेशन स्टेटस वाले प्रवासियों को कम इन-स्टेट फीस का लाभ देती है, जो डेलावेयर से बाहर के अमेरिकी नागरिकों को उपलब्ध नहीं है। विभाग का कहना है कि यह फेडरल कानून का उल्लंघन है।
इन-स्टेट और आउट-ऑफ-स्टेट ट्यूशन फीस में कितना अंतर है?
2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर में डेलावेयर निवासियों के लिए इन-स्टेट फीस $656 प्रति क्रेडिट आवर है, जबकि राज्य के बाहर के छात्रों के लिए यह $1,770 प्रति क्रेडिट आवर है। यही फीस अंतर इस पूरे कानूनी विवाद की केंद्रीय समस्या है।
ट्रंप प्रशासन ऐसे कितने मामले दायर कर चुका है?
न्याय विभाग के अनुसार, डेलावेयर मामले सहित अब तक कुल 26 ऐसे मुकदमे दायर किए जा चुके हैं जो अवैध प्रवासियों को इन-स्टेट ट्यूशन देने की नीतियों को चुनौती देते हैं। इनमें से छह मामलों में — टेक्सास, केंटकी, ओक्लाहोमा, नेब्रास्का, इलिनॉय और कंसास में — अदालतें संघीय सरकार के पक्ष में आदेश दे चुकी हैं।
न्याय विभाग अदालत से क्या माँग कर रहा है?
न्याय विभाग ने संघीय अदालत से दो माँगें की हैं: पहली, यूनिवर्सिटी की मौजूदा इन-स्टेट ट्यूशन नीति को तत्काल प्रभाव से रोका जाए; और दूसरी, भविष्य में इमिग्रेशन स्टेटस के आधार पर इसी प्रकार की नई ट्यूशन नीतियाँ बनाने पर रोक लगाई जाए।
यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर ने इस मुकदमे पर क्या कहा है?
रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमा दायर होने तक यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर ने अपने आधिकारिक सार्वजनिक बयान पृष्ठ पर इस मामले को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की थी।
राष्ट्र प्रेस
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