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पनामा नहर पर चीन की नज़र, ट्रंप बोले — 'हम ऐसा नहीं होने देंगे'

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पनामा नहर पर चीन की नज़र, ट्रंप बोले — 'हम ऐसा नहीं होने देंगे'

सारांश

ट्रंप ने मेडोरा में थियोडोर रूजवेल्ट लाइब्रेरी के उद्घाटन पर पनामा नहर को लेकर चीन को कड़ी चेतावनी दी। नहर को 1999 में पनामा को सौंपे जाने के फैसले को उन्होंने फिर 'गलती' बताया। कोई नई नीति की घोषणा नहीं, लेकिन भू-राजनीतिक संकेत स्पष्ट हैं।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 जुलाई 2026 को नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में चीन को पनामा नहर पर प्रभाव बढ़ाने से रोकने की चेतावनी दी।
ट्रंप ने 1999 में नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपे जाने के फैसले को 'गलती' करार दिया।
उन्होंने दावा किया कि पनामा ने नियंत्रण मिलने के बाद ट्रांजिट फीस चार गुना से अधिक बढ़ाई।
82 किमी लंबी पनामा नहर वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 5% वहन करती है और भारत के व्यापार के लिए भी रणनीतिक महत्व रखती है।
ट्रंप ने इस अवसर पर कोई नई नीति या ठोस कार्रवाई की घोषणा नहीं की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 जुलाई 2026 को एक बार फिर स्पष्ट किया कि चीन रणनीतिक पनामा नहर पर अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। यह बयान उन्होंने नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में दिया।

ट्रंप का बयान और पुरानी आलोचना

राष्ट्रपति ट्रंप ने समारोह में कहा, 'अब चीन पनामा नहर पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है और हम ऐसा नहीं होने देंगे।' उन्होंने नहर का नियंत्रण पनामा को सौंपे जाने के अमेरिकी फैसले को 'गलती' करार देते हुए कहा, 'हमने इसे दे दिया। यह अब तक की सबसे महंगी चीज थी जो हमने बनाई थी और यह अब तक की सबसे ज़्यादा फायदेमंद चीज भी थी।' गौरतलब है कि यह ट्रंप की उस पुरानी आलोचना की पुनरावृत्ति है जो वे अपने पहले कार्यकाल से ही दोहराते आए हैं।

ट्रांजिट फीस पर ट्रंप के दावे

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि नहर का नियंत्रण मिलने के बाद पनामा ने जहाज़ों की ट्रांजिट फीस में भारी बढ़ोतरी की। उनके अनुसार, 'उन्होंने जहाज़ों की कीमतें चार गुना बढ़ा दीं और उन्हें एक भी जहाज़ नहीं खोना पड़ा। और फिर उन्होंने इसे दो बार और बढ़ाया।' हालाँकि, इस संबोधन में ट्रंप ने नहर को लेकर कोई नई नीति या ठोस कार्रवाई की घोषणा नहीं की।

रूजवेल्ट की विरासत से जोड़ा संदर्भ

ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका नेतृत्व संरक्षण और घरेलू सुधारों से आगे बढ़कर पनामा नहर जैसे बड़े बुनियादी ढाँचे तक फैला था। उन्होंने नहर को अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक बताया। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन के बीच भू-राजनीतिक तनाव कई मोर्चों पर चरम पर है।

पनामा नहर का इतिहास और महत्व

पनामा नहर को अमेरिका ने 20वीं सदी की शुरुआत में राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट के कार्यकाल में बनवाया था। 1977 में हस्ताक्षरित संधि के तहत अमेरिका ने धीरे-धीरे नहर का नियंत्रण पनामा को हस्तांतरित किया और 31 दिसंबर 1999 को यह प्रक्रिया पूरी हुई। अब इसे पनामा सरकार की स्वायत्त एजेंसी पनामा कैनाल अथॉरिटी संचालित करती है।

82 किमी लंबी यह नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ती है और वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 5% हिस्सा वहन करती है। भारत के साथ होने वाले व्यापार के लिए भी यह नहर रणनीतिक महत्व रखती है — शिपिंग लागत में बदलाव या यातायात में रुकावट से माल ढुलाई दरों और आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर पड़ सकता है।

आगे क्या

ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका-पनामा और अमेरिका-चीन संबंधों पर कूटनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कोई ठोस नीतिगत कदम नहीं उठाया जाता, यह बयान राजनीतिक संकेत से अधिक कुछ नहीं है — लेकिन वैश्विक शिपिंग बाज़ारों में इसकी प्रतिक्रिया देखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हर बार बिना किसी ठोस नीतिगत कदम के। असली सवाल यह है कि क्या यह महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी है या वाशिंगटन वास्तव में इंडो-पैसिफिक रणनीति के तहत नहर पर अपनी पकड़ मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है। पनामा कैनाल अथॉरिटी एक स्वायत्त एजेंसी है और नहर का संचालन अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत पनामा के अधिकार क्षेत्र में है — ऐसे में ट्रंप के 'हर ज़रूरी कदम' उठाने के दावे की कूटनीतिक और कानूनी सीमाएँ हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने पनामा नहर को लेकर चीन पर क्या आरोप लगाए?
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि चीन पनामा नहर पर अपना प्रभाव बढ़ाने और उस पर 'कब्ज़ा' करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका इसे रोकने के लिए हर ज़रूरी कदम उठाएगा, हालाँकि कोई ठोस नीति की घोषणा नहीं की गई।
पनामा नहर का नियंत्रण अमेरिका ने कब और क्यों पनामा को सौंपा?
1977 में हस्ताक्षरित संधि के तहत अमेरिका ने धीरे-धीरे नहर का नियंत्रण पनामा को हस्तांतरित किया और 31 दिसंबर 1999 को यह प्रक्रिया पूरी हुई। तब से पनामा सरकार की स्वायत्त एजेंसी पनामा कैनाल अथॉरिटी इसका संचालन करती है।
पनामा नहर का वैश्विक व्यापार में क्या महत्व है?
82 किमी लंबी यह नहर अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ती है और वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 5% वहन करती है। भारत समेत कई देशों की आपूर्ति श्रृंखला इस नहर पर निर्भर है, इसलिए इसमें कोई भी बाधा शिपिंग लागत को सीधे प्रभावित करती है।
ट्रंप ने यह बयान कहाँ और किस संदर्भ में दिया?
यह बयान नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में 2 जुलाई 2026 को दिया गया। ट्रंप पूर्व राष्ट्रपति रूजवेल्ट की विरासत की चर्चा करते हुए पनामा नहर के निर्माण और उसके बाद के घटनाक्रम पर आए।
क्या ट्रंप ने पनामा नहर पर कोई नई नीति की घोषणा की?
नहीं, ट्रंप ने इस संबोधन में पनामा नहर के संदर्भ में कोई नई नीति या ठोस कार्रवाई की घोषणा नहीं की। यह उनकी पुरानी आलोचना की पुनरावृत्ति थी जिसमें नहर को पनामा को सौंपे जाने के फैसले को 'गलती' बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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