16 जुलाई 2026
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अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी: ईडी ने जालंधर की विशेष अदालत में दाखिल की चार्जशीट, ₹2.14 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग उजागर

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अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी: ईडी ने जालंधर की विशेष अदालत में दाखिल की चार्जशीट, ₹2.14 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग उजागर

सारांश

पंजाब में अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी का सुनियोजित नेटवर्क बेनकाब — इमिग्रेशन कंपनियों, कंसल्टेंसी फर्मों और सॉफ्टवेयर कंपनियों ने मिलकर 154 आवेदकों को फर्जी दस्तावेज दिए। ईडी ने जालंधर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की और ₹2.14 करोड़ की अपराध आय का आकलन किया है।

मुख्य बातें

ईडी ने अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जालंधर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
आरोपियों में रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड , ओवरसीज पार्टनर और रुद्रा कंसल्टेंसी सर्विसेज शामिल हैं।
154 वीजा आवेदकों को फर्जी फंड प्रमाण दिए गए; इसके लिए करीब ₹40 लाख अस्थायी रूप से खातों में डाले-निकाले गए।
प्रत्येक आवेदक से फर्जी फंड सुविधा के बदले लगभग ₹40,000 वसूले गए।
फरवरी 2025 की छापेमारी में ₹19 लाख नकद और लगभग 1 किलोग्राम सोने की ईंट बरामद हुई।
ईडी ने कुल ₹2.14 करोड़ की अपराध से अर्जित आय का आकलन किया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जालंधर स्थित विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई जांच में एजेंसी ने करीब ₹2.14 करोड़ की अपराध से अर्जित आय का आकलन किया है। यह मामला 154 वीजा आवेदकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए अमेरिकी वीजा दिलाने की सुनियोजित साजिश से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

जांच की शुरुआत पंजाब पुलिस और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर हुई थी। ये एफआईआर नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अमेरिकी छात्र और विजिटर वीजा हासिल करने के लिए फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र, नकली अनुभव प्रमाणपत्र, झूठे वित्तीय दस्तावेज और फर्जी फंड संबंधी प्रमाण तैयार कर जमा किए।

मुख्य आरोपी और उनकी भूमिका

ईडी ने इस मामले में तीन प्रमुख संस्थाओं को आरोपी बनाया है। अमनदीप सिंह और पूनम रानी द्वारा संचालित रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड ऐसे लोगों को निशाना बनाती थी जिनके पास वीजा के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता या वित्तीय क्षमता नहीं होती थी। आरोप है कि कंपनी वीजा आवेदकों से मोटी रकम लेकर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज, नकली कार्य अनुभव प्रमाणपत्र और पढ़ाई या नौकरी में गैप को छिपाने वाले दस्तावेज तैयार करती थी। विदेशी विश्वविद्यालयों और वीजा अधिकारियों से होने वाला पत्राचार भी आरोपियों के नियंत्रण वाले ईमेल खातों के माध्यम से किया जाता था।

अंकुर कुमार केहर द्वारा संचालित ओवरसीज पार्टनर ने नितिन विज की रुद्रा कंसल्टेंसी सर्विसेज के साथ मिलकर वीजा आवेदकों के बैंक खातों में अस्थायी रूप से रकम जमा कर उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत दिखाने की साजिश रची। इस तरीके से 154 वीजा आवेदकों को फर्जी फंड का प्रमाण उपलब्ध कराया गया — इसके लिए करीब ₹40 लाख अलग-अलग खातों में कुछ समय के लिए जमा किए गए और बाद में निकाल लिए गए। इस सुविधा के बदले प्रत्येक आवेदक से लगभग ₹40,000 वसूले गए।

कमलजोत कंसल द्वारा संचालित इन्फोविज सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन ऐसे लोगों के लिए फर्जी प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और अनुभव प्रमाणपत्र तैयार करती थी, जिन्होंने वास्तव में कहीं काम या प्रशिक्षण नहीं किया था। बरामद डायरी और अन्य दस्तावेजों से नकद भुगतान लेकर फर्जी रोजगार दस्तावेज तैयार किए जाने के सबूत मिले हैं।

छापेमारी और बरामदगी

ईडी ने फरवरी 2025 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत आरोपियों से जुड़े कई ठिकानों और लॉकरों पर छापेमारी की थी। इन छापों के दौरान जांच एजेंसी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, अवैध लेन-देन का रिकॉर्ड रखने वाली डायरियाँ, ₹19 लाख नकद और लगभग 1 किलोग्राम वजन की एक सोने की ईंट बरामद की।

आगे क्या होगा

जालंधर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि पंजाब में अमेरिकी वीजा के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का एक सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें इमिग्रेशन कंपनियाँ, कंसल्टेंसी फर्म और सॉफ्टवेयर कंपनियाँ एक साथ काम कर रही थीं। ईडी की आगामी जांच में और आरोपियों के सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

सॉफ्टवेयर कंपनियाँ और वित्तीय बिचौलिए एक साथ मिलकर अमेरिकी दूतावास को धोखा देने का पारिस्थितिकी तंत्र बना चुके थे। गौरतलब है कि ये एफआईआर अमेरिकी दूतावास की शिकायत पर दर्ज हुईं — यानी विदेशी एजेंसी को पहले संदेह हुआ, भारतीय एजेंसियों को बाद में। असली सवाल यह है कि 154 मामलों में से कितने वीजा वास्तव में जारी हुए और उन लोगों का क्या हुआ — यह पहलू चार्जशीट में स्पष्ट नहीं है। बिना इस जानकारी के, ₹2.14 करोड़ की 'अपराध आय' का आँकड़ा पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने जालंधर अदालत में किस मामले में चार्जशीट दाखिल की है?
ईडी ने अमेरिकी वीजा धोखाधड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जालंधर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड, ओवरसीज पार्टनर और रुद्रा कंसल्टेंसी सर्विसेज को आरोपी बनाया गया है।
इस वीजा धोखाधड़ी में कितने लोग प्रभावित हुए और कितनी रकम शामिल है?
जांच के अनुसार 154 वीजा आवेदकों को फर्जी फंड का प्रमाण उपलब्ध कराया गया। ईडी ने कुल ₹2.14 करोड़ की अपराध से अर्जित आय का आकलन किया है, जबकि फर्जी फंड दिखाने के लिए करीब ₹40 लाख अलग-अलग खातों में अस्थायी रूप से डाले-निकाले गए।
रेड लीफ इमिग्रेशन क्या करती थी और इसके खिलाफ क्या आरोप हैं?
रेड लीफ इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड अमनदीप सिंह और पूनम रानी द्वारा संचालित थी। यह कंपनी उन लोगों को निशाना बनाती थी जिनके पास वीजा के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता या वित्तीय क्षमता नहीं होती थी और उनके लिए फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज, नकली कार्य अनुभव प्रमाणपत्र और अस्थायी फंड की व्यवस्था करती थी।
ईडी की छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
फरवरी 2025 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत की गई छापेमारी में ईडी ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, अवैध लेन-देन की डायरियाँ, ₹19 लाख नकद और लगभग 1 किलोग्राम वजन की एक सोने की ईंट बरामद की।
इस मामले की जांच कैसे शुरू हुई?
जांच की शुरुआत पंजाब पुलिस और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर हुई थी। ये एफआईआर नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं, जिसके बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
राष्ट्र प्रेस
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