तुर्की में 'माई फैमिली इज सेफ' अभियान: एलजीबीटीक्यू+ संगठनों पर छापे, 100 से अधिक हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
तुर्की सरकार के 'माई फैमिली इज सेफ' अभियान के तहत इस्तांबुल, अंकारा, इजमिर, आयदीन और मर्सिन सहित कई शहरों में एलजीबीटीक्यू+ संगठनों और एचआईवी जागरूकता समूहों के दफ्तरों पर छापेमारी के बाद मंगलवार, 16 सितंबर को 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें कार्यकर्ता, पत्रकार और प्रदर्शनकारी शामिल थे, जिन्हें रिपोर्टों के अनुसार बुधवार को दबाव के बाद रिहा कर दिया गया। ह्यूमन राइट्स वॉच ने इसे हाल के वर्षों में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के विरुद्ध सबसे व्यापक कार्रवाई बताया है।
कार्रवाई का दायरा और आधार
तुर्की के न्याय मंत्री अकिन गुरलेक के अनुसार, यह अभियान उन स्थानों और व्यक्तियों के खिलाफ चलाया गया जिन पर कथित तौर पर अश्लील सामग्री, वेश्यावृत्ति और बच्चों को ऐसी सामग्री से अवगत कराने जैसी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप था। अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान डिजिटल उपकरण, नशीले पदार्थ और एक हथियार जब्त करने का दावा किया।
न्याय मंत्रालय ने देश के सभी 81 प्रांतों के अभियोजकों को निर्देश दिया है कि वे बच्चों को कथित अश्लील सामग्री से बचाने और 'जेंडरलेसनेस' को बढ़ावा देने वाली सामग्री संबंधी शिकायतों की जाँच करें। साथ ही डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने और आवश्यकता पड़ने पर ऑनलाइन सामग्री पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया भी तेज की गई है।
पत्रकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर
कार्रवाई का दायरा तब और विस्तृत हो गया जब प्रमुख दैनिक बिरगुन की पत्रकार तुग्बा तेकेरेक को भी गिरफ्तार किया गया। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स के अनुसार, तेकेरेक ने आरोपों से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि उनका संबंधित संगठन से कोई औपचारिक संबंध नहीं था और उन्होंने उसके समाचार मंच के लिए केवल एक रिपोर्ट लिखी थी।
डेली सबाह के अनुसार, मंगलवार को इस्तांबुल के एक न्यायालय के बाहर एलजीबीटीक्यू+ कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों ने 'एलजीबीटीक्यू+ होना अपराध नहीं' के नारे लगाए। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकार भी इस हिरासत में शामिल थे।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तुर्की सरकार व्यापक 'अश्लीलता' संबंधी कानूनों का उपयोग एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों की पैरवी करने वाले संगठनों और कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कर रही है। यूरोपीय परिषद के मानवाधिकार आयुक्त माइकल ओ'फ्लाहर्टी ने चेतावनी दी कि 'परिवार के मूल्यों' या 'बच्चों की सुरक्षा' का हवाला मानवाधिकारों पर अंकुश लगाने का कानूनी आधार नहीं बन सकता।
आलोचकों का कहना है कि पत्रकारों की गिरफ्तारी और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने से यह कार्रवाई अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
ऐतिहासिक संदर्भ: बढ़ता दबाव
गौरतलब है कि तुर्की में समलैंगिक संबंध अपने आप में कानूनी रूप से अपराध की श्रेणी में नहीं आते। हालांकि, सरकार की नीतियों और सार्वजनिक बयानबाज़ी के कारण पिछले कुछ वर्षों में इस समुदाय पर दबाव लगातार बढ़ा है। इस्तांबुल प्राइड पर 2015 से प्रतिबंध लागू है और वहाँ होने वाले प्रदर्शनों को पुलिस कई बार बलपूर्वक रोक चुकी है।
यह कार्रवाई राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की 'डिकेड ऑफ द फैमिली एंड पॉपुलेशन' पहल से भी जुड़ी बताई जा रही है, जिसे सरकार गिरती जन्मदर और बढ़ती उम्रदराज आबादी जैसी जनसांख्यिकीय चुनौतियों से निपटने की अपनी नीति का हिस्सा बताती है। यह ऐसे समय में आया है जब तुर्की में नागरिक समाज पर व्यापक दबाव की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है।
आगे क्या
तुर्की सरकार ने संकेत दिया है कि यह अभियान जारी रहेगा। 81 प्रांतों में अभियोजकों को सक्रिय रूप से निगरानी का निर्देश दिया गया है और ऑनलाइन सामग्री पर प्रतिबंध की प्रक्रिया तेज की जा रही है। मानवाधिकार संगठन अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की माँग कर रहे हैं, जबकि प्रभावित कार्यकर्ता और पत्रकार अपने ऊपर लगे आरोपों को कानूनी चुनौती देने की तैयारी में हैं।