ट्रंप प्रशासन ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर पर किया मुकदमा, अवैध प्रवासियों को इन-स्टेट ट्यूशन देने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी न्याय विभाग ने 2 अक्टूबर 2026 को यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय की ट्यूशन नीति के तहत अमेरिका में बिना कानूनी इमिग्रेशन स्टेटस वाले कुछ प्रवासी छात्र कम इन-स्टेट ट्यूशन फीस के लिए पात्र हो सकते हैं, जबकि डेलावेयर से बाहर रहने वाले अमेरिकी नागरिकों को अधिक नॉन-रेजिडेंट फीस चुकानी पड़ती है। न्याय विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था फेडरल कानून का सीधा उल्लंघन है — हालाँकि इस पर अभी अदालत ने कोई फैसला नहीं सुनाया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मुकदमा ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक कानूनी मुहिम का हिस्सा है, जिसमें राज्यों और विश्वविद्यालयों की उन ट्यूशन नीतियों को चुनौती दी जा रही है जो बिना कानूनी इमिग्रेशन दर्जे वाले प्रवासी छात्रों को स्थानीय निवासियों जैसी रियायती फीस का लाभ देती हैं। न्याय विभाग के अनुसार, गुरुवार को दायर इस मामले के साथ ऐसी नीतियों को चुनौती देने वाले मुकदमों की कुल संख्या 26 हो गई है।
गौरतलब है कि टेक्सास, केंटकी, ओक्लाहोमा, नेब्रास्का, इलिनॉय और कंसास से जुड़े छह मामलों में अदालतें अब तक संघीय सरकार के पक्ष में आदेश दे चुकी हैं। वहीं, कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, मैसाचुसेट्स, वर्जीनिया, मिनेसोटा, मैरीलैंड, कोलोराडो, कनेक्टिकट, वरमोंट, एरिजोना, न्यू मैक्सिको, ओरेगन, वॉशिंगटन और हवाई सहित अनेक राज्यों से संबंधित मामले अभी न्यायालयों में विचाराधीन हैं।
सरकारी पक्ष के तर्क
अमेरिका के एसोसिएट अटॉर्नी जनरल स्टेनली ई. वुडवर्ड जूनियर ने कहा, 'न्याय विभाग की कोशिश तब तक नहीं रुकेगी, जब तक हम ऐसे हर राज्य के कानून या यूनिवर्सिटी की नीति को चुनौती नहीं दे देते, जो हमारे अपने नागरिकों के मुकाबले अवैध प्रवासियों को प्राथमिकता देती है।' उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि राज्य ऐसी कम ट्यूशन फीस अवैध प्रवासियों को नहीं दे सकते, जो सभी अमेरिकी नागरिकों को उपलब्ध न हो।
न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने कहा, 'यह फेडरल कानून का सीधा मामला है। कॉलेज अवैध प्रवासियों को ऐसा फायदा नहीं दे सकते, जो अमेरिकी नागरिकों को नहीं दिया जाता।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'न्याय विभाग यह बर्दाश्त नहीं करेगा कि अमेरिकी छात्रों के साथ उनके अपने देश में दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाए।'
फीस का अंतर — विवाद की जड़
2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर ने कुछ अंडरग्रेजुएट कार्यक्रमों में डेलावेयर के निवासियों के लिए $656 प्रति क्रेडिट आवर की ट्यूशन फीस निर्धारित की है। वहीं, राज्य से बाहर के छात्रों के लिए यह दर $1,770 प्रति क्रेडिट आवर है। न्याय विभाग का कहना है कि यदि कोई प्रवासी — जो अमेरिका में कानूनी रूप से नहीं रह रहा — डेलावेयर में रहने के आधार पर कम फीस का लाभ उठाता है, तो यह उन अमेरिकी नागरिकों के साथ भेदभाव है जो किसी दूसरे राज्य से आकर पढ़ना चाहते हैं।
यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता
रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमा दायर होने तक यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर ने अपने आधिकारिक सार्वजनिक बयान पृष्ठ पर इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की थी। न्याय विभाग ने संघीय अदालत से विश्वविद्यालय की मौजूदा नीति को तत्काल प्रभाव से रोकने और भविष्य में इमिग्रेशन स्टेटस के आधार पर इसी प्रकार की नई नीतियाँ बनाने पर रोक लगाने की माँग की है। यह मामला अमेरिका में उच्च शिक्षा नीति और इमिग्रेशन कानून के बीच बढ़ते टकराव की एक नई कड़ी बन गया है — और आने वाले महीनों में अदालती फैसले इस पूरे परिदृश्य को नए सिरे से परिभाषित कर सकते हैं।